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Hafta 216: Christchurch shooting, Samjhauta blast verdict & more
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access_time5 hours ago
In this episode of NL Hafta, Abhinandan Sekhri, Raman Kirpal and Anand Vardhan are joined by journalist Maya Mirchandani. The discussion kicks off with Amit Shah getting Lok Sabha elections ticket from LK Advani’s constituency, Gandhinagar. The panel also discusses Priyanka Gandhi Vadra’s role in the current political scenario. Maya says, “Priyanka Gandhi is great optics for Congress.” The panellists agree that she is creating enough ripples as a new leader and is making BJP nervous. However, Raman differs, “Congress seeking an alliance is openly declaring that they have reduced to a regional party.” Moving forward Abhinandan and Maya appreciate the Election Commission's idea of increasing the transparency by asking for details of commutation of politicians via personal choppers and chartered flights. Talking about elections and parties, the panel also talks about Shah Faesal’s new political party, J&K Peoples' Movement. While Abhinandan is skeptical about the party's success, Maya also agrees that the party has no clear agenda. Raman adds, “As the polling percentage is low in J&K, so at this point, it might be a gamechanger.” The panel also talks about the ardent and strong leadership of New Zealand’s PM Jacinda Ardern, who imposed an immediate ban on all military-style semi-automatic weapons, assault rifles and stood in complete solidarity with the community. Raman says, “Its an example of how to handle a crisis." The panelists agree in unison that if she wouldn’t have called the incident a terror attack, nobody would have stood up. The panel also discusses Shashi Tharoor's defamation case against the derogatory remarks of Ravi Shankar Prasad in the Samjhauta Express verdict. For this and more, tune in!
एनएल चर्चा 61: येदियुरप्पा की डायरी, आडवाणी का टिकट कटना और अन्य
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access_time11 hours ago
बीत रहा हफ़्ता रंगों के त्यौहार ‘होली’ के उल्लास में डूबा रहा. इस बीच तमाम घटनाएं अप्रभावित अपनी गति से घटती रहीं. तमाम चिंताजनक वारदातों से अप्रभावित प्रधानमंत्री के कार्यक्रम वक़्त और तारीख़ में बिना किसी फेरबदल के आयोजित होते रहे. ऐसे में नज़ीर अकबराबादी का होली पर लिखा गीत ‘होली की बहारें’ बेहद मानीखेज़ है. उनके लिए फिराक़ गोरखपुरी लिखते हैं कि नज़ीर दुनिया के रंग में रंगे हुए महाकवि थे. वे दुनिया में रहते थे और दुनिया उनमें रहती थी, जो उनकी कविताओं में हंसती-बोलती, जीती-जागती त्यौहार मनाती नज़र आती है. गीत के कुछ अंश इस प्रकार हैं- “जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की और दफ़ के शोर खड़कते हों तब देख बहारें होली की परियों के रंग दमकते हों तब देख बहारें होली की ख़ुम, शीशे, जाम झलकते हों तब देख बहारें होली की.” अनिल यादव गीत के बारे में बताते हुए कहते हैं कि ऐसे वक़्त में जब सांप्रदायिक आधारों पर समाज को बांटने की कोशिशें बदस्तूर जारी हैं, यह गीत इस लिए भी सुना/ पढ़ा जाना चाहिए क्योंकि इससे पता चलता है कि हमारी साझी संस्कृति का रंग कितना गहरा है. रंगों के त्यौहार पर संक्षिप्त बातचीत व गीत के ज़िक्र के बात चर्चा के विषयों की ओर लौटना हुआ. इस हफ़्ते की चर्चा में भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा उम्मीदवारों की पहली सूची जारी हुई जिसमें वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी का नाम नहीं होने के बाद अब उनके राजनीतिक अवसान, पंजाब नेशनल बैंक से तकरीबन 13000 करोड़ रूपये के गबन के बाद देश से फरार चल रहे नीरव मोदी की लंदन में हुई गिरफ़्तारी, पत्रकार बरखा दत्त को गालियां देने व जान से मारने की धमकी देने वाले कुछ लोगों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने, न्यूज़ीलैण्ड में मस्जिदों में घुसकर दो बन्दूकधारियों द्वारा तकरीबन 50 लोगों की हत्या की आतंकवादी घटना, प्रधानमंत्री के चुनावी अभियान ‘मैं भी चौकीदार’ और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की सीक्रेट डायरी प्रकाश में आने, उससे सामने आ रहे तथ्यों को चर्चा में विशेष तौर पर लिया गया. चर्चा में इस बार लेखक-पत्रकार अनिल यादव व न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकार आनंद वर्धन शामिल हुए. चर्चा का संचालन हमेशा की तरह न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. कर्नाटक के डायरी-प्रकरण से चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल ने सवाल किया कि यह डायरी कथित तौर पर कांग्रेस के नेता वीके शशि कुमार के घर से ज़ब्त की गई थी. 2017 से यह डायरी वित्त मंत्रालय के संज्ञान में होने के बावजूद सरकार द्वारा डायरी को दबाकर बैठे जाने को राजनीतिक प्रक्रिया के लिहाज़ से कैसे देखा जाए? क्या इसे तेज़ होती चुनावी सरगर्मियों के बीच कांग्रेस पार्टी द्वारा सनसनी पैदा करने की एक कोशिश कह सकते हैं या फिर यह डायरी बताती है कि राजनीतिक संस्कृति में भारतीय जनता पार्टी भी उतनी ही करप्ट है जितनी कि कांग्रेस? जवाब देते हुए अनिल ने कहा, “देखिए! करप्ट तो सारी पार्टियां हैं. असल बात ये है कि कोई राजनीतिक पार्टी उस करप्शन का पॉलिटिकल मैनेजमेंट कैसे करती है. बीजेपी ने इसका मैनेजमेंट करने के लिए अरसा पहले ही ‘पार्टी विद अ डिफरेंस’ का नारा दिया.” इसी क्रम में 2014 के चुनाव के वक़्त के प्रधानमंत्री मोदी के नारे ‘न खाऊंगा न खाने दूंगा’ का ज़िक्र करते हुए अनिल ने कहा, “पूरे कार्यकाल में बीजेपी के बड़े नेता लगातार कहते रहे हैं कि हमारी सरकार में सब हुआ लेकिन करप्शन नहीं हुआ. लेकिन अब एक के बाद जैसी ख़बरें आ रही हैं वो बताती हैं कि उनका जो करप्शन का प्रबंधन करने का तरीक़ा था वो नाकाम हो गया और ये जो करप्शन हो रहे हैं वो पहले से भी बड़े करप्शन हैं. मुझे लगता है कि नैतिक मुद्रा अपना करके, झूठ बोल करके बीजेपी ने छवि-प्रबंधन की जो कोशिश की थी अब उसके चीथड़े उड़ रहे हैं.” इसी कड़ी में इस बात का ज़िक्र करते हुए कि जब येदियुरप्पा का पूरा कार्यकाल भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा रहा व उन्हें इस्तीफ़ा भी देना पड़ा अतुल ने सवाल किया कि उस पूरे मामले के लिहाज से इस पूरी राजनीतिक संस्कृति पर गौर करते हुए क्या आपको लगता है कि यह महज़ चुनाव के पहले महज़ एक हथकंडा अपना जा रहा है? अपने जवाब में आनंद वर्धन ने कहा, “चुनाव के मौसम में इस तरह की तमाम कहानियां दोनों पक्षों से आएंगी. दूसरी बात कि ‘पार्टी विद अ डिफ़रेंस’ नब्बे के दशक में भाजपा की अपील रही है. मेरे ख़याल से उसके बाद उसकी यह अपील नहीं रही है. यह मुख्यधारा की राष्ट्रीय पार्टी है जो परसेप्शन की लड़ाई ज़्यादा लड़ेगी. और राजनीति में यह तात्कालिक जरूरतों पर हमेशा भारी पड़ता है.”
The Awful and Awesome Entertainment Wrap Ep 107: Hasan Minhaj, Cricket Fever and more
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access_time1 day ago
एनएल चर्चा 60: लोकसभा चुनाव की तारीखें, सर्फ एक्सेल विवाद और अन्य
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access_time8 days ago
बीता हफ़्ता कई वजहों से चर्चा में रहा. चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की जिसके साथ ही नेताओं की बयानबाजी का दौर शुरू हो गया. इस हफ़्ते की कुछ प्रमुख घटनाओं मसलन कर्नाटक के बीजेपी नेता अनंत कुमार हेगड़े का राहुल गांधी और उनके परिवार पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना, हिंदुस्तान यूनीलीवर के उत्पाद ‘सर्फ़ एक्सेल’ के होली से जुड़े एक विज्ञापन पर उठा विवाद, अदालत की अवमानना के आरोप के चलते शिलॉन्ग टाइम्स की एडिटर पैट्रीशिया मुखीम पर मेघालय हाईकोर्ट द्वारा लगाया गया जुर्माना और जुर्माने की अदायगी में असफल रहने पर 6 महीने की जेल के साथ अख़बार बंद करने का आदेश, आदि विषय इस बार की चर्चा में शामिल रहे. चर्चा में इस बार पत्रकार राहुल कोटियाल ने बतौर मेहमान शिरकत की. साथ ही न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकार आनंद वर्धन व लेखक-पत्रकार अनिल यादव भी चर्चा में शामिल रहे. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल ने कहा कि हमारे समाज या समय में हर चीज़ के साथ विवाद जुड़ जाने की एक परंपरा विकसित हो गई है और अब किसी भी चीज़ का विवादों के साए में चले जाना आम सी बात हो गई है. चुनाव की तारीख़ों के ऐलान के बाद रमज़ान के महीने में चुनाव होने और चुनाव की तारीख़ों व फेज़ को लेकर भी विवाद हो गया. राजनीतिक गलियारों में लगाई जा रही इन अटकलों का ज़िक्र करते हुए कि चुनाव की तारीख़ें बीजेपी के मुफ़ीद हैं, अतुल ने सवाल किया कि इस विवाद को कैसे देखा जाए? क्या इसमें विपक्ष को किसी भी तरह का डिसएडवांटेज है? जवाब देते हुए अनिल ने कहा, “ये चुनाव काफ़ी अविश्वास के माहौल में हो रहे हैं. एक संभावना यह भी थी कि क्या पता चुनाव हों ही न. सर्जिकल स्ट्राइक के बाद ये अटकलें लगाई गईं कि हो सकता है प्रधानमंत्री मोदी आपातकाल लागू करने के लिए इस अवसर का इस्तेमाल करें और चुनाव आगे चलकर तब कराएं जब परिस्थितियां उनके पक्ष में हो जाएं दूसरा एक बहुत बड़ी आशंका पिछले पांच सालों में हवा में रही है कि ईवीएम के ज़रिए चुनाव में गड़बड़ी की जाती है. तो एक तरह से सरकार और चुनाव आयोग के प्रति पिछले पांच सालों में एक अविश्वास का माहौल हवा में रहा है और उसी पृष्ठभूमि में ये चुनाव हो रहे हैं. तो जहां असुरक्षा होती है, अविश्वास होता है, हर चीज़ के दूसरे अर्थ निकाले जाते हैं. और मुझे यह लगता है कि चुनाव का कई फेज़ में होना किसी के भी पक्ष जा सकता है. सिर्फ भाजपा को ही इसका फायदा मिलेगा, यह सोचना ठीक नहीं है.” विवाद लाज़मी था या ग़ैरज़रूरी? इस सवाल का जवाब देते हुए आनंद कहते हैं, “हम लोग अतिविश्लेषण युग में रह रहे हैं, हर चीज़ का विश्लेषण बहुत अधिक होता है, और अतिविश्लेषण के बाद कुछ न कुछ तो निष्कर्ष निकलता ही है. या निष्कर्ष तय करके फिर विश्लेषण कर लिया जा रहा है. यह दोनों ही चीज़ें हो रही हैं.” आनंद ने इसी में आगे जोड़ते हुए कहा कि अगर इस तरह कि अटकलें इवीएम के स्तर पर हैं तो फिर चुनाव की तारीख़ें और चरण क्या हैं उस आरोप का कुछ ख़ास मतलब नहीं रह जाता. नवीन पटनायक द्वारा 33% और ममता बनर्जी द्वारा 35% टिकट महिलाओं को दिया जाना क्या बाकी दलों पर एक दबाव की तरह काम करेगा? महिला आरक्षण का कानून पास हुए बिना ही राजनीतिक दल इस तरह के सकारात्मक बदलाव करने के लिए मजबूर हैं? इस सवाल के जवाब में राहुल कहते हैं, “बिल्कुल! पहली ही नज़र में यह बहुत सकारात्मक कदम लगता है. अब बीजेपी-कांग्रेस जैसे दलों में फैसले आलाकमान की तरफ से लिए जाते हैं. टिकटों का निर्धारण वहीं से होता है. ऐसे में इन पार्टियों के लिए टिकट बंटवारे में 33% सीटें महिलाओं के देने की बात करना मुश्किलों भरा हो जाएगा क्योंकि तब इन्हें कैंडिडेट ढूंढ़ने में ख़ासी मशक्कत करनी पड़ेगी.” इसी क्रम में बाकी विषयों पर भी बेहद गंभीर व दिलचस्प चर्चा हुई. बाकी विषयों पर पैनल की विस्तृत राय जानने-समझने के लिए पूरी चर्चा सुनें.
Hafta 212: #PulwamaAttack, Saudi Prince's visit and online harassment of Barkha Dutt
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access_time8 days ago
In the latest episode of NL Hafta, the usual gang of Abhinandan Sekhri, Manisha Pande, Raman Kirpal and Anand Vardhan are joined by journalist Kaveree Bamzai to discuss Pulwama attack, harassment of Kashmiri student in Dehradun, MBS’ visit to India and more. The conversation kicks off with Kaveree talking about surviving as an independent, freelance journalist in the industry. She also talks about the casual sexism and misogyny in newsrooms. Then, the panel moves on to discuss the attack on CRPF convoy in Pulwama where 44 soldiers lost their lives. Manisha, while talking about the news coverage of the Pulwama attack, says, “Newspapers did a far better job of telling us what happened, the mastermind, raising questions on how 300kgs of explosive just goes through undetected.” Kaveree jumps in and feels the basic questions were ignored, she says, “It was a marketing opportunity which both PM Modi and TV channels saw.” She also mentions how Syed Ali Shah Geelani and Yasin Malik were forgotten, in the recent order of security withdrawal of separatists. Following the discussion on Pulwama attack and the back and forth between India and Pakistan, the panel also discusses how some journalists in India had to go through harassment. Journalists like Ravish Kumar and Barkha Dutt were harassed with lewd messages and photos. Defending Barkha’s move to put out all the messages and photos on Twitter, Kaveree said, “She has every right to tell people that this is the kind of abuse I am getting and if they don’t understand, to give them visual proof, it’s called shock therapy and it usually works.” The panel also discussed CobraPost’s Operation Karaoke, Supreme Court’s order asking Anil Ambani to pay dues in the Ericson case, Saudi crown prince Mohammad bin Salman’s visit to India and more. Listen up!
Chhota Hafta - Episode 215
Newslaundry Podcast
access_time8 days ago
NL Hafta has gone behind the paywall, but we love our listeners. So, here's a little sneak peek into the complete episode. In this week’s podcast, Abhinandan Sekhri is joined by Raman Kirpal, Anand Vardhan and Manisha Pande. Joining them over the phone is The News Minute's deputy news editor, Ragamalika Karthikeyan, to talk about the Pollachi case. The podcast begins with Ragamalika detailing the Pollachi sexual abuse and extortion case. The four men accused “seem to be doing it as a racket”, she says. Manisha says she agrees with the Madras High Court's observations on Delhi media's lack of priority in covering the case, but Abhinandan says he's conflicted. The conversation shifts to how newspapers in Assam went on a three-day boycott of all state government news, ads and photographs in protest against its alleged apathy. The panel also talks about Nirav Modi, the Shillong Times case, and Chandrashekhar Azad who has announced he will contest against PM Modi from Varanasi. Listen to the full episode here.
Reporters Without Orders Ep 59: #ElectionCommission, Jammu and Kashmir & more
Newslaundry Podcast
access_time8 days ago
This week’s Reporters Without Orders features our host Cherry Agarwal, award-winning reporter Amit Visen, Newslaundry’s head of research Ayush Tiwari and desk writer Gaurav Sarkar. The panel talks about gender pay gap across newsrooms, Rahul Gandhi's use of "ji" for Jaish chief Masood Azhar, Election Commission's presser, custodial deaths in Bihar, government advertisements and more. The discussion starts with Ayush talking about a YouGov poll on dwindling job opportunities in the country. He mentions that the females surveyed are conscious of the disparity in pay. Cherry mentions the BBC's gender pay gap story and asks Amit about his experience with different media organisations. Amit speaks of the prejudice against women journalist that restricts them to female-centric content. Reflecting on what was over-reported by sections of the media, Gaurav talks about the internet outrage over Rahul Gandhi using "ji" to address Masood Azhar. The panel also discusses the misuse of laws such as sedition. Amit talks about the announcements made by the Election Commission and what does no-go for simultaneous elections in Jammu and Kashmir mean. He also expresses his disappointment at the under-reporting of the custodial deaths in Bihar. Ayush and Gaurav share their opinion on the Huffington Post report about the Indian cricket team wearing camouflage caps. “…It's not difficult to see the emotion that they are coming from, post-Pulwama, but does it really require PCB [Pakistan Cricket Board] …to say that you all are hurting our sentiments?” says Gaurav. Ayush remarks, “They [Indian government] have given patriotism a bad name by taking it to very irrational extremes but that shouldn’t limit our horizon of looking at things.” Cherry discusses the upcoming Lok Sabha elections and some of the announcements made by the Election Commission. Is monitoring the spread of fake news and disinformation across social media platforms within EC's jurisdiction? Is EC's reasoning for not holding Jammu and Kashmir's assembly polls tenable? For answers to these, some media updates and more, listen up! NL Sena: https://www.newslaundry.com/sena
The Awful and Awesome Entertainment Wrap Ep 106: Captain Marvel, Leaving Neverland and more
Newslaundry Podcast
access_time9 days ago
In this episode of The Awful and Awesome Entertainment Wrap, hosts Rajyasree Sen and Abhinandan Sekhri discuss Captain Marvel, Surf Excel’s advertisement #RangLaayeSang, Leaving Neverland and more. The podcast kicks off with Abhinandan who, though a Marvel Universe enthusiast, wasn't convinced by their latest offering Captain Marvel. Rajyasree expresses her lack of interest in watching the movie. She then discusses Ricky Gervais’s Netflix series After Life, saying: “It is one of the finest shows that he’s created in a while.” Abhinandan chimes in, mentioning Gervais’s endearing performance that accompanies his dark humour. The conversation moves to the Surf Excel ad #RangLaayeSang which, contrary to its intentions, invoked some amount of communal disharmony. Both Abhinandan and Rajyasree think the ad managed to convey its message and express their dissatisfaction with the kind of responses that have popped up on social media. The duo then discusses the documentary Leaving Neverland. Talking about the documentary's format, Abhinandan says it's a compelling watch. Rajyasree praises the extensive detailing of facts to allow viewers to reach their own conclusions. Abhinandan tries to dissect Micheal Jackson’s position while emphasising that it shouldn't be taken as a justification. He says, "I believe Micheal Jackson was insane … on a different wavelength … I think he was coming from a place of love and not damage he truly believed this love was genuine love.” Rajyasree disagrees, citing examples of warped love and sexual grooming. This and a lot more, so tune in!
चर्चा 59: सांसद-विधायक जूतम पैजार, अयोध्या, राफेल और अन्य
Newslaundry Podcast
access_time14 days ago
बीते हफ़्ते एक तरफ़ जहां कुछ बेहद अहम मुद्दे चर्चा में रहे वहीं कुछ घटनाएं मीडिया गलियारों में सनसनी की तरह छाईं रहीं. इस हफ़्ते की चर्चा में हमने उन्हीं में से कुछ को विषयों के लिया. उत्तर प्रदेश के संत कबीरनगर में सांसद और विधायक के बीच हुई जूतम-पैजार की घटना और भारतीय राजनीति की अहंकार-नीति, अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद और विवाद सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा हुई तीन मध्यस्थों की नियुक्ति, राफेल डील से जुड़े कुछ दस्तावेज़ों की चोरी, सरकार के रवैये और द हिन्दू को निशाने पर लिए जाने और प्रधानमंत्री द्वारा मानवीय गरिमा और समझ-बूझ को परे रखते हुए बेहद संवेदनहीनता से डिस्लेक्सिया पीड़ितों का मज़ाक उड़ाए जाने की घटना को चर्चा के विषय के तौर पर लिया गया. चर्चा में इस बार ‘पेट्रियट’ न्यूज़पेपर के सीनियर एसोसिएट एडिटर मिहिर श्रीवास्तव ने बतौर मेहमान शिरकत की. साथ ही चर्चा में लेखक-पत्रकार अनिल यादव भी शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. चर्चा की शुरुआत में ‘न्यूडिटी’ पर अपने शोध और क़िताबों के लिए मशहूर मिहिर इस विषय पर अपनी संक्षिप्त राय रखते हुए कहते हैं, “जहां तक न्यूडिटी का सवाल है, इसके नाम पर कुछ लोग संस्कृति के ठेकेदार बने फिरते हैं. लोगों को मारते हैं, पेंटिंग फाड़ देते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि जिस चीज़ की वह सुरक्षा करने में लगे हैं, वह भारत की संस्कृति नहीं है. वह ‘विक्टोरियन मोरैलिटी’ है. यह ‘विक्टोरियन मोरैलिटी’ ढाई-तीन सौ साल पहले अंग्रेज़ी शासन के दौरान हम पर थोपी गई है.” इसके बाद उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर में हुए ‘जूता-प्रकरण’ से चर्चा के निर्धारित विषयों की ओर लौटते हुए चर्चा की शुरुआत हुई. भारतीय समाज और राजनीति में पद-प्रतिष्ठा और नाम की भूख और इससे पैदा अहंकार पर बात करते हुए अतुल सवाल करते हैं, “नाम की भूख और यश लोलुपता की यह परंपरा इस स्तर तक पहुंच जाए कि वह ‘जूता’ चलने की एक परंपरा को जन्म दे और वह परंपरा अमर हो जाए, आप इसे कैसे देखते हैं?” जवाब में बरसों पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा में जूतम-पैजार की घटना का ज़िक्र करते हुए अनिल कहते हैं, “जो लोग पॉलिटिक्स में हैं, वो अपनी जो छवि पेश करते हैं, वो असल में वैसे हैं नहीं. वो पोज़ करते हैं कि वो लोगों की सेवा करने के लिए, अपने इलाके का विकास करने के लिए या जो अन्याय, ग़रीबी है उसे ख़त्म करने के लिए वो पॉलिटिक्स में हैं. लेकिन वो मूलतः पॉलिटिक्स में अपनी प्रतिष्ठा के लिए हैं, अपने अहंकार, अपने जलवे, अपने दबदबे के लिए हैं. इस बात को वो आम तौर पर छिपाए रहते हैं लेकिन ये बात छिपती नहीं है. और जहां भी ज़रा सा ऊंच-नीच होता है यह छवि उभर कर सामने आ जाती है.” इसी बात को आगे बढ़ाते हुए मिहिर कहते हैं, “इसमें महत्वपूर्ण बात यह भी है कि कोई परोपकार करने तो पॉलिटिक्स में आता नहीं है और किसी को इस ग़लतफ़हमी में रहना भी न चाहिए. लेकिन जो बात ये जूताबाजी सामने लाती है, वो है असहिष्णुता. यहां ये बात है कि अगर पद-प्रतिष्ठा में मैं ऊंचा हूं तो आप मेरी बात सुनेंगे और अगर नहीं सुनेंगे तो जूता खाएंगे.” चर्चा में अतुल ने श्रीलाल शुक्ल के उपन्यास ‘राग दरबारी’ का एक अंश पढ़ा जिसे इस घटना से जोड़कर देखना बेहद मौजूं है, “इस बात ने वैद्यजी को और भी गंभीर बना दिया, पर लोग उत्साहित हो उठे. बात जूता मारने की पद्धति और परंपरा पर आ गई. सनीचर ने चहककर कहा कि जब खन्ना पर दनादन-दनादन पड़ने लगें, तो हमें भी बताना. बहुत दिन से हमने किसी को जुतिआया नहीं. हम भी दो-चार हाथ लगाने चलेंगे. एक आदमी बोला कि जूता अगर फटा हो और तीन दिन तक पानी में भिगोया गया हो तो मारने में अच्छी आवाज़ करता है और लोगों को दूर-दूर तक सूचना मिल जाती है कि जूता चल रहा है. दूसरा बोला कि पढ़े-लिखे आदमी को जुतिआना हो तो गोरक्षक जूते का प्रयोग करना चाहिए. ताकि मार तो पड़ जाए, पर ज़्यादा बेइज्ज़ती न हो. चबूतरे बैठे-बैठे एक तीसरे आदमी ने कहा कि जुतिआने का सही तरीक़ा यह है कि गिनकर सौ जूते मारने चले, निन्यानबे तक आते-आते पिछली गिनती भूल जाय और एक से गिनकर फिर नये सिरे से जूता लगाना शुरू दे. चौथे आदमी ने इसका अनुमोदन करते हुए कहा कि सचमुच जुतिआने का यही तरीक़ा है और इसीलिए मैंने भी सौ तक गिनती याद करनी शुरू कर दी है.” इसके अलावा अन्य विषयों पर भी बेहद दिलचस्प चर्चा हुई. बाकी विषयों पर पैनल की राय जानने-सुनने के लिए पूरी चर्चा सुनें.
Hafta 211: Delhi Govt vs LG, Nageswara Rao, Republic TV vs AMU, and more
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access_time15 days ago
In the latest episode of NL Hafta, the usual gang of Abhinandan Sekhri, Manisha Pande, Raman Kirpal, and Anand Vardhan are joined by Setu Niket, a Delhi-based lawyer and Newslaundry subscriber. The discussion kicks off with Setu talking about the latest updates on the Supreme Court’s split verdict in the Delhi government vs LG power tussle case. The apex court referred the decision on public service to the larger bench. But who is this verdict in favour of? Abhinandan says: “If your own guy who’s supposed to report to you in your office, which happened a year ago, would not listen to Arvind Kejriwal He wouldn’t come in the room when you called him—what can be the reason for giving that to the Centre?” The panel moves on to discuss the contempt charges against the CBI's former interim director Nageswara Rao. Raman says the main reason for contempt charges was transferring the officer probing the Muzaffarpur shelter home horror. He adds, “Right from the day one, he has been breaking all the rules.” The panel also talks about the CAG report on the Rafale deal, with Abhinandan reading out some of the details. The discussion goes on to Patiala House’s direction to the Delhi Police to file an FIR against Arnab Goswami on Shashi Tharoor’s complaint. The panel discusses how this will set a bad precedent. They also talk about Priyanka Gandhi's Lucknow rally, the Republic TV vs AMU fiasco, and a whole lot more. Listen up!
Chhota Hafta Episode-214
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access_time15 days ago
NL Hafta has gone behind the paywall, but we love our listeners. So, here's a little sneak peek into the complete episode. In the latest episode, Abhinandan Sekhri is joined by the usual gang of Raman Kirpal, Manisha Pande and Madhu Trehan, and special guest Praveen Donthi, staff writer at The Caravan. The discussion takes off with Praveen discussing his cover story on the rise of ANI news agency during the NDA government's tenure. The panel then talks about Attorney General KK Venugopal's remarks in the Supreme Court, where he accused The Hindu of putting "stolen" documents from the Defence Ministry in the public domain which he said violated the Official Secrets Act. They also discuss the aftermath of the Balakote airstrikes, especially the varying numbers cited as "casualties" by media houses with no official confirmation, and the issues with some "source-based reports". Listen to the full episode
Reporters Without Orders Ep 58: #Balakot, ghost advertising for the BJP & more
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access_time16 days ago
In this episode of Reporters Without Orders, host Cherry Agarwal is joined by Newslaundry's head of research Ayush Tiwari, desk writer Gaurav Sarkar and Vijaita Singh from The Hindu. The panel talks about the reporting on the Balakot airstrike, ghost advertising for the BJP online, and more. The podcast kicks off with the panel talking about the reportage on the casualties caused by the IAF’s airstrike on a Jaish-e-Mohammad's training camp. Discussing the varying numbers put out by the media, Vijaita says: “There was a precision strike even Pakistan has admitted but to give numbers, it’s very difficult for the IAF or anybody because Pakistan is very secretive about these things.” Cherry is concerned about the credibility of "anonymous sources", saying, "I am often fearful that once the report goes out, [what if] my source flips over and says I didn’t talk to you?” They discuss the I&B Ministry’s showcause notice to two TV channels for airing a Pakistan Army press briefing. Ayush pointing out its digital equivalent, says: “Many of these digital outlets carried stories on what the Pakistan newspapers are saying … would that also be considered against national security?” Cherry points out that the media is not a tool for the government to set the narrative—it's there to raise questions, which doesn't make them anti-national or unpatriotic. The discussion moves to Gaurav’s story on how Facebook's recently-released Ad Library Report lists "ghost advertisers"—who are Facebook and Instagram pages which often run ads for political parties without disclaimers. Gaurav explains, "You don’t know who has been funding that. So officially, if the BJP’s accounts are spending ₹6-8 lakh a week, then who are these guys pushing about a crore worth of advertising in a month?” For this and more, listen up!
NL Session With Sena - Episode 04
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access_time17 days ago
Have you read the latest NL Sena story, The Cauvery Chronicles II: Ponni’s Perish? If not, do it. In this podcast, Manisha Pande, Anish Daolagupu and NL subscriber Rahul Pandey discuss different facets of this report with its author TR Vivek. TR Vivek answers the questions posed by contributors to the story and asks Rahul what made him pay for the story. The story was made possible thanks to Rahul Pandey, Gayatri Natrajan, Vijay Krishnan, and other members of the NL Sena. We want to do more such stories and you can help. Be a part of the NL Sena and do your bit to keep news independent and unafraid.
The Awful and Awesome Entertainment Wrap Ep 105: Sonchiriya, Leaving Neverland and more
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access_time18 days ago
In this episode of The Awful and Awesome Entertainment Wrap, Rajyasree Sen and Abhinandan Sekhri discuss Sonchiriya, the Oscars, Three Identical Strangers, and more. Rajyasree kicks off the podcast with the recently-concluded Academy Awards. Abhinandan asks her what was good about the show this year. She praises the event's opening with Queen's performance. "It was really nice to see how much the audience get involved,” she adds. Addressing the outrage over Green Book winning Best Picture, she says, "I did like it a lot. I didn’t understand why people weren’t happy about it.” The conversation moves to recently-released movie Sonchiriya. Both Abhinandan and Rajyasree liked the film. Abhinandan says, “The use of slow motion was unnecessarily long … Music was completely unremarkable … the art direction and costumes were outstanding.” Next up is two documentaries: Three Identical Strangers and Leaving Neverland, which is about the alleged child sexual abuse by Michael Jackson. Abhinandan addresses young listeners of the podcast, explaining why Jackson is still popular despite the allegations, as described in several opinion pieces following the documentary's release. He says: “You can’t comprehend how big Michael Jackson was … He is the basis of an entire pop culture movement.” For this and much more, listen up!
एनएल चर्चा 58: भारत-पाकिस्तान तनाव, चैनलों को नोटिस और अन्य
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access_time22 days ago
बीता पूरा हफ़्ता काफ़ी उठापटक भरा रहा. चर्चा में उन्हीं में से कुछ विषयों पर विस्तार से बात की गई. इस हफ़्ते की सबसे महत्वपूर्ण घटना रही, भारत और पाकिस्तान के हवाई हमलों के बाद पैदा हुआ तनाव. पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई की थी. बदले में पाकिस्तान ने भारत की हवाई सीमा का उल्लंघन किया. भारत- पाकिस्तान के बीच पैदा तनाव की वजह से एक और महत्वपूर्ण घटना जो उस तरह से सुर्ख़ियों में न आ सकी, वह अरुणाचल प्रदेश में वहां के स्थानीय निवासियों द्वारा किया गया बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन है. टकराव की वजह वहां पर ऐसे छः समुदायों को ‘स्थानीय निवासी प्रमाणपत्र’ देने की सिफ़ारिश थी जो मूल रूप से अरुणाचल के निवासी नहीं हैं, लेकिन दशकों से नामसाई और चांगलांग जिलों में रह रहे थे. तीसरी घटना जो इस हफ़्ते चर्चा का विषय रही, वह है 13 से ज़्यादा चैनलों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा नोटिस जारी किया जाना. इन चैनलों के ऊपर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता मेजर जनरल गफूर की उस प्रेस कांफ्रेंस को लाइव दिखाया. जिसमें वो भारत को हमले का जवाब देने की धमकी दे रहे थे. सरकार का इस पर कहना रहा कि यह ग़लत परम्परा है, इससे देश की एकता और अखंडता पर संकट पैदा हो सकता है. इस हफ्ते चर्चा में ‘द ट्रिब्यून’ की डेप्युटी एडिटर स्मिता शर्मा बतौर मेहमान शिरकत की. साथ ही चर्चा में हमारे साथ लेखक-पत्रकार अनिल यादव भी शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण माहौल पर चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल ने एक सवाल रखा कि ऊरी हमले के बाद पिछला जो सर्जिकल स्ट्राइक हुआ और अब ये जो इंडियन एयरफोर्स ने किया है, इससे क्या वह धारणा टूट गई है कि न्यूक्लियर पॉवर रहते हुए भी इस तरह की परिस्थितियां आने पर या किसी तरह की क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म की स्थिति में हम पाकिस्तान को जवाब दे सकते हैं? या हम न्यूक्लियर पॉवर होते हुए भी एक लिमिटेड लेवल पर एक दूसरे से कॉन्फ्रंट कर सकते हैं? इसका जवाब देते हुए स्मिता ने कहा कि अगर आप न्यूक्लियर डेटरेंस की बात करते हैं तो न्यूक्लियर डेटरेंस क्या है? इस कांसेप्ट को लेकर बहुत चर्चाएं होती रहती हैं. जब आपके पास परमाणु हथियार होता है तो क्या वो सही में डेटरेंस का काम करता है? या सामने वाले को और प्रोवोक करता है. सामने वाले को और आक्रामक रवैया अपनाने पर मजबूर करता है. इसकी वजह से हम एक ‘आर्म्स रेस’ देखते हैं. स्मिता कहती हैं, “इन सबके बीच दो चीज़ें हमें नहीं भूलनी चाहिए. पुलवामा में हमला हुआ, जैश-ए-मोहम्मद ने जिसकी ज़िम्मेदारी ली. 40 जवानों की जानें गईं. भारत जैसे देश में, जो आज विश्व भर में खुद को एक बड़ी पोजीशन पर महसूस कर रहा है. इस वक़्त चुनाव हों या न हों, लेकिन हमले से एक दबाव निश्चित तौर पर बन जाता है सरकार पर कि वो कोई न कोई कार्रवाई ज़रूर करे. भारत ने जवाबी हमला करते हुए कहा कि हमने बालाकोट में गैर सैन्य हमला किया है. और सूत्रों के हवाले से पता चला कि यह बालाकोट दरअसल पाक के कब्जे वाले कश्मीर में नहीं बल्कि खैबर पख्तूनख्वाह में है, जो पाकिस्तान की सीमा के बिल्कुल अंदर है.” स्मिता आगे कहती हैं,  “भारत, अमेरिका जैसा एक देश हो जो ऐब्टाबाद में घुसकर नेवी सील्स के ज़रिए ओसामा बिन लादेन को मार गिराता है. पर यहां वैसा नहीं है. भारत-पाकिस्तान की सीमाएं लगी हुई हैं. हमारी जो हक़ीकत है वो अमेरिका और पाकिस्तान की हकीकत से अलग है. इसलिए हमें साईट नहीं लूज करनी चाहिए.” चर्चा को आगे बढ़ाते हुए अतुल ने कहा, “बार बार ये जो स्थिति आती थी कि हम दोनों न्यूक्लियर पॉवर होने की वजह से लगभग तल पर आ गए हैं. ये न्यूक्लियर ब्लैकमेल पाकिस्तान की तरफ से होता था. हम एक सीमा से आगे नहीं जा सकते थे. लेकिन अब ये कहा जा रहा है कि नरेन्द्र मोदी ने इस धारणा को तोड़ दिया है और यह नया इंडिया है, अब इन सबके रहते हुए भी भारत-पाकिस्तान में जाकर हमला कर सकता है. इसको एक नया टर्म दिया गया कि यह भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में वाटरशेड मोमेंट है.” यहां पर चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए अनिल कहते हैं कि ‘न्यू इंडिया’ और एक नया चलन शुरू करने वाली जो बात है कि भारत अब पहले की तरह आतंकवाद को सहन करने वाला देश नहीं रहा. हम उस तरह तरह से कार्रवाई करेंगे जैसा की अमेरिका आतंकवाद की स्थिति में करता रहा है. लेकिन मैं थोड़ा पीछे जाना चाहूंगा कि ऑल ऑफ सडेन, अचानक, रातोंरात आप अपना कैरेक्टर नहीं बदल सकते. इसको थोड़ा पॉलिटिकली भी देखना चाहिए कि अगर सचमुच आतंकवाद मोदी सरकार का कंसर्न है तो सडेन एक्शन की बजाय और भी बहुत कुछ है जो किया जा सकता था.
Hafta 210: #MamataVsCBI, Twitter’s alleged bias, Robert Vadra and more
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access_time22 days ago
In the latest episode of NL Hafta, Abhinandan Sekhri is joined by the usual gang of Anand Vardhan, Manisha Pande and Madhu Trehan, as well as Niha Masih, India correspondent for Washington Post. The conversation covers #MamataVsCBI in West Bengal, Robert Vadra being questioned by the ED, the Supreme Court’s contempt notice to Prashant Bhushan, the Right-wing's protest against Twitter, and a lot more. Niha kicks things off by talking about the face-off between Mamata Banerjee and the Centre. Mentioning the media's shortcomings in reporting on the issue, she says, "Something that I found wanting, which I actually found from an alternative legal media website called The Leaflet, was exactly the legality of what the CBI was trying to do and what the state government was alleging, because it is very easy to give into the political back and forth but what were the legalities of what the CBI did?” The conversation moves to the list of questions Justice Markandey Katju directed to Chief Justice of India Ranjan Gogoi. Abhinandan attempts to explain why this story was not picked up by the Indian media: “Most media really likes this Chief Justice because this was the man who stood up to Modi. But I think it is more than that They will go after Modi, they will go after Rahul, they will go after Ambani. No one will go after the Chief Justice.” He asks the panel what they think—does the media love Gogoi or are they too scared? Anand says: "I think it has a two-day-story shelf life, nothing more. I think that point is more valid: that it didn’t have substantial meat to it.” The discussion shifts to the Supreme Court's contempt notice to Prashant Bhushan. Madhu says, “Filing contempt against Prashant Bhushan—he takes it as a compliment, he gets more press, he is very happy with it.” But Manisha says it's scary since the contempt notice is over tweets. "I don't think it sets a good precedent. Whatever he may have said.” Madhu still feels contempt cases are relatively benign: "They don’t do much that law has to be questioned, it has to be redefined to fit contemporary India where everyone is accountable, including the judge.” This and much more, so listen up!
Chhota Hafta - Episode 213
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access_time22 days ago
NL Hafta has gone behind the paywall, but we love our listeners. So, here's a little sneak peek into the complete episode. In the latest episode of NL Hafta, Abhinandan Sekhri is joined by the usual gang of Raman Kirpal, Manisha Pande and Madhu Trehan, as well as Nitin A Gokhle, a national security analyst, and Samrat, a journalist and author. The conversation kicks off with Indo-Pak tension, with Abhinandan asking Nitin about the details of the air strikes on JeM camps and the non-credible information that flowed with it. The conversation moves to a discussion on the protests in Arunachal Pradesh over the Permanent Residence Certificates, and also covers Caravan’s article where reporter Ajaz Ashraf tabulated soldiers killed in Pulwama on a caste basis.
The Awful and Awesome Entertainment Wrap Ep 104: Gully Boy, Period, the Oscars and more
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access_time23 days ago
In this episode of The Awful and Awesome Entertainment Wrap, Abhinandan Sekhri is joined by Ankur Pathak, entertainment editor at Huffington Post. They discuss Gully Boy, Period. End of Sentence., the Oscar awards and more. They start off with Gully Boy, with Abhinandan asking Ankur what worked for him in the movie. Ankur says: “I just felt that Zoya is basically fighting for your right to dream fearlessly.” He feels Zoya Akhtar made interesting points about the relevance of art. Abhinandan thinks films made with Western cultural references are usually very self-conscious and contrived, but for Gully Boy, he says, "It was comfortably cool, although rap and hip hop is not an Indian thing … it seems very authentic.” The discussion moves to Period. End of Sentence., a 25-minute documentary based in India which recently won an Academy Award. Both Abhinandan and Ankur liked it immensely. Abhinandan says, "Its message was more profound or impressive than crafting … storytelling.” They also thought it did have its weak points and think it takes much more to merit an Oscar win. Speaking of the Oscars, they talk about the award ceremony this year, which was accused of being more about "wokeness" than craft. They also criticise the Academy for, among other things, its choice for Best Picture this year, stating BlacKkKlansman and Roma were better options in this category. For this and much more, listen up!
Reporters Without Orders Ep 57: #Balakot, SC's tribal eviction order, #KisanLongMarch & more
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access_time24 days ago
This episode of Reporters Without Orders features host Cherry Agarwal, Newslaundry's head of research Ayush Tiwari, special correspondent Prateek Goyal and independent journalist Aruna Chandrasekhar. The panel talks about the Indian airstrike in Jaba, near Balakot, Supreme Court's order to evict more than 1 million tribals and forest-dwellers, the Kisan long march in Maharashtra and more. The podcast kicks off with the panel talking about IAF’s airstrike on Jaish-e-Muhammad's "biggest training camp" in Pakistan. They also talk about the Supreme Court's verdict which has the potential to impact as many as 1 million tribals and forest-dwellers. Cherry points how tribals are often criticised for occupying "illegal" land. To which, Aruna says, “The government is supposed to be a custodian of public land…the idea that they are illegal occupants or illegal encroachers is part of language that is still extremely entrenched in our bureaucracy.” The panel also discusses why Arunachal Pradesh has been on the boil and a section of the media's coverage of the ongoing agitation. Further, they discuss the Republic TV-AMU controversy and the reason why sedition is used with much ease. Talking about police's actions in the AMU case, Ayush says, “They didn’t make any arrests in that sedition charge case… there are robbery, murder, rioting (charges), besides the sedition charge.” Moving on, Prateek, who was at the Kisan long march that began from Nasik's Mumbai Naka, tells the panel what he saw on the ground. The panel also discusses the implications of association of the farmers' protest with AIKS. Prateek says, “Farmers are in distress… people above the age of 70 walked 20-25 km to take part in the march.” He says whether AIKS takes advantage of that or not is a separate issue, but such protests will go a long way in highlighting the agrarian distress.
Hafta 209: #13PointRoster, Harvest TV, DHFL and more
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access_time29 days ago
In this episode of NL Hafta, host Abhinandan Sekhri is joined by the in-house panel of Manisha Pande, Madhu Trehan and Raman Kirpal, and Scroll staff writer Shoaib Daniyal. The conversation covers Harvest TV, the new 13-point roster for reservation of teaching posts, the National Sample Survey Office jobs report, George Fernandes’s legacy, the latest Cobrapost investigation, and more. Shoaib explains the 13 point roster order given by the Supreme Court. He says reservation on the recruitment of faculty will now be calculated by the department, not by the university as a whole. He says: “Because reservation numbers are 15 per cent, 7.5 per cent—it actually ends reservation in many ways if your department is very small.” Abhinandan adds: “Seven per cent of seven teachers is 0 So you round off most of the reservations to 0 while you have kept reservations as a statement of mathematical possibility.” Manisha says there will be protests over this but she doubts how much coverage it will get. Raman draws the discussion to the latest Cobrapost story on the DHFL financial scam. He says: “I don’t see any scam in it! This is just a narrative that the money moved from this place to another. There could be a story But what I am saying is that the half baked story with which you broke down 8 per cent of their share market—who gained from it? That itself is a story.” Abhinandan disagrees that it's "half-baked", saying, "There is a law. If you have common directors, one company cannot lend money to the other.” Raman asserts: “In that case, it is a violation, not a scam” —which is what Cobrapost called it. Madhu steps in to discuss Harvest TV. She says, “I did like Barkha’s interview with Jaya. That she really excels at because she has the capacity to do the background research, everything is always at her fingertips. She never interviews with a list of questions, like most of us do.” She adds, "Unfortunately, I think the roach they have taken to launch this channel is problematic”, alluding to Harvest TV running the channel on a religious broadcasting license. The panel goes on to discuss the Padma Shri and other national excellence awards, Rahul Gandhi’s minimum income promise, and a lot more. Listen up!
Chota Hafta — Episode 212
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access_time29 days ago
NL Hafta has gone behind the paywall, but we love our listeners. So, here's a little sneak peek into the complete episode. On this episode of NL Hafta, our host Abhinandan Sekhri is joined by Manisha Pande, Anand Vardhan, Raman Kirpal and Kaveree Bamzai to discuss the news of the week. Listen to the full Hafta here: https://www.newslaundry.com/2019/02/22/hafta-212-pulwamaattack-saudi-princes-visit-and-online-harassment-of-barkha-dutt
The Awful and Awesome Entertainment Wrap Ep 103: My name is RaGa, Gully Boy & more
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access_time1 month ago
In this episode of the Awful and Awesome, Rajyasree Sen and Abhinandan Sekhri discuss My name is RaGa, Yesterday, Gully Boy, The Assassination of Gianni Versace and more. Abhinandan kicks off the podcast by discussing some of the movies he watched over the week. The duo then proceed to review the trailer of My name is RaGa. Introducing the trailer, Rajyasree jokingly says, "This film is about our future Prime Minister Rahul Gandhi.” Abhinandan is at a loss for words. To him, the trailer looks very bad. Rajyasree, sarcastically, proceeds to praise Rupesh Paul, the movie's director. She says, “He has tried to show us Rahul Gandhi from the time he is 7 or 8 to 47…Indira Gandhi is also shown…then there is an ugly version of Rajiv Gandhi as well.” She expresses her confusion by questioning whether the movie is pro-Rahul Gandhi or against him. The duo agrees on the fact that they are definitely not going to watch the movie when it is released. The discussion then moves to the trailer of Yesterday, a movie that is set in a world that doesn’t know of the Beatle’s existence. Abhinandan, talking about the trailer says, “It has got a brilliant plot.” He adds: "I am really looking forward to watching this film." Abhinandan also reveals the worst-film ever made. To find out, listen up!
Reporters Without Orders Ep 56: #PulwamaAttack, #Cobrapost, Gau Raksha & more
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access_time1 month ago
This episode of Reporters Without Orders features host Cherry Agarwal, Newslaundry's Desk Writer Gaurav Sarkar, journalist Safwat Zargar and the author of HRW's latest report, Jayshree Bajoria. While Zargar joined the panel from Kashmir, Bajoria joined over the phone from New York. The panel talks about the coverage of the Pulwama attack, where more than 40 CRPF personnel where killed. They also discuss Zargar's profile of Adil Ahmed Dar, the teen behind the Pulwama attack, Cobrapost's latest exposé and more. The discussion kicks off with the panel talking about the Pulwama attack and its reportage in Kashmir. Speaking of the difference in coverage between the local papers in Kashmir and a section of the national media, Zargar says, "There was this clear-cut misunderstanding, like the national media jumped on to Pakistan…local papers tried to contextualise it in a way such as what led to his [Dar's] joining and so on." Cherry is also curious about how local reporters in Kashmir cope up with the challenge of conflicting narratives given the multitude of stakeholders such as the Army, Militants, residents etc. She asks Zargar, “How do you ensure that there is objectivity?” The panel also further discusses the closure Milli Gazette, a weekly newspaper, and Cobrapost’s Operation Karaoke in which more than 36 Bollywood celebrities were stung. Gaurav says, “When it comes to brazenly taking money in cash…obviously raises the question that there is a backdoor mechanism that converts this black money into white.” The discussion then moves to the report published by Human Rights Watch,Violent Cow Protection in India: Vigilante Groups Attack Minorities. Bajoria says, "What we are seeing is a political campaign to use this issue of cow protection for political purposes to gain Hindu votes, and therefore, we've seen these so-called 'cow-protection' groups spring up across the country." For this and more, listen up!
एनएल चर्चा 57: भारत रत्न, भूपेन हजारिका, एन राम और अन्य
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access_time1 month ago
इस चर्चा की रिकॉर्डिंग के दौरान ही कश्मीर में अब तक के सबसे बड़े आतंकी हमले को अंजाम दिया जा रहा था. सीआरपीएफ के 40 जवानों की एक आत्मघाती हमले में मौत हो गई. हम इस विषय पर चर्चा नहीं कर सके लेकिन यह विषय ही इस पूरे हफ्ते चर्चा में रहेगा. एनएल चर्चा का केंद्रित विषय रहा मशहूर गायक भूपेन हजारिका को दिए गए भारत रत्न को उनके बेटे तेज हजारिका द्वारा वापस करना. तेज ने एक बयान में बताया कि इसकी वजह नागरिकता संशोधन बिल 2016 है. उन्होंने कहा कि यह बिल भूपेन हजारिका के विचार और मूल्यों के सर्वथा विपरीत है. जब तक सरकार इसे वापस नहीं ले लेती, वह अपने पिता के लिए यह सम्‍मान ग्रहण नहीं करेंगे. इसके अलावा द हिन्दू के संपादक एन राम की रफेल घोटाले संबंधी रिपोर्ट, युवा साहित्यकार अविनश मिश्र की कामसूत्र से प्रेरित नए कविता संग्रह के तमाम पहलुओं, पत्रकार अर्नब गोस्वामी पर गोपनीय दस्तावेज हासिल करने के अपराध में एफआईआर आदि पर इस बार की एनएल चर्चा केंद्रित रही. चर्चा में इस बार युवा कवि व साहित्यकार अविनाश मिश्र ने बतौर मेहमान शिरकत किया. साथ में पत्रकार और लेखक अनिल यादव और न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकर आनंद वर्धन भी चर्चा में शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. भूपेन हजारिका का भारत रत्न पर बातचीत करते हुए अतुल ने अविनाश से पूछा, "मैं आपसे जानना चाहूंगा क्या भारत रत्न जैसे बड़े सम्मान को इन सब बातों और राजनीति से अलग रखना चाहिए? तेज हजारिका ने भी थोड़ा सा बचपना दिखया है?” अविनाश जवाब देते हुए कहते है, "एक ऐसे समाज में जहां चीज़ें लगातार गड़बड़ हो रही हो तो एक नागरिक सोचता है की वो प्रतिरोध कैसे करे, उदाहरण के तौर पर जब अख़लाक़ वाला कांड हुआ था दादरी में तब हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार उदय प्रकाश का एक बयान आया था कि वो कैसे इसका प्रतिरोध करें. तो उनको ख्याल आया राज्य ने उनको सम्मानित किया है. तो उन्होंने राज्य द्वारा दिए गए सम्मान को लौटा दिया. मुझे लगता है एक सामान्य नागरिक होने के नाते कोई तरीका नहीं बचता आपके पास. एक सामान्य नागरिक जो खुद कुछ नहीं कर सकता जिसके बस में कुछ नहीं है तो मुझे लगता है उसके पास कोई तरीका है तो वो यही है कि सम्मान वापस लौटा देना. उदय प्रकाश जी ने यही किया. मैं मानता हूं भूपेन हजारिका जी के बेटे शायद इस बात को ज़्यादा समझते हैं.” चर्चा को आगे बढ़ाते हुए आनंद वर्धन कहते हैं, "मेरा इस पर कोई स्पष्ट मत नहीं है लेकिन ऐसा भी कुछ समाचार पत्रों ने लिखा है कि तेज हजारिका आपने पिता के साथ ज़्यादा रहे भी नहीं थे. तो अब जो व्यक्ति है ही नहीं उसका किस विषय पर क्या धारणा होगी ये तो अब अटकल का विषय है. कोई भी राजनैतिक विचारधारा हो, वो भारत रत्न के हक़दार थे. एक बड़ी सांस्कृतिक शख्सियत होने के कारण मेरे ख्याल में भारत रत्न स्वीकार करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. वहां के जो लोग नागरिकता संशोधन बिल का विरोध या समर्थन कर रहे हैं उनमें हज़ारिका के पुत्र उसके विरोध में हैं ये तो निश्चित हो ही गया है. अब इसका निष्कर्ष क्या होगा ये निर्णय तो उनके परिवार को करना है. हालांकि परिवार में भी इस पर एकमत नहीं है.” इस पर अनिल यादव आपने नजरिए को परिभाषित करते हुए कहते हैं, "इस प्रश्न को इस नज़रिए से भी देखा जा सकता है की क्या भारत रत्न जैसा पुरस्कार किसी राजनीति के तहत नहीं दिया जाता है. अगर वो राजनीति के तहत नहीं दिया जाता तो ये मांग क्यों लगातार होती रहती है कि फला की उपेक्षा हो रही है, उनको मिलना चाहिए था. इसके पीछे हमेशा राजनीति रही है अगर राजनैतिक कारणों से पुरस्कार दिया जा सकता है तो उससे वापस भी किया जा सकता है. अब ये जो नागरिकता संशोधन का मसला है ये नार्थ ईस्ट में, तो मैं कह सकता हूं कि ये वहा के लोगों के जीवन के लिए बहुत केन्द्रीय मसला है. नार्थ ईस्ट ही वो जगह है जहा पिछले एक  साल के भीतर देशद्रोह के सबसे ज़्यादा मामले लोगो पर दर्ज किए गए हैं. और ये वो लोग है जो नागरिकता संशोधन बिल का विरोध कर रहे थे." राफेल डील पर एन राम की रिपोर्ट और अर्नब गोस्वामी पर एफआईआर के आदेश पर भी पैनल के बीच चर्चा हुई. आनंद वर्धन और अविनाश मिश्र ने इस चर्चा में अपने अनुभव साझा किए. अन्य विषयों पर पैनल की विस्तृत राय जानने के लिए पूरी चर्चा सुने.
Chhota Hafta - Episode 211
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In the latest episode of NL Hafta, the usual gang of Abhinandan Sekhri, Manisha Pande, Raman Kirpal, and Anand Vardhan are joined by Setu Niket, a Delhi-based lawyer and Newslaundry subscriber. The discussion kicks off with Setu talking about the latest updates on the Supreme Court’s split verdict in the Delhi government vs LG power tussle case. The panel then moves on to discuss the contempt charges against the CBI's former interim director Nageswara Rao. Raman says the main reason for contempt charges was transferring the officer probing the Muzaffarpur shelter home horror. The discussion also covers Priyanka Gandhi's Lucknow rally, the Republic TV vs AMU fiasco, and a whole lot more! Listen to the full episode here.
Hafta 208: Priyanka’s entry, Caravan defamation case, Mahagathbandhan & more
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In this Hafta, Hartosh Singh Bal, Caravan's political editor magazine, joins Newslaundry managing editor Raman Kirpal, editor Manisha Pande, opinion writer Anand Vardhan and host Abhinandan Sekhri. The group discusses Priyanka Gandhi’s official entry into politics, the Mahagathbandhan, Ajit Doval’s son's defamation plea against the Caravan, EVM hacking and more. The Caravan’s defamation case becomes a springboard for a discussion on corruption. Abhinandan asks Anand, “Do you really think it is possible for any prime minister to claim na khaunga na khaane dunga?” Anand replies, “Cronyism and corruption are related to it, they are a part of the body politic of elite accommodation, particularly visible in third-world political societies. I think all parties have this patronage system.” Hartosh adds: “People with an average income, below a crore, are not represented in our Parliament, simply because that is what has happened to our politics. It is today a plutocracy, or a democracy of the rich, in terms of who’s appointed to power and it is getting propagated by our easy acceptance of that cronyism.” The panel also discusses the Mahagathbandhan and Mamta Banerjee as a prime ministerial candidate. Manisha asks, “Is she really positioning herself as a prime ministerial candidate?” Raman says, “The post-election scenario is supposed to decide who is going to be the prime minister Anybody can [be PM], even Mayawati stands a chance.” The impregnability of electronic voting machines is also discussed. Abhinandan recalls the paper ballot set up. “The security was so lax, if you had a camera you could basically go anywhere you could take the camera straight into the ballot box, the office.” Anand describes Syed Shuja’s claims as “dangerous” because “these kinds of conspiracy theories stick to people's psyche to stage such a press conference in London is saying India is a banana republic it does a great deal of disservice to the history of Indian elections.” Listen up! There's more.
The Awful and Awesome Entertainment Wrap Ep 102: Oscars, Grammys, World Radio Day & more
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In this episode of Awful and Awesome, Rajyasree Sen and Abhinandan Sekhri discuss the Oscar line-up (Bohemian Rhapsody, The Wife, Can You Ever Forgive Me?, Green Book), the Grammys, state of radio in India, Mere Pyaare Prime Minister and more. The duo first talk about The Wife. Rajyasree gives a spoiler-free review of the film, “You have to watch the film to see this relationship. There is a mystery, there is a twist. It’s not a relationship film, but it is extremely well done.” Abhinandan then brings up Green Book. He expresses his liking for the film, but also adds that there were parts which were too simple. Rajyasree praises the performances in Can You Ever Forgive Me? but critiques the pace, “I really like slow films, but I felt somewhere it loses the momentum Your interests fails a little.” The last film discussed is Bohemian Rhapsody. Rajyasree says in praise that she realised “how well they make biopics in the States they show the characters with their greys and blacks.” On the occasion of World Radio Day, Abhinandan talks about the dismal state of FM radio in our country. He says, “For all the political incorrectness and the wildness that finds its way into television and print no community of presenters is as dumb, ignorant and unknowingly offensive as radio jockeys.” Rajyasree then speaks about the Grammys, which she found to be excruciatingly long. For this and more, listen up!
Reporters Without Orders Ep 55: Hooch tragedy, FIR Against Arnab Goswami, Abhishek Mishra and more
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This episode of Reporters Without Orders features Cherry Agarwal and Newslaundry's Head of Research Ayush Tiwari. Prateek Goyal, Newslaundry's special correspondent from Maharashtra, joins in later to report on police protection being given to Abhishek Mishra in Kamal Nath’s Madhya Pradesh. The conversation covers the hooch tragedy, Arnab Goswami vs Shashi Tharoor case, and more. Ayush and Cherry talk about the hooch tragedy in Uttar Pradesh and Uttarakhand, expressing shock at the politicising of such tragedies. Cherry asks why the government isn't clamping down on the entire business of hooch. Ayush says, "There is a whole shadow market for these things It is common knowledge that the main government, the security forces—they benefit from this shadow market. It is a quid pro quo among the people who produce this kind of liquor.” Cherry moves on to Shashi Tharoor’s charges against Arnab Goswami. She remarks: “If you are filing an FIR against a journalist for accessing documents which are not in the public domain, it sets a dangerous precedent.” Prateek Goyal joins in to report on the police protection being given to "fake news guru" Abhishek Mishra in Congress-led MP. He says, “This boy is not a high profile person. He used to do propaganda videos on YouTube and he still does that for the Congress. It is unusual that the entire state government is mobilised for his protection now, for a person who so blatantly generates fake news.” For all this and more, listen up!
एनएल चर्चा 56: ममता-सीबीआई विवाद, मार्कंडेय काटजू और अन्य
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इस हफ्ते चर्चा का मुख्य विषय रहा पश्चिम बंगाल में सीबीआई का अनपेक्षित छापा, नतीजे में सीबीआई टीम की गिरफ्तारी और साथ में ममता बनर्जी का सत्याग्रह. ममता बनर्जी ने अपने पुलिस प्रमुख राजीव कुमार से पूछताछ करने पहुंची सीबीआई टीम को पूरे हिंदुस्तान में सुर्खी बना दिया. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई से संबंधित एक लेख लिखा जिसे किसी भी भारतीय मीडिया ने प्रकाशित नहीं किया. इस लेख में मुख्य न्यायाधीश से 4 सवाल पूछे गए थे. इसको लेकर मार्कंडेय काटजू ने भारतीय मीडिया के चरित्र, कार्यशैली पर काफी तीखा प्रहार किया. साथ ही राहुल गांधी का नितिन गडकरी के बयान को समर्थन और ट्विटर पर हुई बहस और अन्ना हज़ारे का रालेगण सिद्धि में अनशन आदि विषय इस बार की एनएल चर्चा के केंद्र में रहे. चर्चा में इस बार वरिष्ठ पत्रकार अनुरंजन झा पहली बार मेहमान के रूप में हमारे साथ जुड़े. झा एक स्वतंत्र पत्रकार हैं. साथ ही पत्रकार और लेखक अनिल यादव और न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकर आनंद वर्धन भी चर्चा में शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. सीबीआई और ममता बनर्जी के जुड़े टकराव पर बातचीत करते हुए अतुल ने आनंद से कहा, “सीबीआई ने कोलकाता के पुलिस प्रमुख राजीव कुमार के यहां छापा मारा. जवाब में बंगाल की पुलिस ने सीबीआई अधिकारियों को ही गिरफ्तार कर लिया. भाजपा कह रही है ये एक संवैधानिक संकट है, तृणमूल वाले कह रहे है ये लोकतंत्र की हत्या है. विरोध में ममता बनर्जी सत्याग्रह पर बैठ गईं. यहां तक तो सब ठीक था लेकिन साथ में अजीब बात यह रही कि राजीव कुमार भी सत्याग्रह पर बैठ गए. एक पुलिस अधिकारी का इस तरह से सत्याग्रह पर बैठ जाना क्या बताता है?” आनंद ने इस स्थिति को पुलिस के राजनीतिकरण से जोड़ते हुए कहा, “जितनी भी अखिल भारतीय सेवाएं हैं, आईएएस, आईपीएस आदि, यह सभी अचार संहिता नियम 1968 से जुड़ी हैं. पहले राजनैतिक वर्ग और अधिकारी तंत्र दोनों का एक हद तक तालमेल था क्योंकि एकमात्र शक्तिशाली पार्टी कांग्रेस थी. अब राज्यों के स्तर पर राजनीति का स्थानीयकरण हुआ है, इसके फलस्वरूप अधिकारियों का भी बंटवारा हुआ है. अधिकारी जातीय खेमों में भी बंटे हुए हैं. सबसे ज़्यादा राजनीतिकरण पुलिस का इसलिए दिखता है क्योंकी रोज़मर्रा के जीवन में लोगों का राज्य के अंग के तौर पर सबसे ज्यादा सामना पुलिस से ही होता है. राजीव कुमार का अनशन पर बैठना तो सही नहीं है पर यह अभूतपूर्व भी नहीं है.” चर्चा को आगे बढ़ाते हुए अतुल कहते हैं, “एक बात और है. एक हफ्ते पहले ममता बनर्जी ने कोलकाता में जिस तरह से समूचे विपक्ष की गोलबंदी की थी, उसने भी कहीं न कहीं हलचल पैदा कर दी थी केन्द्र सरकार के भीतर. यह भी एक वजह है ममता और मोदी के टकराव की.” अनुरंजन जा यहां पर हस्तक्षेप करते हुए कहते हैं, “केन्द्र की सरकार जिस तरीके से अभी चल रही है, चुनाव बिलकुल सिर पर है और सत्ताधारी पार्टी के प्रवक्ता कहते हैं की वो स्लॉग ओवर के छक्के लगा रहे हैं. तो उनके हिसाब से तो यह सब छक्का है, अब वो नो बॉल पर मार रहे है या वो बॉउंड्री पर कैच हो रहे हैं, ये किसी को नहीं पता है. ये सब बाद में पता चलेगा. लेकिन हो ये रहा है की जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी की सरकार पिछले दो-तीन महीने में एक्टिव हुई है, खासकर विपक्षी पार्टियों को लेकर, वह काम उसे 4 साल पहले करना चाहिए था. आप 5 साल सत्ता में रहे. जिन आधार पर आप सत्ता में आए उनको लेकर आपने 5 सालों में कुछ किया नहीं. और फिर आप अचानक आ कर कहने लगे कि भ्रष्टाचार का विरोध कर रहे है और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई कर रहे है तो आपको पता होना चाहिए कि उसके भी कुछ नियम और कानून तय हैं. यह सही बात है कि ममता जिस तरह से विपक्ष की गोलबंदी कर रही हैं उसपे सबकी नज़र है. सबको पता है अगर विपक्ष एकजुट हो गया तो बहुत बड़ा नुकसान हो जायगा.” नितिन गडकरी का बयान और अन्ना हज़ारे पर भी पैनल के बीच चर्चा हुई. आनंद वर्धन और अनुरंजन झा ने इस चर्चा में अपने दिलचस्प अनुभव साझा किए. अन्य विषयों पर पैनल की विस्तृत राय जानने के लिए पूरी चर्चा सुने.
Hafta 207: Modi’s Philip Kotler Award, the JNU sedition case and more
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In the latest episode of NL Hafta, host Abhinandan Sekhri is joined by the usual gang of Raman Kripal, Anand Vardhan and Manisha Pande and special guest Amit Varma—writer, columnist, and host of the podcast The Seen and the Unseen. The conversation ranges from the unending CBI saga to the JNU sedition chargesheet to Modi winning the first ever Philip Kotler Award, and more. The rumours of Arun Jaitley’s cancer treatment sparks a discussion on the ethics of reporting a public figure’s illnesses. Amit says, “Private lives are private lives, we should not get too much into them … it is when the taxpayers’ money is involved that I am concerned and want to hold those speakers accountable.” He says it’s the media’s duty to look into how long Jaitley will be absent and unable to perform his duties. Discussing PM Narendra Modi winning the Philip Kotler Award, Anand says no one really knows if it’s an authentic award or not. Kotler, a known marketing figure, cleared the air a bit. Anand says, “That has been the saving grace for the prime minister—that he stepped in and authenticated that—but still the paraphernalia that was involved in awarding the prime minister is dubious.” On the chargesheet released accusing Kanhaiya Kumar and co. of sedition, Manisha recalls the coverage of the incident by the media, which started when ABVP called Zee News which then ran the story. Abhinandan adds, “They actually used the chargesheet to pat themselves on the back saying ‘we were right all along’. It’s like a loop.” The conversation shifts to the sexual assault allegations against director Rajkumar Hirani and the #MeToo movement in general. Raman says, “I think Hirani’s story is not taking the #MeToo discussion any further, it was just another case. It was reported rightly. I do not see any problems with the media coverage.” This and much more, so tune in!
Chhota Hafta — Episode 210
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NL Hafta has gone behind the paywall, but we love our listeners. So here's a little sneak peek into the complete episode. In the latest episode of NL Hafta, Abhinandan Sekhri is joined by the usual gang of Anand Vardhan, Manisha Pande and Madhu Trehan, as well as Niha Masih, India correspondent for Washington Post. The conversation covers #MamataVsCBI in West Bengal, Robert Vadra being questioned by the ED, the Supreme Court’s contempt notice to Prashant Bhushan, the Right-wing's protest against Twitter, and a lot more. Niha kicks things off by talking about the face-off between Mamata Banerjee and the Centre. The conversation then moves to the list of questions Justice Markandey Katju directed to Chief Justice of India Ranjan Gogoi, and Abhinandan attempts to explain why the media didn't pick up the story. Listen to the full episode here: https://www.newslaundry.com/2019/02/08/hafta-210-mamatavscbi-twitters-alleged-bias-robert-vadra-and-more
The Awful and Awesome Entertainment Wrap Ep 101: Dalit Lit Fest, Soni, The Good Place and more
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In the latest episode of The Awful and Awesome Entertainment Wrap, Abhinandan Sekhri is joined by Shubham Bhatia, a journalist with Patriot, and Adhiraj Singh, head writer at VICE India. The trio discusses the Netflix film Soni, the Dalit Lit Fest, The Good Place and more. Abhinandan asks Adhiraj about the workings of VICE, saying he's curious about how VICE produces high budget non-fiction content. Adhiraj explains, “VICE in India and in general does a lot of branded and sponsored content as well. Which is where I come in where more client-based editorialising is needed.” As an example of sponsored content bringing in funding, he cites VICE’s क Se Crime series which was done as part of the promotion for Amazon Prime’s Mirzapur. Shubham talks about the Dalit Lit Fest held at Kirori Mal College, highlighting the lack of interest among Delhi University students for the event. “Where the fest was happening, you couldn't see many college students. I felt this disinterest from the students no one is really interested in even hearing about Dalit issues, which was the whole point of the fest.” The discussion movies to Soni. Adhiraj approves of the film, saying, "I liked that it did not end on some grand climactic fight.” Abhinandan says: “But it still ended on hope with that last scene.” He adds, "If we had not been instructed by our subscribers to watch it, I would have given up.” This and much more, so listen up!
Reporters Without Orders Ep 54: Harvest TV, NSSO's report, TRAI regulations and more
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This episode of Reporters Without Orders features Cherry Agarwal, Business Standard’s Somesh Jha, Newslaundry's Head of Research Ayush Tiwari and Desk Writer Gaurav Sarkar. The panel talks about the NSSO employment-unemployment report, Harvest TV and its birthing troubles, Telecom Regulatory Authority of India (TRAI)’s new regulations and more. Somesh speaks about NITI Aayog's comments on the NSSO report. He says, “The fact that he says it was a draft report, is misleading, because the NSE member who had resigned, they are on record saying that the report was finalised by them and it was approved for release in the public domain. So clearly, it was not the draft report.” The panel discusses TRAI's new framework for Cable TV and DTH operators. Gaurav says, “Now, instead of buying entire package deals, you can opt to pay for single channels.” He adds, “In spite of this change in mechanism, there has been a lot of pushback from viewers themselves who have been calling Dish TV or DEN and saying ‘hey, I don’t know how to figure this out.’” The discussion then moves to the story behind Harvest TV’s license. Ayush explains why the past owner of Harvest TV cannot sue the showrunners of the new Harvest TV. He says, “He is not the richest guy in the world, as opposed to Veecon media based in Delhi, as opposed to Barkha, Karan, Kabil Sibal based in Delhi. These guys are from Trivandrum, they run a Christian platform. Most of their revenue comes from the Pentecostal Church of Kerala to which they sold their prime-time slots. ”
How India’s FGM story unfolded in the Supreme Court
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In May 2017, a PIL in India’s Supreme Court kickstarted a hot debate on one of the most controversial practices in the 21st century—female genital mutilation (FGM). Described by activists as a "heinous crime" and "cruelty of the first order", the case stretched over several months and drew attention to a practice that has remained one of the most guarded secrets in the subcontinent and around the world. Tune into this snippet of Let’s Talk About: Female Genital Mutilation where Gaurav Sarkar explores the religious, legal, mythological and medical aspects of FGM. Subscribe to Newslaundry at bit.ly/paytokeepnewsfree to listen to the full version here: You can also listen to all our podcasts on iOS and Android. iOS: http://apple.co/2iZhEq1 Android: http://bit.ly/2jTtG3x
एनएल चर्चा 55: राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग, चंदा कोचर और अन्य
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इस हफ्ते की चर्चा बिज़नेस स्टैंडर्ड में छपी सोमेश झा की रिपोर्ट के इर्द गिर्द सिमटी रही. इसके मुताबिक मौजूदा समय में बेरोजगारी की दर सबसे अधिक है. बीते 45 वर्षो में यह सबसे ऊंचे स्तर पर जाकर करीब 6.1% तक पहुच गई है. नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस का लेबर फोर्स सर्वे 2017-18 का यह आंकड़ा है. इससे पहले ही नेशनल स्टैटिस्टिकल कमीशन यानी राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के दो गैर सरकारी सदस्यों ने भी इस्तीफा दे दिया. इनके नाम पीसी मोहनन और जीवी मिनाक्षी हैं. इसके साथ ही अब एनएससी में सिर्फ एक सदस्य नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत शेष रह गए हैं. इसके अलावा भारत के पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिज़ का लंबी बीमारी के बाद निधन, कोबरापोस्ट की एक खोजी पड़ताल जिसमें उन्होंने लोनदाता कंपनी एडीएफएल द्वारा करीब 31000 करोड़ की हेराफेरी का दावा और राहुल गांधी की घोषणा जिसमें उन्होंने न्यूनतम आय की गारंटी योजना लागू करने का वादा किया है. साथ में भाजपा के मंत्री नितिन गडकरी का बयान और आईसीआईसीआई बैंक की मुखिया रही चन्दा कोचर के ऊपर सीबीआई द्वारा दर्ज किया गया एफआईआर भी इस चर्चा के केंद्र में रहे. इस बार की चर्चा में बतौर मेहमान एशियाविल वेबसाइट के पत्रकार दिलीप खान हमारे साथ जुड़े. इससे पहले वो राज्यसभा टीवी से जे थे. साथ ही न्यूज़लॉन्ड्री के विशेष संवादाता बसंत कुमार और न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकर आनंद वर्धन भी चर्चा में शामिल हुए. चर्चा का संचालन हमेशा की तरह न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. चर्चा की शुरुआत राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के आकड़ों से जुड़े विवाद से हुई अतुल ने कहा, “दो दिन पहले राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग से जुड़े दो अंतिम गैर सरकारी सदस्य पीसी मोहनन और जेवी मिनाक्षी ने इस्तीफा दे दिया. इनका आरोप था कि सरकार बेरोजगारी से जुड़े आंकड़े दबा कर बैठी है, जारी नहीं कर रही है. इसके साथ ही अब राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग निष्क्रिय संस्था बन गया है. राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग देश में तमाम तरह के बेरोज़गारी और अन्य आर्थिक संबंधी आंकड़ों को तैयार करने वाली ज़िम्मेदार संस्था है. माना जाता है कि दुनिया भर में आंकड़ों को इकट्ठा करने वाली गिनी चुनी संस्थाओं में से भारत की राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग को गिना जाता था. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की एक प्रोफेसर जयति घोष जो कि एक अर्थशास्त्री भी हैं, उनका कहना था की सरकार जानबूझ कर इस संस्था को कमज़ोर करने में लगी हुई थी. 2017 से 2018 के बेरोज़गारी के जो आकड़े हैं, सीधे-सीधे उसका संबंध नोटबंदी जैसे अहम फैसले से जुड़ता है. बिज़नेस स्टैंडर्ड ने उसका एक लीक हिस्सा प्रकाशित किया है. मैं बसंत से यह जानना चाहूंगा कि ये जो राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के सदस्य ने जो इस्तीफा दिया उनसे बातचीत में आपको क्या लगा की सरकार जानबूझकर इसको दबाती जा रही थी या फिर इसके पीछे कोई और वजह भी है?” अपनी बात रखते हुए बसंत ने कहा, "जिन लोगों ने अपने पद से इस्तीफा दिया है उनसे सम्पर्क नहीं हो पाया लेकिन मैंने प्रणब सेन से विस्तार से बात की,, जो कि मौजूदा सरकार के दौरान एनएससी के चेयरमैन थे. उन्होंने बताया के जब वे चेयरमैन था तब सरकार का नया नया गठन हुआ था हमारे आकड़ो से सरकार की सफलता-असफलता तय नहीं होती थी. लेकिन अभी जो सरकार है वह जानबूझ कर आंकड़ों को जारी नहीं कर रही है. जिन लोगो से अपने पद से इस्तीफा दिया है उन लोगों ने मुझसे बात की थी और यह आंकड़े इसीलिए जारी नहीं हो रहे है क्योकि बेरोज़गारी दर बहुत बुरी स्थिति में है. सरकार नहीं चाहती की चुनाव से दो महीने पहले ऐसा कोई आंकड़ा सामने आए जिससे उसको नुकसान. इन आकड़ों से एक तरह से सरकार की पोल खुल जाएगी और सरकार किसी भी स्थिति में ऐसा नहीं चाहेगी. हालांकि बजनेस स्टैंडर्ड में यह ख़बर छप चुकी है. आंकड़े कितने सही हैं ये तो बाद में तय होगा.” चर्चा को आगे बढ़ाते हुए अतुल कहते है, “दिलीप राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग जो इस प्रकार की लोकतांत्रिक संस्थाए हैं अगर ये ठीक से काम नहीं करती हैं तो आपको पता ही नहीं चलेगी कि देश में बेरोज़गारी की दर क्या है. ऐसे में आप बेरोज़गारी को कम करने लिए नीतियां कैसे बनाएंगे. इसके आलावा भी तमाम संस्थानों के साथ सरकार का टकराव रहा है. क्या यह इस सरकार की अक्षमता का सबूत है?” इसका जवाब देते हुए दिलीप ने कहा, “ऐसा नहीं है की सरकार को इन आकड़ों का पता नहीं है सरकार के सामने ये आकड़े पेश हो चुके हैं एनएससी ने एनएसएसओ के सामने डेटा रखा और एनएसएसओ इसे अप्रूव करता है. सरकार के पास ये सारे डेटा हैं. होम मिनिस्ट्री ने जब एनसीआरबी ने जब किसान आत्महत्या के आंकड़े जारी करना बंद किया तो यह भी इसीलिए कि ये आंकड़े सरकार की छवि के ख़िलाफ़ जाते हैं.”
Chhota Hafta - Episode 209
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NL Hafta has gone behind the paywall, but we love our listeners. So here's a little sneak peek into the complete episode. In this episode of NL Hafta, host Abhinandan Sekhri is joined by the in-house panel of Manisha Pande, Madhu Trehan and Raman Kirpal, and Scroll staff writer Shoaib Daniyal. The conversation covers Harvest TV, the new 13-point roster for reservation of teaching posts, the National Sample Survey Office jobs report, George Fernandes’s legacy, the latest Cobrapost investigation, and more. Shoaib explains the 13-point roster order given by the Supreme Court. He says reservation on the recruitment of faculty will now be calculated by the department, not by the university as a whole. Raman draws the discussion to the latest Cobrapost story on the DHFL financial scam. He says: “I don’t see any scam in it! This is just a narrative that the money moved from this place to another. There could be a story " Listen to the full episode here: https://www.newslaundry.com/2019/02/01/hafta-209-13pointroster-harvest-tv-dhfl-and-more
Hafta 206: Citizenship Bill, Reservation Bill, Alok Verma and more
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In this episode of NL Hafta, host Abhinandan Sekhri is joined by Hafta regulars Anand Vardhan and Manisha Pande, and special guests Arunabh Saikia, staff writer at Scroll, and economics journalist Vivek Kaul. The discussion revolves around the Citizenship Bill, the 10 per cent Reservation Bill, Alok Verma's reinstation, the All-India Marathi Literary Meet, and more. The discussion starts with Arunabh talking about the Citizenship Bill and its impact on Assamese politics. “Is it even possible that no Indian is left out?” Abhinandan asks. The bill allows people of all religions except Islam to enter India from Bangladesh. The panel calls it explicitly anti-Muslim, even more so than Trump’s so-called “Muslim ban”. Moving on to the Reservation Bill, Vivek says, “Reservation is useful when the government is creating jobs.” He says he's been dissatisfied with the government’s job creation over the past three years. “A cut-off has to be useful,” he points out about the new quota, saying the cut-off includes so many people that it's useless. The panel then has a comprehensive discussion on the desirability of government jobs in relation to reservation. Anand starts the discussion on #CBIvsCBI with a prediction that the conversation on CBI will disappear after the Supreme Court verdict, just as it disappeared in the case of the Rafale deal. Manisha is sceptical of the impact of the controversy. The panel debates whether or not the #CBIvsCBI case interests the wider general public. Manisha talks about the laws surrounding private radio news broadcasting and the pro-government bulletins (or lack thereof) on AIR. Vivek questions the law that private radio cannot broadcast news when private TV can. The panel then talks about HS Phoolka's resignation from the Aam Aadmi Party. Anand scrutinises Phoolka’s argument that an anti-corruption movement should not have become a party at all. On the trend of capable leaders leaving the AAP, Abhinandan remarks, “You cannot be a single point person and survive in politics.” This and more on NL Hafta, so tune in!
Reporters Without Orders Ep 53: #Cobrapost, Harvest TV & more
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In this episode of Reporters Without Orders, the panel discusses Cobrapost's recent exposé, Kapil Sibal's comments on Harvest TV, the ensuing controversy, CAG Rajiv Mehrishi’s alleged tax evasion and more. The panel includes Cherry Agarwal, Desk Writer Gaurav Sarkar, Head of Research Ayush Tiwari, and Special Correspondent Prateek Goyal. Gaurav kicks off the discussion with the Cobrapost investigation that he reported on. Ayush points out a lack of due process. “There were allegations that [Cobrapost] had sent its questionnaire with 64 questions to DHFL on the same morning as the press conference. That raises a lot of counter-questions from the perspective of DHFL.” Gaurav also notes: “What really stood out was that the presser started at 3 pm yesterday at the Press Club. Why hold it once the stock markets are shut?” Giving a background on the Harvest TV controversy, Ayush said, “What you can say of all these media houses, because HTN is not the only one coming out, there will be many more in the coming days. They are all trying to cash in on the 2019 general elections.” Cherry weighs in, “They were trying to get licenses for about year now, if the government was not issuing licenses then that is a problem.” Prateek joins the discussion over the phone. He speaks about his fact-check report on "cyber expert" Syed Shuja. Prateek said, “We checked with ECL, no one knows [Shuja]. What if he is also making up the names? His entire account is fake.” The panel also discusses the ethics of journalism. Cherry poses the question, “When you are reporting on dire issues you see people hanging by a thread, would you intervene?” Ayush, says that he would. He says that being a reporter/journalist is a label that comes later. Gaurav says he would not intervene when “the greater good is actually reporting the story, and knowing that it would probably have an impact.” For all this and more, listen up!
The Awful and Awesome Entertainment Wrap Ep 100: Thackeray, JLF and more
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In the 100th episode of Awful and Awesome, our hosts Abhinandan Sekhri and Rajyasree Sen go live to talk about the best and worst of pop-culture. They discussed Thackeray, the new Firstpost advertisement, Netflix’s Conversations with a Killer: The Ted Bundy Tapes, Jaipur Literature Festival and a lot more. The conversation begins with Thackeray, which Abhinandan describes as a metaphor for the Shiv Sena. "Simplistic, endorses violence, made by morons, for morons,” he says. Rajyasree quipped about the costume design of the film saying, “It casts Nawazuddin Siddiqui, and his nose, his prosthetic nose.” Later she also dismisses Manto saying, “I think Nawazuddin needs to stop acting as real people.” The duo then discusses the new Firstpost ad for the publication’s new weekly newspaper. Rajyasree pointed out the lack of humility in the fact that the paper claims itself to be “the last word in news”. Abhinandan further criticizes, “It is a flawed idea to have the last word in news, there ain’t no last word in news.” Rajyashree then brings up the new Amazon series Four More Shots Please!. She describes it as “India’s answer to Sex in the City.” Adding her scathing review, she says, “I watched four episodes, which I thought was far too many.” She also deems it an inaccurate portrayal of female interactions remarking that “he dialogue is so stilted, women do not talk to each other like that”. Abhinandan then brings up JLF. He says, “There’s one bunch of people trashing JLF, there’s some who love it, but I haven’t seen anyone aggressively defend it,” as he goes on to aggressively defend JLF. He argues, “What it offers is amazing it’s very easy to shit on it because of the Suhel Seths, but for every Suhel Seth there is a Ben Okri.” Tune in for more!
एन एल चर्चा 54: प्रियंका गांधी, महागठबंधन, ईवीएम हैकिंग और अन्य
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इस हफ्ते की चर्चा कांग्रेस द्वारा प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाने पर केंद्रित रही. 2019 लोकसभा चुनावों से ठीक पहले प्रियंका गांधी को मैदान में उतारने के क्या अर्थ है और इसके क्या परिणाम संभावित हैं, इन सब विषयों पर चर्चा हुई साथ ही कोलकाता में ममता बनर्जी ने एक बड़ी विपक्ष की रैली आयोजित की जिसमें करीब 20 बड़े राजनैतिक दलों के नेता और उनके प्रतिनिधि शामिल हुए. इस पर बीजेपी की तरफ से एक प्रतिक्रिया आई कि यह भ्रष्ट और नामदार लोगो का गठबंधन है. क्या भाजपा के अंदर कोई बेचैनी पैदा हुई है, इस पर भी पैनल ने बहस की. बीते हफ्ते एक और बड़े घटनाक्रम के तहत सईद शुज़ा नाम के साइबर एक्सपर्ट ने लंदन में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दावा किया कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है और 2014 के बाद से देश में हुए सारे चुनाव में ईवीएम के जरिए घपला किया गया है. ईवीएम में गड़बड़ी के ज़रिए चुनावी नतीजों को प्रभावित किया गया है. हालांकि शुजा के दावे में तथ्य कम और खामियां बहुत हैं. जो कि हमारी चर्चा का विषय रहा. साथ ही ऑक्सफेम के वह रिपोर्ट भी हमारी चर्चा में शामिल हुई जिसमें देश के 9 बड़े उद्योगपतियों के पास देश की आधी आबादी के बराबर संपत्ति है. चर्चा में इस बार आउटलुक पत्रिका के असिस्टेंट एडिटर ओशिनॉर मजूमदार पहली बार चर्चा का हिस्सा बने, इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकर आनंद वर्धन भी चर्चा में शामिल हुए. चर्चा का संचालन हमेशा की तरह न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. शुरुआत प्रियंका गांधी को कांग्रेस पार्टी द्वारा पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाए जाने के निर्णय से हुई. अतुल ने आनंद वर्धन से पूछा, “आनंद एक सवाभाविक सा सवाल पैदा होता है की राहुल गांधी ने हाल ही में एक अच्छा परफॉर्मेंस दिया था. तीन राज्यों में कांग्रेस पार्टी जीतने में सफल रही. सबसे बड़ा सन्देश था की भाजपा का स्कोर 0-5 रहा. तो ऐसी स्थिति में आखिरी पल में प्रियंका गांधी को पार्टी में लाने के निर्णय को कैसे देखते है क्यों इसकी नौबत आन पड़ी कांग्रेस को?” इसका जवाब देते हुए आनंद ने कहा, “इसको कई नज़रिए से देखा जा सकता है. मैं इसमें नहीं जाना चाहूंगा. सम्भव है की यह एक पारिवारिक निर्णय हो, डाइनिंग टेबल निर्णय हो और कांग्रेस के लोग वहां  बैठ कर पत्रकारों पर हंस रहे हों की ये लोग कैसे-कैसे कारण बता रहे हैं.” आनंद आगे कहते हैं, "अभी जो सपा-बसपा का अंक गणित है, जो केमिस्ट्री है उसमें कांग्रेस ने बदलाव कर दिया है. क्योंकी गठबंधन से दरकिनार करने से भी बुरी स्थिति है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश जहां अल्पसंख्यक या मुस्लिम संख्या में ज्यादा हैं वहां सपा-बसपा को स्पष्ट मज़बूती मिलती दिख रही है. लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश में गणित अभी भी उलझा हुआ है. यहां जातीय गणित है. सभी दलों का अपने वोटबैंक पर दावा है. मतलब स्थिति इतनी स्पष्ट नहीं है. कांग्रेस इस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाकर भाजपा को कमज़ोर ज़रूर कर सकती है.” अतुल ने यहां पर ओशिनॉर को चर्चा में शामिल करते हुए पूछा, “आनंद ने बहुत सफाई से उस वाले सवाल को टाल दिया कि "ऐसा क्यों". तो मैं ये जानना चाहूंगा की आप उस क्यों के बारे में बात करना चाहेंगे या फिर आप भी प्रियंका को सक्रिय राजनीति में शामिल होने के संभावित नतीजों के बारे में ही बात करना पसंद करेंगे?” ममता बनर्जी की कोलकाता में बड़ी विपक्षी रैली और ईवीएम हैकिंग पर भी पैनल के बीच दिलचस्प सवाल-जवाब हुए. आनंद और ओशिनॉर मजूमदार ने इसमें हस्तक्षेप किया. अन्य विषयों पर पैनल की विस्तृत राय जानने के लिए पूरी चर्चा सुने.
Chhota Hafta — Episode 208
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NL Hafta has gone behind the paywall, but we love our listeners. So here's a little sneak peek into the complete episode. In this Hafta, Hartosh Singh Bal, Caravan's political editor magazine, joins Newslaundry managing editor Raman Kirpal, editor Manisha Pande, opinion writer Anand Vardhan and host Abhinandan Sekhri. The group discusses Priyanka Gandhi’s official entry into politics, the Mahagathbandhan, Ajit Doval’s son's defamation plea against the Caravan, EVM hacking and more.
Hafta 204: the 'interception' order, Meghalaya miners, Nitin Gadkari and more
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In this week’s episode, South Asia editor of Asia Times, Saikat Datta, joins the regular Hafta gang of Abhinandan Sekhri, Raman Kirpal, Manisha Pande and Anand Vardhan to discuss the home ministry authorising 10 central agencies to intercept information on computers, the misinformation surrounding it. The discussion kicks off with Saikat explaining the home ministry order and his experience of examining the surveillance structure and the safeguards that are there. Is it possible to run an operation at such a huge level? Saikat talks about his experience with dealing with the Radia tapes and the cumbersome process of going through 200 phone calls. The discussion then moves to the miners trapped inside a coal mine in Meghalaya and why it took so long for this to make it to the national news, the rescue operation and the politics around it. Saikat compares the situation of Meghalaya with the movie Kaala Patthar. The panel then moves on to discuss Mamta Banerjee not allowing BJP to carry out Rath Yatras in West Bengal. The gang also indulges in lighthearted speculation about what could be the reason behind Nitin Gadkari’s statements like “leadership should own up to failures”. Is Gadkari testing the waters for the PM post? Listen up! There’s a lot more.
Reporters Without Orders Ep 52: Media in Chhattisgarh, land conflicts, #JNUSeditionCase and more
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In this episode of Reporters Without Orders, Kumar Sambhav Shrivastava, award-winning journalist and contributing editor at Business Standard, joins the in-house gang of Gaurav Sarkar, Prateek Goyal, Ayush Tiwari and Cherry Agarwal. The panel discusses the chargesheet filed by the Delhi police against the former Jawaharlal Nehru University Students’ Union (JNSU) president Kanhaiya Kumar and nine others. They also discuss the challenges of beat reporting, the presser on EVM hacking, media’s coverage of land conflicts and more. Ayush begins the discussion by talking about the under-reportage of “Operation Lotus” in Karnataka. Gaurav adds, “Maybe one of the reasons it has been under-reported is also because Karnataka has been in shambles ever since the elections started Maybe from an editorial point of view, it doesn’t hold water because it has been happening for quite some time.” Speaking about media’s coverage of #JNUSeditionCase, Gaurav dubbed media’s coverage as “over-the-top”. Cherry disagreed. “Sedition is a law that needs a lot of discussions—if someone is being slapped with sedition, it does deserve prime-time coverage,” she said. In this particular case, “the charge sheet is being filed after three years, the delay itself should have the journalists questioning what’s happening,” she added. Sambhav discussed the media’s reportage of the new agricultural package. He said, “There was so much anticipation that the government has come up with something extraordinary on farmer’s distress but I could see journalists not being as critical about examining what exactly that package means for business economics and farmers the reporting was also very superficial.” To which, Cherry asked, “Is it because newsrooms lack expertise?” It is rather due to a paucity of time, Sambhav explained. “When it comes to issues (sic) such as these, reporters need to spend time on deciphering the information, many reporters don’t get to do this. That’s the unfortunate part of how media functions,” he said. Prateek joins the discussion to talk about the excesses of security forces in Chhatisgarh’s Korseguda. He also speaks about why it is challenging for the media to cover such regions. For all this and more, listen up!
The Awful and Awesome Entertainment Wrap Ep 99: Fyre, Uri, the Nineties and more
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In the latest episode, Abhinandan Sekhri co-hosts with Samar Khan—director, producer and former journalist based in Mumbai. The duo discuss the portrayal of the Indian forces in cinema, the rise of TV and change in cinema in the Nineties, the Netflix documentary Fyre and more. Samar has worked on Shaurya, The Test Case and has attended the NDA. Abhinandan asks him: “Is it a coincidence that most of the things that you have created have to do with the forces?” Samar says, “That’s what interests me the most. I think there are so many stories to be told about the men in uniform which are just not war stories There are other stories that happen in the Army.” The hosts moved on to discuss the 1990s. Samar points out cultural changes marked by Dilwale Dulhania Le Jayenge: “[DDLJ] was the first film to talk to an urban audience. It was also the birth of a new director … It was almost like a changing of the guard." He says that was a time when you'd see a lot of movies influenced by the West, when a new generation of directors had taken over. Abhinandan then talks about the Netflix documentary Fyre. He says, “It’s a great commentary, other than the specific fraud it is on. It's also a comment on millenials and how social media can influence what we think.” Moving on to the movie Uri: The Surgical Strike, Samar says: “There are always fictional elements added which make you laugh. If you are the ‘janta’ audience then the humour works for you But if you are a military buff, you look at it and say ‘What the fuck? This can never happen'.” Tune in for more!
Why the Naxals are like fish in a pond
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Brigadier BK Ponwar, the Director of the Counter Terrorism and Jungle Warfare College in Chhattisgarh, compares the Naxal insurgency to fish in a pond. He explains this analogy by giving examples from insurgencies in other parts of India, particularly the Northeast. Amit Bhardwaj also questions him about the alleged incidents of sexual assault by security forces on civilians. Tune in to this snippet of Let's Talk About: Naxalism - Part 2 to listen to what he has to say. Subscribe to Newslaundry to listen to the full version here:
एन एल चर्चा 53: पोर्न और हिंसा का संबंध, उत्तर प्रदेश में गठबंधन और अन्य
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इस हफ्ते की चर्चा बीबीसी की उस रिपोर्ट को केंद्रित रही जिसमें भारत में पोर्न वीडियो, पोर्न वेबसाइट से सामाज में पड़ने वाले हिंसक प्रभावों की पड़ताल की गई. इसके अलावा कारवां पत्रिका की एक बड़ी खोजी रिपोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के बेटे विवेक डोवाल द्वारा कालेधन के लिए बदनाम केमन आइलैंड में कंपनी स्थापित करने का मामला, यकायक केंद्र सरकार के कई शीर्ष मंत्रियों, भाजपा नेताओं की बीमारी, उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के बीच हुआ गठबंधन आदि इस बार की चर्चा का मुख्य केंद्र रहे. चर्चा में इस बार दो नए मेहमान जुड़े, दिव्या आर्या जो की बीबीसी में वुमेन अफेयर, पत्रकार हैं साथ ही स्वतंत्र पत्रकार और लेखक अनिल यादव भी इस बार चर्चा का हिस्सा रहे. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकर आनंद वर्धन भी चर्चा में शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. चर्चा की शुरुआत बीबीसी की उस रिपोर्ट से हुई जिसमें पोर्न की समस्या और इसका महिलओं के प्रति होने वाली हिंसा से संबंध है. अतुल ने दिव्या से सवाल किया, “आपकी जो रिपोर्ट है, संक्षेप में आप हमारे श्रोताओं को बताए कि इसका विचार कहा से आया और इस रिपोर्ट का निष्कर्ष क्या रहा?” इसका जवाब देते हुए दिव्या ने कहा, “हमारी रिपोर्ट जो आपने बीबीसी हिंदी डॉट कॉम पर एक लेख के तौर पर पढ़ी वो एक घंटे की रेडियो डॉक्यूमेंट्री के तौर पर अंग्रेजी, हिंदी में बीबीसी रेडियो पर आई थी. इसकी शुरुआत एक ऐसे वीडियो से हुई जो मेरे पास मेरे एक व्हाट्सएप्प ग्रुप में आया था, जिससे बहुत सारे एक्टिविस्ट और पत्रकार जुड़े हुए हैं. उस वीडियो में एक लड़की के कपड़े फाड़ने की कोशिश 10-15 लड़कों का समूह कर रहा था.” दिव्या के मुताबिक बिहार के एक गांव से यह वीडियो आया था और ये ऐसा इकलौता वीडियो नहीं था. ऐसे वीडियो लगातार आते रहे हैं जिसमे लड़कियों के साथ ज़बरदस्ती की जा रही है, और उनकी अनुमति के बिना ये वीडियो बनाके फैलाया जा रहा है. और बातचीत करने पर सामने आया कि इन वीडियों को प्रोफेशनली कैमरे से शूट किए गए हिंसक पोर्नोग्राफी की तरह ही बड़ी मात्रा में शेयर किया जा रहा है. चर्चा को आगे बढ़ाते हुए अतुल कहते है, "इस मसले जुड़ा एक विषय है सेक्स एजुकेशन का. हिंदुस्तानी सामाज में सेक्स टैबू है. सेक्स एजुकेशन को लेकर न तो कोई माहौल है ना उसको खुले मन से कोई स्वीकार करता है. अनिल यादव की एक कहानी है जिसमें भारतीय सामाज में सेक्स की बेसिक ट्रेनिंग का जरिया सड़क पर चलते हुए कुत्तों के बीच होने वाला सेक्स है या फिर घरों की छतों पर गौरैय्या या कबूतरों के बीच होने वाले सेक्स को देखकर युवा सेक्स की समझ पाते हैं. इस तरह के माहौल में तो आप लड़कियों की सेक्स एजुकेशन की बात ही छोड़ दीजिए. हिंदुस्तान के संदर्भ में सेक्स एजुकेशन और सेक्सजनित हिंसा है उन दोनों में किस तरह से तालमेल हो सकता है? इसका जवाब देते हुए अनिल यादव ने कहा, “हम लोग एक सोसाइटी के तोर पर बड़ी अजीब स्थिति में है. हमारे यहां सेक्स एजुकेशन या सेक्स पर बातचीत को एक तरह से अस्वीकार किया जाता है जबकि दूसरी तरफ वो एक नेचुरल आर्गेनिक चीज़ है. सेक्स एजुकेशन के अभाव में उसके बारे में जानना, उसके बारे में सीखना पोर्न वीडियो के ज़रिए शुरू होता है.” वो आगे कहते हैं, "मतलब हमारी सोसाइटी में इन चीज़ों पर बात करने के, इन चीज़ो के बारे में एजुकेट करने के चैनल, कब के बंद कर दिए गए हैं. यह एक पाखंडी और दोहरे मापदंडो वाला सामाज है. ऐसे में जो नई पीढ़ी है उनको अगर जानना है तो वो पोर्न के ज़रिए ही सीख़ रहे हैं. लेकिन यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि पोर्न अनिवार्य तौर पर हिंसक और सैडिस्ट होता है. इसलिए नई पीढ़ी पोर्न के जरिए जो कुछ भी सीख रही है वो हिंसा सीख रही है और परपीड़ा सीख रही है, और ये बहुत ख़तरनाक बात है." आनंद वर्धन ने इस विषय पर अपनी राय रखते हुए कहा, “सूचना क्रांति ने विजुअल सेक्स का तथाकथित तौर पर लोकतांत्रीकरण किया है. इसकी पहुंच आम जन तक हुई है. इससे जो सेक्शुअली रिप्रेस्ड समाज है विशेषकर उत्तर भारतीय समाज उसको अपनी कुंठा को अभिव्यक्त करने का एक आसान जरिया मिला है. तब लोगों को पोर्न से ज्यादा चिंता ननहीं थी जब यह कुछ खास लोगों तक सीमित था. लेकिन इसके लोकतांत्रीकरण से यह बहस देखने को मिल रही है. पोर्न से एक समाज कैसे डील करता है यह भी बहुत कुछ उस समाज के बारे में बताता है.” अजीत डोवाल और सपा-बसपा गठबंधन पर भी पैनल के बीच दिलचस्प सवाल-जवाब हुए. दिव्या और अनिल ने इस चर्चा में हस्तक्षेप किया. आनंद वर्धन ने भी कुछ जरूरी, ज़मीनी जानकारियां साझा की. उनका पूरा जवाब और अन्य विषयों पर पैनल की विस्तृत राय जानने के लिए पूरी चर्चा सुने.
The Awful and Awesome Entertainment Wrap Ep 98: The Accidental Prime Minister, Uri & more
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In the latest episode of The Awful and Awesome Entertainment Wrap, Abhinandan is in conversation with Mayank Shekhar, entertainment head at Mid Day. The duo reviews The Accidental Prime Minister, Uri: The Surgical Strike and Gillette's latest commercial. They also discuss the portrayal of politics in Indian films, the evolution of film production in India and more. Mayank and Abhinandan also look back at the quality of last year’s films. “I genuinely believe that 2018 was the best year that I have had as a film reviewer watching films,” Mayank said. Speaking about a new genre of movies, Mayank said, “They are propaganda films there is a new genre called pre-election films.” On The Accidental Prime Minister, he said, “What really suffers the most is the production design the prime minister’s office looks like a shaadi hall in the movie.” Abhinandan added, “I have heard that it does not look like a story, there are just scenes that are unconnected, it does not flow like a story it’s just a bunch of scenes put together.” Explaining the lack of a storyline, Mayak said, “It is hard enough to adapt from non-fiction to begin with it would take competence of another kind to turn [Sanjay Baru’s book] into a coherent screenplay. Abhinandan also points out the difference between Uri and The Accidental Prime Minister. He said, "I have heard this one is pretty well-made.” Mayank agrees. He said, “I was stunned by it because my expectations were hugely low, as they should be because again you are walking in thinking ‘oh this is that pre-election propaganda film'." About the Gillette commercial, Abhinandan said, “It is appealing to the right values I do not know what is wrong with that overall I think it is a fantastic kind of communication from a brand that is so associated with machismo to come out with.” Discussing the backlash against the ad, Mayank talked about the people who criticised the ad. “I think a lot of opinion formation and dissemination has a lot to do with the fact that they call attention to themselves,” he said. Tune in for more!
Hafta 203: Sajjan Kumar, 1984 anti-Sikh riots, farm loan waivers, Rafael deal and more
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In this week’s podcast, our regular Hafta gang of Abhinandan Sekri, Madhu Trehan, Manisha Pande and Raman Kirpal are joined by Newslaundry subscriber Anushka Shah who is a researcher with MIT Media Lab. The podcast kicks off with a discussion on the anti-Sikh riots of 1984 after Indira Gandhi’s assassination. The team talks about how even today, media coverage of communal riots has been limited to political whataboutery where journalists only cover how a political party accuses the other. Anushka points out that in the last two years, the 1984 riots has been covered twice as much as 2002 Gujarat riots. They talk about the Delhi High Court’s judgement convicting Congress politician Sajjan Kumar for his role in the riots. Madhu says journalists should focus on writing descriptive accounts of court proceedings instead of limiting reports to the final court judgement. Moving on, Abhinandan mentions how political parties offer farm loan waivers to please their voters. Manisha says loan waivers are only a short-term solution and we need to look at the root causes of farmer distress. Anushka says 25 per cent of all news stories on agriculture are about loan waivers while stories on unemployment and agricultural unproductivity are less than 0.2 per cent. The panellists then discuss the court ruling on the Rafael deal. In the judgement, the court said it has no objection to any part of the deal. Madhu says one needs to recognise that courts are not investigating agencies. Raman replies, “Reliance has never been into aviation (sector) and they get such a huge project of around ₹30,000 crores. I personally feel this was a good enough reason for a probe.” The podcast also touches upon Rajiv Gandhi’s role in the 1984 anti-Sikh riots. Abhinandan says that as a representative of the state apparatus, Rajiv Gandhi deserved to be tried for culpable homicide. Madhu says that one should note that Rajiv Gandhi was living an apolitical life, and was not ready to be in a position of power. She adds, “I don’t think Rajiv Gandhi ordered the killings of Sardars, it was the people who wanted to please the Gandhi family.” Towards the end, Abhinandan refers to Republic TV's Republic Summit that was held on December 18 and 19. He says that with guests like PM Narendra Modi, BJP President Amit Shah and businessman Mukesh Ambani, the summit seemed more like Annual General Meeting for the BJP. Listen up! There’s more.
Chhota Hafta — Episode 207
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NL Hafta has gone behind the paywall, but we love our listeners. So here's a little sneak peek into the complete episode. Host Abhinandan Sekhri is joined by the usual gang of Raman Kripal, Anand Vardhan and Manisha Pande, and special guest Amit Varma, writer and columnist, and host of the podcast The Seen and the Unseen. The conversation ranges from the unending CBI saga to the JNU sedition chargesheet to Modi winning the first ever Philip Kotler Award, and more. The rumours of Arun Jaitley’s cancer treatment sparked a discussion on the ethics of reporting a public figure’s illnesses. Amit says, “Private lives are private lives, we should not get too much into them … it is when the taxpayers’ money is involved that I am concerned and want to hold those speakers accountable.” Anand then talks about PM Narendra Modi winning the Philip Kotler Awards, saying no one really knows if it’s an authentic award or not. Manisha recalls the media coverage of the JNU sedition case in the context of the chargesheet being filed this week. The panel also discusses the allegations of sexual assault against director Rajkumar Hirani and the #MeToo movement in general. Listen to the full episode here: https://www.newslaundry.com/2019/01/18/hafta-207-modis-philip-kotler-award-the-jnu-sedition-case-and-more
Reporters Without Orders Ep 51: CBI and the Alok Verma case, #JNUSeditionCase and more
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In the latest episode of Reporters Without Orders Cherry Agarwal is in conversation with Arvind Gunasekar, a CBI beat reporter, Vakasha Sachdev, The Quint's associate editor-legal, Rohin Verma, former Newslaundry journalist, and Ayush Tiwari. The panel discusses the controversy surrounding the Central Bureau of Investigation, former Supreme Court Justice HS Bedi’s report on alleged fake encounters in Gujarat between 2002 and 2006, brutal gang-rape and murder of a 16-year-old girl in Gaya, JNU sedition case and more. The discussion kicks off with the panel sharing their thoughts on the media's recent coverage of pertinent news pieces. Speaking of Alok Verma's resignation and the larger CBI controversy, Arvind talks about the source of the conflict. The panel also talks about the role of the Central Vigilance Commission, Supreme Court-appointed supervisor retired Supreme Court judge Justice AK Patnaik, as well as Prime Minister Narendra Modi-led selection panel. Coming to the government's role, Vakasha speaks about how the government used on-paper transfer protocols to strip former CBI chief Alok Verma of his powers. He says, “The government is very clever here.” The panel also discusses how different decision-makers, in this case, seem to have a conflict of interest. Weighing in, Rohin adds, “Judiciary bohot zyada dari hui hai (the judiciary is very afraid)", when it comes to matters concerning the prime minister’s office. The panel also talks about the JNU sedition row, with Vakasha pointing out the dangers of the sedition law. For all this and more, listen up!
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