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Indian news and current affairs - what's in the news? Why? Should it be? Tune in for an edgy take on the business of news, politics and current affairs. Newslaundry matlab - Sabki Dhulai.
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access_time4 days ago
इस हफ्ते की चर्चा बीबीसी की उस रिपोर्ट को केंद्रित रही जिसमें भारत में पोर्न वीडियो, पोर्न वेबसाइट से सामाज में पड़ने वाले हिंसक प्रभावों की पड़ताल की गई. इसके अलावा कारवां पत्रिका की एक बड़ी खोजी रिपोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के बेटे विवेक डोवाल द्वारा कालेधन के लिए बदनाम केमन आइलैंड में कंपनी स्थापित करने का मामला, यकायक केंद्र सरकार के कई शीर्ष मंत्रियों, भाजपा नेताओं की बीमारी, उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के बीच हुआ गठबंधन आदि इस बार की चर्चा का मुख्य केंद्र रहे.

चर्चा में इस बार दो नए मेहमान जुड़े, दिव्या आर्या जो की बीबीसी में वुमेन अफेयर, पत्रकार हैं साथ ही स्वतंत्र पत्रकार और लेखक अनिल यादव भी इस बार चर्चा का हिस्सा रहे. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकर आनंद वर्धन भी चर्चा में शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

चर्चा की शुरुआत बीबीसी की उस रिपोर्ट से हुई जिसमें पोर्न की समस्या और इसका महिलओं के प्रति होने वाली हिंसा से संबंध है. अतुल ने दिव्या से सवाल किया, “आपकी जो रिपोर्ट है, संक्षेप में आप हमारे श्रोताओं को बताए कि इसका विचार कहा से आया और इस रिपोर्ट का निष्कर्ष क्या रहा?”

इसका जवाब देते हुए दिव्या ने कहा, “हमारी रिपोर्ट जो आपने बीबीसी हिंदी डॉट कॉम पर एक लेख के तौर पर पढ़ी वो एक घंटे की रेडियो डॉक्यूमेंट्री के तौर पर अंग्रेजी, हिंदी में बीबीसी रेडियो पर आई थी. इसकी शुरुआत एक ऐसे वीडियो से हुई जो मेरे पास मेरे एक व्हाट्सएप्प ग्रुप में आया था, जिससे बहुत सारे एक्टिविस्ट और पत्रकार जुड़े हुए हैं. उस वीडियो में एक लड़की के कपड़े फाड़ने की कोशिश 10-15 लड़कों का समूह कर रहा था.”

दिव्या के मुताबिक बिहार के एक गांव से यह वीडियो आया था और ये ऐसा इकलौता वीडियो नहीं था. ऐसे वीडियो लगातार आते रहे हैं जिसमे लड़कियों के साथ ज़बरदस्ती की जा रही है, और उनकी अनुमति के बिना ये वीडियो बनाके फैलाया जा रहा है. और बातचीत करने पर सामने आया कि इन वीडियों को प्रोफेशनली कैमरे से शूट किए गए हिंसक पोर्नोग्राफी की तरह ही बड़ी मात्रा में शेयर किया जा रहा है.

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए अतुल कहते है, "इस मसले जुड़ा एक विषय है सेक्स एजुकेशन का. हिंदुस्तानी सामाज में सेक्स टैबू है. सेक्स एजुकेशन को लेकर न तो कोई माहौल है ना उसको खुले मन से कोई स्वीकार करता है. अनिल यादव की एक कहानी है जिसमें भारतीय सामाज में सेक्स की बेसिक ट्रेनिंग का जरिया सड़क पर चलते हुए कुत्तों के बीच होने वाला सेक्स है या फिर घरों की छतों पर गौरैय्या या कबूतरों के बीच होने वाले सेक्स को देखकर युवा सेक्स की समझ पाते हैं. इस तरह के माहौल में तो आप लड़कियों की सेक्स एजुकेशन की बात ही छोड़ दीजिए. हिंदुस्तान के संदर्भ में सेक्स एजुकेशन और सेक्सजनित हिंसा है उन दोनों में किस तरह से तालमेल हो सकता है?

इसका जवाब देते हुए अनिल यादव ने कहा, “हम लोग एक सोसाइटी के तोर पर बड़ी अजीब स्थिति में है. हमारे यहां सेक्स एजुकेशन या सेक्स पर बातचीत को एक तरह से अस्वीकार किया जाता है जबकि दूसरी तरफ वो एक नेचुरल आर्गेनिक चीज़ है. सेक्स एजुकेशन के अभाव में उसके बारे में जानना, उसके बारे में सीखना पोर्न वीडियो के ज़रिए शुरू होता है.”

वो आगे कहते हैं, "मतलब हमारी सोसाइटी में इन चीज़ों पर बात करने के, इन चीज़ो के बारे में एजुकेट करने के चैनल, कब के बंद कर दिए गए हैं. यह एक पाखंडी और दोहरे मापदंडो वाला सामाज है. ऐसे में जो नई पीढ़ी है उनको अगर जानना है तो वो पोर्न के ज़रिए ही सीख़ रहे हैं. लेकिन यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि पोर्न अनिवार्य तौर पर हिंसक और सैडिस्ट होता है. इसलिए नई पीढ़ी पोर्न के जरिए जो कुछ भी सीख रही है वो हिंसा सीख रही है और परपीड़ा सीख रही है, और ये बहुत ख़तरनाक बात है."

आनंद वर्धन ने इस विषय पर अपनी राय रखते हुए कहा, “सूचना क्रांति ने विजुअल सेक्स का तथाकथित तौर पर लोकतांत्रीकरण किया है. इसकी पहुंच आम जन तक हुई है. इससे जो सेक्शुअली रिप्रेस्ड समाज है विशेषकर उत्तर भारतीय समाज उसको अपनी कुंठा को अभिव्यक्त करने का एक आसान जरिया मिला है. तब लोगों को पोर्न से ज्यादा चिंता ननहीं थी जब यह कुछ खास लोगों तक सीमित था. लेकिन इसके लोकतांत्रीकरण से यह बहस देखने को मिल रही है. पोर्न से एक समाज कैसे डील करता है यह भी बहुत कुछ उस समाज के बारे में बताता है.”

अजीत डोवाल और सपा-बसपा गठबंधन पर भी पैनल के बीच दिलचस्प सवाल-जवाब हुए. दिव्या और अनिल ने इस चर्चा में हस्तक्षेप किया. आनंद वर्धन ने भी कुछ जरूरी, ज़मीनी जानकारियां साझा की. उनका पूरा जवाब और अन्य विषयों पर पैनल की विस्तृत राय जानने के लिए पूरी चर्चा सुने.
The+Awful+and+Awesome+Entertainment+Wrap+Ep+98%3A+The+Accidental+Prime+Minister%2C+Uri+%26+more
access_time5 days ago
In the latest episode of The Awful and Awesome Entertainment Wrap, Abhinandan is in conversation with Mayank Shekhar, entertainment head at Mid Day. The duo reviews The Accidental Prime Minister, Uri: The Surgical Strike and Gillette's latest commercial. They also discuss the portrayal of politics in Indian films, the evolution of film production in India and more. Mayank and Abhinandan also look back at the quality of last year’s films. “I genuinely believe that 2018 was the best year that I have had as a film reviewer watching films,” Mayank said.

Speaking about a new genre of movies, Mayank said, “They are propaganda films there is a new genre called pre-election films.” On The Accidental Prime Minister, he said, “What really suffers the most is the production design the prime minister’s office looks like a shaadi hall in the movie.” Abhinandan added, “I have heard that it does not look like a story, there are just scenes that are unconnected, it does not flow like a story it’s just a bunch of scenes put together.”

Explaining the lack of a storyline, Mayak said, “It is hard enough to adapt from non-fiction to begin with it would take competence of another kind to turn [Sanjay Baru’s book] into a coherent screenplay. Abhinandan also points out the difference between Uri and The Accidental Prime Minister. He said, "I have heard this one is pretty well-made.” Mayank agrees. He said, “I was stunned by it because my expectations were hugely low, as they should be because again you are walking in thinking ‘oh this is that pre-election propaganda film'."

About the Gillette commercial, Abhinandan said, “It is appealing to the right values I do not know what is wrong with that overall I think it is a fantastic kind of communication from a brand that is so associated with machismo to come out with.” Discussing the backlash against the ad, Mayank talked about the people who criticised the ad. “I think a lot of opinion formation and dissemination has a lot to do with the fact that they call attention to themselves,” he said.

Tune in for more!
Hafta+203%3A+Sajjan+Kumar%2C+1984+anti-Sikh+riots%2C+farm+loan+waivers%2C+Rafael+deal+and+more
access_time5 days ago
In this week’s podcast, our regular Hafta gang of Abhinandan Sekri, Madhu Trehan, Manisha Pande and Raman Kirpal are joined by Newslaundry subscriber Anushka Shah who is a researcher with MIT Media Lab.

The podcast kicks off with a discussion on the anti-Sikh riots of 1984 after Indira Gandhi’s assassination. The team talks about how even today, media coverage of communal riots has been limited to political whataboutery where journalists only cover how a political party accuses the other. Anushka points out that in the last two years, the 1984 riots has been covered twice as much as 2002 Gujarat riots.

They talk about the Delhi High Court’s judgement convicting Congress politician Sajjan Kumar for his role in the riots. Madhu says journalists should focus on writing descriptive accounts of court proceedings instead of limiting reports to the final court judgement.

Moving on, Abhinandan mentions how political parties offer farm loan waivers to please their voters. Manisha says loan waivers are only a short-term solution and we need to look at the root causes of farmer distress. Anushka says 25 per cent of all news stories on agriculture are about loan waivers while stories on unemployment and agricultural unproductivity are less than 0.2 per cent.

The panellists then discuss the court ruling on the Rafael deal. In the judgement, the court said it has no objection to any part of the deal. Madhu says one needs to recognise that courts are not investigating agencies. Raman replies, “Reliance has never been into aviation (sector) and they get such a huge project of around ₹30,000 crores. I personally feel this was a good enough reason for a probe.”

The podcast also touches upon Rajiv Gandhi’s role in the 1984 anti-Sikh riots. Abhinandan says that as a representative of the state apparatus, Rajiv Gandhi deserved to be tried for culpable homicide. Madhu says that one should note that Rajiv Gandhi was living an apolitical life, and was not ready to be in a position of power. She adds, “I don’t think Rajiv Gandhi ordered the killings of Sardars, it was the people who wanted to please the Gandhi family.”

Towards the end, Abhinandan refers to Republic TV's Republic Summit that was held on December 18 and 19. He says that with guests like PM Narendra Modi, BJP President Amit Shah and businessman Mukesh Ambani, the summit seemed more like Annual General Meeting for the BJP.

Listen up! There’s more.
Chhota+Hafta+%E2%80%94+Episode+207
access_time5 days ago
NL Hafta has gone behind the paywall, but we love our listeners. So here's a little sneak peek into the complete episode.

Host Abhinandan Sekhri is joined by the usual gang of Raman Kripal, Anand Vardhan and Manisha Pande, and special guest Amit Varma, writer and columnist, and host of the podcast The Seen and the Unseen. The conversation ranges from the unending CBI saga to the JNU sedition chargesheet to Modi winning the first ever Philip Kotler Award, and more.

The rumours of Arun Jaitley’s cancer treatment sparked a discussion on the ethics of reporting a public figure’s illnesses. Amit says, “Private lives are private lives, we should not get too much into them … it is when the taxpayers’ money is involved that I am concerned and want to hold those speakers accountable.” Anand then talks about PM Narendra Modi winning the Philip Kotler Awards, saying no one really knows if it’s an authentic award or not.

Manisha recalls the media coverage of the JNU sedition case in the context of the chargesheet being filed this week. The panel also discusses the allegations of sexual assault against director Rajkumar Hirani and the #MeToo movement in general.

Listen to the full episode here: https://www.newslaundry.com/2019/01/18/hafta-207-modis-philip-kotler-award-the-jnu-sedition-case-and-more
Reporters+Without+Orders+Ep+51%3A+CBI+and+the+Alok+Verma+case%2C+%23JNUSeditionCase+and+more
access_time7 days ago
In the latest episode of Reporters Without Orders Cherry Agarwal is in conversation with Arvind Gunasekar, a CBI beat reporter, Vakasha Sachdev, The Quint's associate editor-legal, Rohin Verma, former Newslaundry journalist, and Ayush Tiwari. The panel discusses the controversy surrounding the Central Bureau of Investigation, former Supreme Court Justice HS Bedi’s report on alleged fake encounters in Gujarat between 2002 and 2006, brutal gang-rape and murder of a 16-year-old girl in Gaya, JNU sedition case and more.

The discussion kicks off with the panel sharing their thoughts on the media's recent coverage of pertinent news pieces. Speaking of Alok Verma's resignation and the larger CBI controversy, Arvind talks about the source of the conflict. The panel also talks about the role of the Central Vigilance Commission, Supreme Court-appointed supervisor retired Supreme Court judge Justice AK Patnaik, as well as Prime Minister Narendra Modi-led selection panel.

Coming to the government's role, Vakasha speaks about how the government used on-paper transfer protocols to strip former CBI chief Alok Verma of his powers. He says, “The government is very clever here.” The panel also discusses how different decision-makers, in this case, seem to have a conflict of interest. Weighing in, Rohin adds, “Judiciary bohot zyada dari hui hai (the judiciary is very afraid)", when it comes to matters concerning the prime minister’s office.

The panel also talks about the JNU sedition row, with Vakasha pointing out the dangers of the sedition law. For all this and more, listen up!
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access_time11 days ago
की जरूरत थी जो कि महज 48 घंटे में संसद के दोनों सदनों में पास हो गया. किसी भी बिल को पास करने की एक लंबी चौड़ी प्रक्रिया होती है, घंटों बहस चलती है उस पर विचार विमर्श किया जाता है, ज्यादा से ज्यादा लोगों के विचार उसमें शामिल होते हैं. लेकिन यहां एक हड़बड़ी नजर आती है. संविधान संशोधन में इतनी जल्दबाजी ठीक है?”

इसका जवाब देते हुए आनंद ने कहा, “आरक्षण पर अंबेडकर ने कहा था कि आरक्षण तात्कालिक है और इसका प्रतिशत कम ही होना चाहिए. कुछ राज्यों में इसे बढ़ाया गया जैसे तमिलनाडु में जनसंख्या के आधार पर आरक्षण 50% से बढ़ाकर 67% कर दिया गया, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा 10% आरक्षण बढ़ाना पैंडोरा बॉक्स खुलने जैसा है. अब केंद्र सरकार ने एक शुरुआत कर दी है. इससे बाकी समुदायों में भी आरक्षण पाने की होड़ लग सकती है. इसके अलावा ऐसा नहीं है कि आरक्षण मिलने से नौकरी मिल जाएगी. 10% आरक्षण के लिए जो क्राइटेरिया तय किया गया है उसके हिसाब से भारत की 95% आबादी आरक्षण के लिए योग्य है. अब उसमें तो प्रतिस्पर्धा बनी ही रहेगी यह सवर्णों के लिए खुद बहुत कंफ्यूज करने वाली स्थिति है.”

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए अतुल ने सिद्धांत से सवाल किया, “आरक्षण का लक्ष्य था सामाजिक, शैक्षिक समानता लाना. जो चीजें जातियों से तय होती हैं  उसको खत्म करने के लिए आरक्षण लाया गया था. हम पाते हैं कि लंबे समय से आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग भी हो रही थी. लेकिन यह 10% कोटा सामाजिक समानता के लक्ष्य को कहीं ना कहीं असफल करने वाली बात नहीं लगती?”

इसका जवाब देते हुए सिद्धांत ने कहा, “आर्टिकल 15 (4) 16 (4) जिसकी आप बात कर रहे हैं उसमें सोशली और एजुकेशनली बैकवर्ड लोगों के बारे में जिक्र होता है, लेकिन इकोनॉमिकली बैकवर्ड के बारे में हम सिर्फ सुनते आ रहे थे. नरेंद्र मोदी उसे लेकर आ गए कि 10% आरक्षण आर्थिक आधार और पिछड़े लोगों को दिया जाएगा.”

वो आगे कहते हैं, “66,000 प्रति महीना कमाने वाले आदमी को आप गरीब मानते हैं. तो देखना होगा कि इकोनोमिकली बैकवर्ड का क्लॉज़ जोड़ने के बाद भी आप हासिल क्या कर रहे हैं. कोई नई तस्वीर बन भी रही है या नहीं. क्योंकि हो सकता है सुप्रीम कोर्ट इसे रद्द कर दे, तब यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी की इस पॉलिटिक्स का क्या होगा.

आरक्षण के मौजूदा स्वरूप को लेकर जो यथास्थिति है उसके बारे में बताते हुए सिद्धांत ने कहा, “2 साल पहले मैंने बीएचयू पर एक स्टोरी की थी.  इसमें यह सामने आया, कि बीएचयू में असिस्टेंट प्रोफेसर की कुल 900 पोस्ट है जिसमें 850 केवल जनरल केटेगरी के प्रोफेसर हैं, एसटी कैटेगरी का एक भी प्रोफेसर नहीं है, एससी के 15 और ओबीसी के कुल 35 असिस्टेंट प्रोफेसर वहां पर कार्यरत है. यह स्थिति जब बनी हुई है नौकरियों में तो फिर सवर्ण के लिए आरक्षण की जरूरत ही क्या है.”

इस मसले पर जयया निगम ने भी अपनी राय कुछ इस तरह से रखी, “आरक्षण का यह बिल आर्थिक तौर पर पिछड़े लोगों के लिए लाया गया है और अभी तक इसमें जितनी बातें सामने आई हैं उससे यह कहा जा सकता है इसका फायदा सभी धर्मों के लोगों को मिलेगा लेकिन इस पर अभी तक तार्किक रूप से ऐसा कुछ नहीं आया है, जिसमें यह साफ हो कि सरकार आर्थिक तौर पर पिछड़े हुए लोगों को कैसे पहचानेगी. इसमें एक बात और सामने आ रही है यूथ फॉर इक्वलिटी की, जो सामान्य श्रेणी के लोगों का एक फोरम है. यूथ फॉर इक्वलिटी इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गया है. मतलब सवर्णों के अंदर भी दो मत हैं. अब आप गरीब सवर्ण  कैसे तय करेंगे यह आने वाले समय में समाज के लिए एक बड़ी बहस हो सकती है.”

पैनल की विस्तृत राय जानने और अन्य मुद्दों के लिए सुने पूरी चर्चा।
Chhota+Hafta+%E2%80%94+Episode+206
access_time12 days ago
NL Hafta has gone behind the paywall, but we love our listeners. So here's a little sneak peek into the complete episode.

In this episode of NL Hafta, host Abhinandan Sekhri is joined by Hafta regulars Anand Vardhan and Manisha Pande, and special guests Arunabh Saikia, staff writer at Scroll, and economics journalist Vivek Kaul. The discussion revolves around the Citizenship Bill, the Reservation Bill, Alok Verma's reinstation and more.

Arunabh talks about the Citizenship Bill and its impact on Assamese politics. “Is it even possible that no Indian is left out?” Abhinandan asks. Moving on to the Reservation Bill, Vivek says, “Reservation is useful when the government is creating jobs.”

Manisha talks about the laws surrounding private radio news broadcasting and the pro-government bulletins (or lack thereof) on AIR. The panel debates whether the general public is interested in the #CBIvsCBI case, and HS Phoolka's resignation from the Aam Aadmi Party.

Listen to the full episode here: https://www.newslaundry.com/2019/01/11/chhota-hafta-episode-206
The+Awful+and+Awesome+Entertainment+Wrap+Ep+97%3A+The+Mule%2C+Golden+Globes%2C+Gully+Boy+and+more
access_time13 days ago
In the latest episode of The Awful and Awesome Entertainment Wrap, hosts Abhinandan Sekhri and Rajyasree Sen discuss BCCI’s notice to Hardik Pandya and KL Rahul for their appearance on Koffee with Karan, the Golden Globes, the new Uber Eats advertisement, The Mule, the Gully Boy trailer, and Backstreet Boys being back—again!

The discussion begins with a quick tussle between our hosts over Rajyasree’s accusation that Koffee with Karan is a Graham Norton Show rip-off. Rajyasree also points out the irony of BCCI being the moral police in light of the complaints against BCCI’s CEO. Both agree that the degree of reaction to Pandya’s alleged misogyny is unwarranted and that it's more important to call out Karan Johar’s “infantile humour”.

Rajyasree then talks about Clint Eastwood’s The Mule, based on the true story of Leo Sharp. They praise the cast, especially Eastwood and his “grasp on cinema”, nominating him for a lifetime achievement award at age 90. Abhinandan was put off by the “easiness” of the film and the “goody-goodiness of the resolution” despite being greatly impressed by Eastwood.

The conversation moves to the Golden Globes. Abhinandan and Rajyasree praise Christian Bale and Glenn Close’s speeches, the former for his humour and the latter for bringing to the fore the struggle of women to be accepted both as mothers and professionals. They then discuss the Uber Eats ad, “Alia’s Tinda Moment”. Rajyasree says the ad was cute but not very compelling. Abhinandan expresses his problem with Alia Bhatt—though he thinks “she is the best actor of her generation”, because of her “child’s face”, her sexuality on screen makes him feel “queasy”.

Abhinandan isn't very excited about Gully Boy because he believes hip-hop is very culturally specific to the US so it cannot be entirely transposed to Bombay. He is more excited about the Manoj Bajpayee-starrer Sonchiraiya, which is “a Paan Singh Tomar marries Bandit Queen and gives birth to a Gangs of Wasseypur kind of thing”.

Finally, our hosts do not see the point of the Backstreet Boys' mushy comeback. They discuss how the main message of their latest video is that family is the most important thing in life. Featuring the Backstreet Boys with their wives and children, it promotes a heteronormative idea of family. “Yeh music video wagera unke bas ka raha nahin (this music video stuff is not in their league any more),” Abhinandan remarks.

Tune in for more!
Reporters+Without+Orders+Ep+50%3A+%23QuotaBill%2C+government%27s+plans+to+monitor+media+%26+more
access_time14 days ago
This week Reporters Without Orders features Cherry Agarwal in conversation with Newslaundry’s Ayush Tiwari, The Print's Amrita Nayak Dutta and Economic & Political Weekly’s Tejas Harad. In this episode, among other things, the panel discusses the #QuotaBill, which allows for 10 per cent reservation for economically weak sections of people belonging to the general category in jobs and education.

The podcast kicks off with Ayush talking about Greater Kashmir’s misinterpretation of Norway Prime Minister Erna Solberg’s interview. Amrita speaks about media's coverage of the Indian Science Congress, where outlandish claims were made, while Cherry talks about media's coverage of the #CitizenshipAmendmentBill.

Tejas doubts that the #QuotaBill “will stand judicial scrutiny”. He explains the long judicial and legislative process required to bring such a quota into effect. He says it is not being opposed by other political stakeholders because it would eliminate the upper-caste vote. The panel also discusses the Supreme Court's stand on an economic criterion being used for reservation and why this bill will involve amending Article 15 (4).

The panel then goes on to discuss, in the context of caste, whether “people of a community being the torchbearers of the narrative” is necessary to rectify the discourse on caste. Ayush identified this to be a part of the larger debate on whether only those with the lived experiences of prejudice must be the dominant voices in the discourse.

Amrita spoke about her story on the government’s attempts to monitor the media, as well as Information and Broadcasting minister Rajyavardhan Singh Rathore's response. Ayush argues that “it is not negative coverage, but real journalism at stake here”.

For all this and more, listen up!
Hafta+202%3A+%23AssemblyResults2018%2C+new+RBI+chief%2C+the+Ambani+wedding+and+more
access_time19 days ago
In this episode of NL Hafta 202, the regular Hafta gang of Manisha Pande, Abhinandan Sekhri, and Anand Vardhan is joined by Saurabh Dwivedi, founder-editor of Lallantop.

Saurabh, who travelled for a month in Chhattisgarh, Madhya Pradesh and Rajasthan in the run-up to the elections, has some great insights to share. The team discusses the reasons for Congress’ victory in the Hindi heartland and whether it will have any bearing on the 2019 general election.

Saurabh explains how PM Modi failed as a communicator in Chhattisgarh and why his speeches didn’t click with the masses.

Anand tells us why political analysis as we see in news media is overrated. Abhinandan says the Assembly results were not Rahul Gandhi’s Pappu-pass-ho-gaya moment, but more a failure of the BJP government.

The Hafta gang also discusses the resignation of RBI chief Urjit Patel and his successor Shaktikanta Das. Abhinandan says: " the way everyone is dismissing him on his degree, I disagree with that I will not diss him on that."

Finally, the team discusses the Ambani wedding and what it means to be as rich as Mukesh Ambani.

Listen up!
Hafta+205%3A+PM+Modi%27s+interview+to+ANI%2C+Sabarimala+row%2C+Rafale+deal+and+more
access_time19 days ago
Welcome to the first episode of NL Hafta in 2019! Host Abhinandan Sekhri is joined by the regular gang of Manisha Pande, Raman Kirpal and Anand Vardhan, and special guest Dushyant Arora, lawyer and chief editor of News Central 24x7.

The conversation starts with Abhinandan asking the panellists their views on ANI editor Smita Prakash’s interview with Prime Minister Narendra Modi. The interview's earned a fair share of commentary and dissent, primarily against the journalist for being too soft on the PM. Anand takes the lead on the issue, saying he does not find it objectionable if a member of the media is respectful to a man in Modi's position. “That is the dignity the office carries, not the individual,” he says. But is it really respect or is it diffidence? Dushyant says, “The dignity of the office … is enhanced with greater questioning.”

The panel then discusses the 28 counts of criminal defamation filed by Anil Ambani against various news organisations. Dushyant weighs in with a legal perspective, describing how the provisions of the NSA stack the odds against the accused, and how defamation has historically been used as a tool to "intimidate and silence" journalists.

The conversation shifts to the 620-kilometre human wall formed by women in Kerela. Abhinandan notes that the effort was backed by the state to support the feminist struggle regarding entry of women of menstrual age into Sabarimala temple. Manisha candidly says the act, while commendable, didn’t really move her. She says this is not where “the heart of the feminist battle lies”. Dushyant adds that the act of conducting a shudhikaran after two women managed to enter the temple is unconstitutional.

Moving on to the BJP-Congress faceoff about making a rendition of Vande Mataram, Abhinandan says, “For any society to progress, there has to be an active opposition of defiance for such things.” The panel unanimously spoke against this, as well as the mandate that requires movie theatres to play the national anthem and viewers to stand in a perfunctory display of patriotism.

Another issue that sparked impassioned discussion from the panel was the leaked Rafale audio clip. They raised questions and expressed curiosity about the identity of the elusive “Mr X”—the journalist heard in conversation with Goa minister Vishwajit Rane. Abhinandan points out this oversight in the reportage of the issue on primetime news channels.

Tune in to NL Hafta to find out more!
Reporters+Without+Orders+Ep+49%3A+Bangladesh+polls%2C+Bhima+Koregaon%2C+Sabarimala+and+more
access_time20 days ago
This week’s Reporters without Orders features host Cherry Agarwal in conversation with Ayush Tiwari, Scroll staff writer Shoaib Daniyal, Newslaundry special correspondent Prateek Goyal, and Indian Express Digital correspondent from Kerala, Vishnu Verma. Conversations range from Triple Talaq to Sabarimala to Bhima Koregaon.

Ayush starts off by expressing his disapproval on the lack of coverage on the recent Transgender Persons Bill and its flaws. Shoaib talks about his dissatisfaction over the lack of coverage of Bangladesh's controversial polls which took place last week. The panel discusses the "quid pro quo" relationship between Sheikh Hasina and the Modi government.

The discussion moves to the Triple Talaq bill and its peculiar clauses. Shoaib says the Catch-22 is that “although 'talaq talaq talaq’ does not annul the marriage, it can put you in jail”. The panellists then analyse the motivations behind either side of the debate in relation to Muslim women vote banks and male victimisation. They discuss the historical developments within Muslim personal law and alimony regulations during the Shah Bano case.

Prateek joins in to discuss Bhima Koregaon. He commends the way the Maharashtra Police handled the large crowds to prevent violence. They banned certain activist groups and performers and placed countless cameras in an attempt to mitigate chaos and rioting. Prateek says he's fairly satisfied with the ample coverage of Bhima Koregaon this year.

Next, Vishnu reports on the latest developments at Sabarimala temple and how two women in their 40s entered it. Cherry asks if this incident will serve as an example for other women to break discriminatory pilgrimage rules.

For all this and more, listen up!
The+Awful+and+Awesome+Entertainment+Wrap+Ep+96%3A+Bandersnatch%2C+Bird+Box+and+more
access_time20 days ago
It's the first episode of 2019, and our hosts Abhinandan Sekhri and Rajyasree Sen discuss the Saudi Arabia-centric episode of Hasan Minhaj's Patriot Act, Netflix series Selection Day, and the Netflix special of Black Mirror's Bandersnatch, among other things.

Rajyasree recommends the controversial Saudi Arabia of Patriot Act for its wit and timing. Both hosts disapprove of Netflix pulling the episode down in Saudi Arabia after a complaint from authorities. “It is a shame because rather than more information reaching places that were behind and Iron Curtained, it seems that the Iron Curtain is extending to places that didn’t have one earlier,” says Abhinandan.

They talk about the Netflix series Selection Day, based on a book by the same name by Aravind Adiga. Rajyasree summarises the plot and says she recommends it because you could probably watch the entire thing in a single sitting. She does however think the story was somewhat underdeveloped.

Discussing the episode Bandersnatch from the Black Mirror series, Abhinandan is stridently against the concept, though Rajyasree found it entertaining. He says he doesn't endorse the episode's USP, which is the "cheap thrill" of being able to choose where the story goes. He says it seems to solely cater to video game fanatics, which is “a hell of a subset". He adds, "It was a lot of content consumption to cater to a gimmick.”

Next, the pair review the Netflix thriller Bird Box, which had a record viewership in the first week of its release. “Watch it for the gruesomeness,” says Rajyshree, "if you’re into that sort of thing." She says while she enjoyed the "graphic" cinematography, the film can be slightly unrealistic and tiresome with its overused dystopian-world, single-parent-protecting-the-children shindig.

Moving away from the Netflix universe, Abhinandan and Rajyasree discuss Rajeev Masand’s Actresses Roundtable 2018. They unanimously condemn Rani Mukherjee, saying she comes across as an under-informed, overly opinionated person who is self-aware of her superiority being “Aditya Chopra’s wife, so she rules the roost,” says Rajyasree.

Our hosts also talk about the recent passing of two artists: Kader Khan, whom Abhinandan calls “crass, but prolific” and praises him for being self-made, and filmmaker Mrinal Sen, of whose work Rajyasree has mixed views.

Tune in for more!
Why+did+Narayan+Chauhan+become+a+Naxal%3F
access_time21 days ago
In 1968, Narayan Singh Chauhan joined an uprising that was painting Indian jungles red. Joined by comrades from different parts of the country, he was there to fight feudal lords, emancipate the peasants and crush the state. In his three year-long involvement with the Naxalite insurgency, Chauhan was involved in multiple encounters and also admits to killing a revenue-collector.

Tune in to this snippet of Let's Talk About: Naxalism - Part 1 to listen to his story.

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access_time25 days ago
इस हफ्ते चर्चा का मुख्य विषय रहा नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी द्वारा 17 जगहों पर छापा मारकर आईएस के 10 कथित आतंकियों की गिरफ्तारी. इसके अलावा नोएडा के पार्क होने वाली जुमे की नमाज को लेकर पैदा हुआ विवाद, गृह मंत्रालय द्वारा 10 सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को किसी के भी कंप्यूटर डाटा निगरानी की अनुमति और पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों परिणाम के बाद आया नितिन गडगरी का बयान भी चर्चा में शामिल रहे. इसके बाद से अटकलें लगाई जा रही हैं कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में खटपट चल रही है.

इस बार की चर्चा में बतौर मेहमान हिदुस्तान टाइम्स के एसोसिएट एडिटर राजेश आहुजा शामिल हुए.  साथ ही न्यूज़लॉन्ड्री के असिस्टेंट एडिटर राहुल कोटियल भी चर्चा का हिस्सा रहे. हमेशा की तरह चर्चा का संचालन

न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल ने राजेश से सवाल किया, "एनआईए द्वारा की गई कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर जो सवाल खड़े हो रहे है कि चुनाव का मौसम आते ही इस तरीके की कार्रवाई खुफिया एजेंसियां करती हैं. आईएम से जुड़े मामलों में भी हमने देखा था कि युवकों को गिरफ्तारी भी होती है लेकिन कोर्ट में वो साबित नहीं हो पाती, क्या वास्तव  एनआईए और अन्य एजेंसीयां सरकार के इशारे पर काम करती है या उनकी कोई स्वायत्तता भी है?"

राजेश इसका जवाब देते हुए कहते है, “एनआईए के अधिकारियों ने बताया है कि इस पूरे मॉडयूल की चार महीने से निगरानी की जा रही थी. अधिकारी इनकी बातचीत पर नज़र रखे हुये थे, इनका एक हैंडलर भी था जिसने इन सब को उकसाया और एक ऐसा दस्ता बनाने को कहा. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है पिछले 3 सालों मे देश के अलग अलग हिस्सो में पहले भी ऐसे दर्जनों मामले सामने आए जो इस्लामिक स्टेट से प्रभावित थे. खुशकिस्मती से केवल मध्य प्रदेश ट्रेन ब्लास्ट के अलावा बाकी सभी बाकी सभी दस्ते कुछ कर पाते उससे पहले ही सुरक्षा एजेंसियों ने उनका भंडाफोड़ दिया. तो यह कहना सही नहीं होगा कि आगामी चुनावों के चलते एनआईए ने इस तरह की कार्रवाई कर रही है.”

मुद्दे को आगे बढ़ते हुए अतुल ने पूछा, "राजनाथ सिंह ने 2016 में जब आईएस का प्रकोप चरम पर था, तब एक बड़ा बयान दिया था कि आईएस भारत के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं है. तो क्या यह माना जाए कि 2 साल में स्थितियां बदल गई हैं?”

इस पर राजेश ने जवाब देते हुए कहा, "इसे हमें तुलनात्मक दृष्टिकोण से देखना होगा. भारत में लगभग 25 करोड़ मुसलमान हैं उनमें से सौ-सवा सौ लोग अगर भटक जाते है तो यह बहुत बड़ी संख्या नहीं है. दूसरी तरफ यूरोप में पांच हज़ार से ज्यादा लोग आईएस में शामिल हुए और वापस आकर बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया. भारत में ऐसे युवाओं को केवल गिरफ्तार किया गया बल्कि बहुत से ऐसे मामले भी थे जहां बच्चों को जाने से रोका गया, उनके परिवारों को काउंसलिंग दी गई. यहां तुलनात्मक रूप से संख्या बहुत कम है इसलिए आईएस को बहुत बड़ा खतरा नहीं माना गया.”

आगे राहुल को चर्चा में शामिल करते हुए अतुल ने सवाल किया, “सोशल मीडिया के अतिवाद के दौर में हर विषय को लेकर एक माहौल बना दिया जाता है. व्यक्तिगत रूप से हम तय कर पाने की स्थिति में नहीं होते कि क्या सही है क्या गलत है. क्योंकि अतीत ऐसा रहा है कि इंडियन मुजाहिद्दीन के नाम पर तमाम युवाओं को गिरफ्तार किया गया फिर कुछ भी साबित नहीं हो पाया है.”

इसका जवाब देते हुए राहुल ने कहा, “सुरक्षा एजेंसियों के दोनों तरह के रिकॉर्ड हमारे सामने हैं हम यह भी नहीं कह सकते कि एजेंसियां पॉलिटिकल टाइमिंग के हिसाब से काम करती हैं और दूसरी तरफ ऐसा भी नहीं है कि इनकी कार्यशैली इतनी मजबूत रही है कि इन पर आंख बंद करके भरोसा कर लिया जाय. जैसे मोहम्मद आमिर के मामले में हमने देखा कि जब वह जेल गया था, तब केवल 18 वर्ष का ही था और 18 वर्ष जेल में रहने के बाद वो निर्दोष साबित हुआ. उसकी लगभग सारी जिंदगी जेल में कट गई और उसके बाद हमारा सिस्टम ऐसे लोगों के पुनर्वास का कोई इंतजाम नहीं कर पाता. लेकिन सिर्फ टाइमिंग की वजह से एनआईए की कार्रवाई को नकारा नहीं जा सकता. क्योंकि यह बात सच है कि किसी भी तरह का चरमपंथ काम करता है और उसके अनेक उदाहरण हमने देखे हैं. कश्मीर की अगर हम बात करें तो 90 के दशक में वह क्षेत्रीय अस्मिता का सवाल हुआ करता था लेकिन आज वह क्षेत्रीय अस्मिता से ज्यादा धार्मिक कट्टरता का सवाल बन चुका है. कश्मीर में चरमपंथ बढ़ा है, इसे नकारा नहीं जा सकता.”
Chhota+Hafta%E2%80%94Episode+204
access_time26 days ago
NL Hafta has gone behind the paywall, but we love our listeners. So here's a little sneak peek into the complete episode.

In this week’s episode, South Asia editor of Asia Times, Saikat Datta joins the regular Hafta gang of Abhinandan Sekhri, Raman Kirpal, Manisha Pande and Anand Vardhan to discuss the home ministry authorising 10 central agencies to intercept information on computers, the misinformation surrounding it.

The discussion kicks off with Saikat explaining the home ministry order and his experience of examining the surveillance structure and the safeguards that are there. Is it possible to run an operation at such a huge level? The discussion then moves to the miners trapped inside a coalmine in Meghalaya and why it took so long for this to make it to the national news, the rescue operation and the politics around it. Saikat compares the situation of Meghalaya with the movie Kaala Patthar. The panel then moves on to discuss Mamta Banerjee not allowing BJP to carry out Rath Yatras in West Bengal.
Hafta+201%3A+State+elections%2C+Shaurya+Diwas%2C+the+Bulandshahr+violence+and+more
access_time26 days ago
In this week’s NL Hafta, Abhinandan Sekhri is joined by Meghnad, Raman Kirpal, and Manisha Pande. The panel also features Newslaundry reporters Amit Bhardwaj and Prateek Goyal who are covering the elections from Rajasthan and Madhya Pradesh respectively.

Amit gives us insight into the election rallies in Rajasthan that are being dominated by PM Narendra Modi and Yogi Adityanath instead of Vasundhara Raje. He says yes when Abhinandan asks whether a reporter gets new insight when on the ground. He adds that people would assume that the fight in the state is between the BJP and the Congress but in as many as 20 seats, the BSP dominates the other two parties.

Prateek shares his experience from Madhya Pradesh. He says the people in the state would vote for the BJP despite their dissatisfaction with the Shivraj Singh Chouhan-led government.

Moving on, the panel discusses the anniversary of the Babri Masjid demolition, which Right-wing groups popularly call "Shaurya Diwas". Abhinandan says that unlike countries like Germany, people fail to acknowledge the immorality of the violence that followed the events of December 6, 26 years ago. He adds that as a society, we are a couple of decades behind. Raman talks about his reporting experience during the demolition. He says, “They pulled down this decades-old structure despite Advani making a feeble attempt there, leading, trying to stop them from bringing down the structure. Whereas other leaders were happy about it. And it was an illegal act. And some people got injured and this led to riots. So how can you celebrate it?”

The panel also discusses the violence in Bulandshahr where a policeman was allegedly killed by cow vigilantes. They discussed how the media covered the event, especially TV channels during primetime. Pointing out the absurdity in the investigation, Meghnad says, “The weird part of all of this is going into the specifics of which meat was it, was it on the transformer or whether it was in the fridge. But in this whole scenario, a very vital element of this is lost: that a person lost their life for a stupid reason.” Manisha remarks that all this is because of bad investigation and bad reporting.

Listen up! There's more.
The+Awful+and+Awesome+Entertainment+Wrap+Ep+95%3A+Relatable%2C+Thackeray+and+more
access_time26 days ago
This week’s episode brings you an action-packed discussion with our hosts Abhinandan Sekhri and Rajyasree Sen on Relatable, season 2 of Making A Murderer, Spider-Man: Into the Spider-Verse, Kareena Kapoor’s What Women Want, Honey Singh’s Makhna, the trailer of Thackeray and three commercials.

Rajyasree and Abhinandan start by exchanging views on Ellen DeGeneres’s Relatable and how she’s hitting hard on the social stereotype against lesbians. They talk about the payment of $20 million Ellen received for the 68-minute show. Moving on, they discuss the Netflix series Making A Murderer Season 2, written and directed by Laura Ricciardi and Moira Demos. They discuss the American phenomenon of making celebrities out of criminals, to which Rajyasree says, “Although in America, I feel they are a little off, so they don’t have much happening in their own lives. So they get sucked into these kind of things.”

The discussion moves on to Kareena Kapoor Khan’s radio show What Women Want on Ishq: 104.8, which is also a video show. They talk about how, unlike a radio show, the show sounds scripted. Abhinandan adds, “Radio is only compelling because it’s a conversation that’s unfiltered and unrehearsed. That’s what makes good talk radio”.

Abhinandan and Rajyasree then discuss the trailer of the upcoming movie Thackeray, directed by Abhijit Panse. Abhinandan expresses his curiosity, saying, “The good thing about such films is that now there will be filmmakers getting into political commentary through their cinema. Which is fantastic! And then you’ll have a counter-narrative.”

This and more, so listen up!
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access_time1 month ago
एनएल चर्चा अपने 50वें अध्याय पर पहुंच गई. इस लिहाज से इस बार की चर्चा बेहद ख़ास रहीं. 50वीं चर्चा को हमने न्यूज़लॉन्ड्री के यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारित किया.

इस बार की चर्चा का मुख्य विषय रहा 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को हुई उम्रकैद की सज़ा. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट द्वारा राफेल डील के मामले में हुए कथित घोटाले के आरोपों से जुड़ी सारी याचिकाओं को ख़ारिज करना, दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु के नेता एमके स्टालिन द्वारा राहुल गांधी को अगला प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की घोषणा और साथ ही फ्रांस में बीते डेढ़ महीने से चल रहे यलो वेस्ट आंदोलन पर हमारी चर्चा केंद्रित रही.

इस बार की चर्चा में बतौर मेहमान द वायर की सीनियर एडिटर आरफा खानम शेरवानी हमारे साथ जुड़ी साथ ही साथ न्यूज़लॉन्ड्री के ओपिनियन राइटर व स्तंभकार आनंद वर्धन भी इस चर्चा का हिस्सा रहे. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री के असिस्टेंट एडिटर राहुल कोटियाल भी चर्चा में शामल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.
Chhota+Hafta%E2%80%94Episode+203
access_time1 month ago
NL Hafta has gone behind the paywall, but we love our listeners. So here's a little sneak peek into the complete episode.

In this week’s podcast, our regular Hafta gang of Abhinandan Sekhri, Madhu Trehan, Manisha Pande and Raman Kirpal are joined by Newslaundry subscriber Anushka Shah who is a researcher with MIT Media Lab.

The podcast kicks off with a discussion on the anti-Sikh riots of 1984 after Indira Gandhi’s assassination. The team talks about how even today, media coverage of communal riots has been limited to political whataboutery where journalists only cover how a political party accuses the other. They talk about the Delhi High Court’s judgement convicting Congress politician Sajjan Kumar for his role in the riots.

Talking about political parties offering farm loan waivers to please voters, Manisha says loan waivers are only a short-term solution and we need to look at the root causes of farmer distress. The panel also discusses the recent court ruling on the Rafale deal and Rajiv Gandhi's role in the 1984 anti-Sikh riots.

Listen to the full episode here: https://www.newslaundry.com/2018/12/21/hafta-203-sajjan-kumar-1984-anti-sikh-riots-farm-loan-waivers-rafael-deal-and-more
Hafta+200%3A+Kisan+Rally%2C+Gotra+Politics%2C+Kartarpur+Corridor+and+more
access_time1 month ago
Celebrating the 200th episode of Hafta, we recorded the episode live in the presence of our subscribers, at Anti Social in Delhi's Hauz Khas.

For this special episode, journalist and writer Manu Joseph joins our regular Hafta gang of Abhinandan Sekhri, Madhu Trehan, Manisha Pande, and Anand Vardhan.

Kicking off the event, Abhinandan talks about the history of NL Hafta and how it has evolved over time. The podcast then moves on to discuss all the news that happened this week, from the Kisan rally in Delhi to the debate over Rahul Gandhi’s gotra, and much more.

The Hafta gang begins by discussing which news model is better, one that is advertisement-driven or one that is driven purely by subscribers. The panel deliberates on the pros and cons of both these models.

Talking about the problems faced by the advertising model, Manu says: “Advertising is not a flawed model, the human being in itself is a flawed model.” Madhu goes on to say that the subscription model is a huge challenge primarily because the audience only wants to consume information that they agree with.

Moving on, the panel discusses the recent debate around Rahul Gandhi's gotra and how relevant is it in today’s politics. Manu talks about the strong bond between one’s caste and one’s identity. Quoting P. Sainath, he says: “If you don’t know your caste you are probably upper caste.”

Manu and the Hafta gang also talk about novels being made into TV series and movies, and to what extent does this transition do justice to its original form. To this, Anand Vardhan points out that novels are unique in their ability to depict the thoughts of its characters, and this is where the visual medium fails. Manu, on the other hand, feels that novels fail on their part to show life realistically.

While taking questions from our subscribers, the panel answers some interesting ones on the economics of the Right-wing governments, weak and strong leaders and much more. On the question of citizen journalism, Manisha says that user-generated content is not favourable since news requires “a certain professional experience”.

Towards the end, the panel talks about the recent development in Indo-Pak relations after the recent inaugural for construction of Kartarpur corridor and the outpour of different political reactions. Manu, Abhinandan and Madhu share their conflicting experiences in Pakistan. The panel also shares their opinion on resolving Indo-Pak conflict.

Tune in to listen to all this and more.
Reporters+Without+Orders+Ep+48%3A+BJP%E2%80%99s+Rath+Yatra%2C+MP+and+Rajasthan+elections%2C+and+more
access_time1 month ago
This week's Reporters Without Orders features our host Amit Bhardwaj with Rahul Kotiyal, special correspondent Prateek Goyal and Snigdhendu Bhattacharya from Hindustan Times.

Amit starts the podcast by asking Snigdhendu about the Bharatiya Janata Party’s Rath Yatra in Kolkata, which was supposed to be hosted on December 7 but was blocked by the Trinamool Congress. They discuss how the whole thing was rebranded from a Rath Yatra to a "Save Democracy" programme.

The panel moves on to the rumours surrounding Varun Gandhi leaving the BJP and joining the Congress and news reports constantly feed these rumours. Rahul adds: “In the Congress, the sky is the limit for Varun Gandhi and he’ll be a threat to Rahul Gandhi if he joins.”

Amit talks about Kamal Nath becoming the chief minister of Madhya Pradesh and his race for the position with Digvijaya Singh and a member of his own party, Jyotiraditya Scindia. The panel also talks about the cut-throat competition between the two parties and how the BJP's anti-incumbency factor played out in the state. Rahul notes: “The BJP’s strategy is to praise the Modi-Shah duo and blame it on local leaders if they lose elections.”

Next, they discuss the reason behind strong win of the Congress in Rajasthan, and where Vasundhara Raje failed and Sachin Pilot succeeded. Amit says the unemployment factor amongst the youth and the farmer crisis contributed. Prateek quotes people of Rajasthan saying, “Modi tujhse bair nahi, Vasundhra teri khair nahi” which the Congress claims was given by the RSS while the BJP blames the Congress. Nevertheless, the slogan claims that Narendra Modi still has a certain hold in Rajasthan, but Amit says Modi's charm has diminished as “voters of Modi are in a toxic relationship which you know is not working out, but you just don’t want to quit it”.

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The+Awful+and+Awesome+Entertainment+Wrap+Ep+94%3A+Roma%2C+Detour%2C+The+Innocent+Man%2C+Brexit+and+more
access_time1 month ago
This week’s episode of Awful and Awesome brings you an action-packed discussion with our hosts Abhinandan Sekhri and Rajyasree Sen on the short film Detour, the new Brexit trailer, Alfonso Cuarón’s Roma and two commercials.

Rajyasree and Abhinandan start the podcast with the semi-autobiographical film Roma, written, directed and produced by Alfonso Cuarón. Rajyasree notes that the movie is set in 1971 Mexico and tells the story of characters that are usually ignored by cinema and society. Appreciating the director’s work, Abhinandan says, "There are two things that make cinema survive—the stars and the craftsmen who crafts cinema", and Cuarón is one of those craftsmen who’s keeping it alive. Rayasree believes Roma is all set to win an Oscar.

The discussions moves to a Netflix documentary, The Innocent Man, based John Grisham’s book—which Rajyasree notes is Grisham's only non-fiction book—and how the movie portrays the criminal justice system in America in relation to sending people to jail. They then talk about the trailer of the upcoming HBO film Brexit starring Benedict Cumberbatch. Cumberbatch plays Dominic Cummings, the man known to be the architect of Brexit, and how he used social media to bring out the most unlikely outcome. Abhinandan expresses his excitement for the movie but also says, “In the interest of making a compelling narrative, writers and podcast makers are overstating what social media interventions do.”

Moving on, Abhinandan and Rajyasree talk about the new Baggit commercial starring Shraddha Kapoor where she promotes the hashtag #PutItOnTheTable. They think it doesn’t resemble a feminist campaign. Abhinandan says, “If this is what a feminism campaign looks like, then good luck, feminism.”

Tune in to listen to more.
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access_time1 month ago
इस बार की चर्चा का केंद्र पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में आए नतीजे रहे. इसके आलावा आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल का समय से पहले अपने पद से इस्तीफा देना, नए गवर्नर के रूप में शक्तिकांता दास का पद संभालना, रफेल विमान सौदे पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आदि विषय इस बार की चर्चा के मुख्य बिंदु रहे.

इस बार की चर्चा में बतौर मेहमान न्यूज़ 24 चैनल की पत्रकार साक्षी जोशी और वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी शामिल हुए. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री के असिस्टेंट एडिटर राहुल कोटियाल भी चर्चा का हिस्सा रहे. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

चर्चा की शुरुआत अतुल चौरसिया ने पांच राज्यों के विधानसभा के चुनावी नतीजों से की. उन्होंने पैनल के सामने एक सवाल रखा, “जिस रूप में भाजपा पिछले 4-5 सालों में बदली है, हमने देखा कि हर विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद नरेंद्र मोदी दिल्ली की सड़कों पर विजय परेड निकालते थे. उस दौरान मोदी जो भाषण देते थे उसमें एक विचित्र सी साम्यता दिखाई देती थी. वो अमित शाह को जीत का पूरा श्रेय देते थे बजाय पूरी पार्टी और उसके संगठन के. ये एक अलग तरीके की रणनीति दोनों नेताओं के बीच में विकसित हुई थी. अब इस हार से क्या उस जुगलजोड़ी के ऊपर किसी तरह का दबाव बढ़ा है?”

इसके जवाब में हर्षवर्धन त्रिपाठी ने कहा, “जब हम माध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान के चुनावी नतीजों की बात करते हैं तो इससे पहले के भारतीय जनता पार्टी के जितने भी चुनाव हैं उसकी स्थिति में और इसमें एक बड़ा बेसिक सा अंतर है. फर्क ये हैं की ये वो 3 राज्य हैं जहां की मुख्यमंत्रियों को समय-समय पर नरेंद्र मोदी के कद का नेता समझा जाता रहा. यहां तक की अगर आप लोगों ने ध्यान दिया हो तो 2013 -14 के दौरान कई बार चर्चा चली कि शिवराज सिंह चौहान भी प्रधानमंत्री पद के एक ताकतवर दावेदार हैं.”

हर्षवर्धन आगे कहते हैं, “पर शायद ऐसा नहीं हो सका. मैं ये नहीं मानता कि अमित शाह और नरेंद्र मोदी ने इन चुनावों में उस तरह से अपनी भूमिका नहीं निभाई जैसे बाकी राज्यों में करते थे. उसके बावजूद वे चुनाव हारे. मेरा मानना है कि मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ से बहुत अच्छा सन्देश है कि एक अरसे के बाद मतलब मुझे नहीं याद है की कब इस तरह से कोई चुनाव पूरी तरह स्थानीय मुद्दों पर लड़ा गया. राजस्थान एक बहुत बुरा चुनावी कैंपेन रहा. वहां कोई जमीनी मुद्दा नहीं था. विपक्ष के अभियान का एकमात्र मुद्दा था वसुंधरा अहंकारी हैं. यानी सब हवा हवाई मुद्दे थे.”

नतीजों पर हो रही बहस का दूसरा पहलू था राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को मिली चमत्कारिक सफलता. क्या इससे राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता स्थापित हो गई है या फिर इसे सिर्फ तुक्के में मिली जीत और एंटी इंकंबेंसी का नतीजा मानकर खारिज किया जा सकता है? साक्षी जोशी इस पर हस्तक्षेप करती हैं, “राहुल गांधी एक परिपक्व नेता के तौर पर साल भर पहले ही स्थापित हो गए थे. गुजरात चुनावों के दौरान उन्होंने जिस तरह से चुनाव अभियान की कमान संभाली वह ध्यान देने लायक है. उन्होंने. उन्होंने बार-बार एक बात कही कि आप (भाजपा के लोग) मुझे पप्पू कहते हैं. आप मुझे चाहे जो भी कहें लेकिन मेरे सवालों का जवाब जरूर दें. वो सवाल बहुत जरूरी हैं. तो जिस तरह से उन्होंने मुद्दों को पकड़े रखा और विपक्ष के उकसावे में बिना फंसे अपना अभियान चलाया वह उनकी क्षमता को साबित करता है.”

राहुल कोटियाल ने इसके एक और पहलू पर रोशनी डाली, “राहुल गांधी की जो छवि साल भर पहले थी, ऐसा नहीं है कि उन्होंने उसमें कोई बड़ा बदलाव किया है. इन 3-4 सालों में मोदी की अपनी असफलताओं का इन नतीजों में भूमिका ज्यादा है. जिस तरह से उन्होंने अपनी छवि बनाई थी कि वो सबकुछ हल कर देंगे और बाद में जिस तरह से विधवा के संबंध में उनके अटपटे बयान आए, जिस तरह से प्रधानमंत्री की बातों को संसद की कार्यवाही से हटाना पड़ा, उन सबने मिलकर मोदी के लिए एक नकारात्मक माहौल बनाना शुरू कर दिया है.”

राफेल डील और उर्जित पटेल के इस्तीफे पर भी दिलचस्प सवाल और निष्कर्ष के साथ साक्षी जोशी और राहुल कोटियाल ने इस चर्चा में हस्तक्षेप किया. हर्षवर्धन जी ने भी कुछ जरूरी, ज़मीनी जानकारियां साझा की. उनका पूरा जवाब और अन्य विषयों पर पैनल की विस्तृत राय जानने के लिए पूरी चर्चा सुने.
Hafta+199%3A+CBI+leak%2C+%23SmashBrahminicalPatriarchy%2C+John+Allen+Chau+%26+more
access_time1 month ago
In this episode of Hafta, we have Shipra Garg, our subscriber from the United States, and Meghnad joining our in-house panel of Abhinandan Sekhri, Manisha Pande, and Raman Kirpal to discuss news that made headlines this week.

Abhinandan begins the podcast by discussing the recent CBI 'leak'. The panel discusses the role of media in covering a crisis that involves the country’s central investigation agency. They also touch upon CJI Ranjan Gogoi’s statement: “You don’t deserve a hearing.”

The panel then talks about the outrage against Twitter CEO Jack Dorsey, after a picture of him holding a poster reading ‘Smash Brahminical Patriarchy’ was circulated. Manisha discusses television debates and hashtags like #BoycottTwitter that followed. Shipra adds how this news has also erupted in the US where channels are reporting that “Hindus in India are angry with Jack Dorsey”.

Moving on, the panel talks about the death of American citizen John Allen Chau, who was killed by Sentinelese tribe in the Andaman and Nicobar Islands. Meghnad says “[It’s the] arrogance of the civilised man that is at play [when they say] that our way of living is the best and others who are not doing it like that are somehow doing it wrong.” Abhinandan disagrees, he argues that since some customs of these aboriginal tribes are primitive it’s desirable that they should be integrated into modern society.

Hear the panel discuss the dissolution of Jammu & Kashmir Assembly where decisions were made on Twitter rather than Assembly floor. Raman sums up the situation saying, “It is only in this government that the fax machine stops working, or the ink is changed or the EVM machines don’t function properly.”

Listen to all this and more!
Chota+Hafta+%E2%80%94+Episode+202
access_time1 month ago
NL Hafta has gone behind the paywall, but we love our listeners. So, here's a little sneak peek into the complete episode. In this episode of NL Hafta 202, the regular Hafta gang of Manisha Pande, Abhinandan Sekhri, and Anand Vardhan is joined by Saurabh Dwivedi, founder-editor of Lallantop.

Saurabh, who travelled for a month in Chhattisgarh, Madhya Pradesh and Rajasthan in the run-up to the elections, has some great insights to share. The team discusses the reasons for Congress’ victory in the Hindi heartland and whether it will have any bearing on the 2019 general election.

Saurabh explains how PM Modi failed as a communicator in Chhattisgarh and why his speeches didn’t click with the masses.

Anand tells us why political analysis as we see in news media is overrated. Abhinandan says the Assembly results were not Rahul Gandhi’s Pappu-pass-ho-gaya moment, but more a failure of the BJP government.

The Hafta gang also discusses the resignation of RBI chief Urjit Patel and his successor Shaktikanta Das. Abhinandan says: " the way everyone is dismissing him on his degree, I disagree with that I will not diss him on that."

Finally, the team discusses the Ambani wedding.
Chhota+Hafta+%E2%80%94+Episode+201
access_time2 months ago
NL Hafta has gone behind the paywall, but we love our listeners. So here's a little sneak peek into the complete episode.

This week, Abhinandan Sekhri is joined by Meghnad, Raman Kirpal, and Manisha Pande. The panel also features Newslaundry reporters Amit Bhardwaj and Prateek Goyal who are covering the elections from Rajasthan and Madhya Pradesh respectively.

Amit gives us insight into the election rallies in Rajasthan that are being dominated by PM Narendra Modi and Yogi Adityanath instead of Vasundhara Raje. Prateek shares his experience from Madhya Pradesh, saying people in the state would vote for the BJP despite their dissatisfaction with the Shivraj Singh Chouhan-led government. The panel discusses the anniversary of the Babri Masjid demolition and the recent violence in Bulandshahr which led to a policeman being killed. They also looked at how the media, especially television channels, covered the incident.

Listen to the full episode here.
Hafta+198%3A+%23MeTooIndia%2C+CNN+vs+The+White+House+and+more
access_time2 months ago
In this week’s episode, Supreme Court lawyer Mihira Sood joins our in-house panel of Madhu Trehan, Raman Kirpal, and Manisha Pande. The gang goes on to discuss topics like sexual harassment laws in India, the cancellation of singer TM Krishna’s concert in Delhi, and CNN’s lawsuit against the Trump administration.
Giving us an overview of the shortcomings of sexual harassment laws in India, Mihira, who is currently researching the feminist movement, gives us some insight. The panel goes on to dig into the ever-increasing trend of “performative feminism” wherein media houses carry stories without any proper journalistic inquiry. Raman calls such stories “the easiest stories to report”.

Talking more about the propagandist tendencies of media, Madhu mentions why the current government deserves to get the “Best Media Management” award. The panel further talks about the NDA-friendly media as well as the UPA-friendly media.

Moving on, this week’s Hafta crew discusses the recent cancellation of Carnatic singer TM Krishna’s concert in the capital which was being organised by AAI and SPIC MACAY. They also talk about the controversy unfolding in the United States wherein CNN filed a suit against the Trump administration when the organisation’s journalist Jim Acosta was discredited from accessing the White House.

Tune into all this and much more!
The+Awful+and+Awesome+Entertainment+Wrap+Ep+93%3A+%27Bad+Sex%E2%80%99+Award%2C+Simmba%2C+Rogan+Josh+and+more
access_time2 months ago
This episode of The Awful and Awesome brings you an action-packed week with our hosts—Abhinandan Sekhri and Rajyasree Sen—both of whom discuss everything from a political documentary to a very strange award category.

The duo begins by talking about the "Bad Sex award" which is awarded by Literary Review to "an author who has produced an outstandingly bad sexual description in an otherwise good novel". Rajyasree says Japanese author Haruki Murakami also made it to this year’s list, while Abhinandan adds that an Indian author called Anirudh Behl was also part of the same list in 2003.

Moving on, they talk about something that’s even more ridiculous in a pop-culture context: the trailer of Rohit Shetty's Simmba, which is a sequel to the Ajay Devgan-starrer Singham. Rajyasree says the trailer does not have a cliffhanger and instead gives away the entire plot. "We should warn you, if any of you go watch the film, then you should be ashamed of yourself,” adds Abhinandan.

The hosts then talk about a short film starring Naseeruddin Shah called Rogan Josh, which also features Avantika Akerkar and Shishir Sharma. The duo discusses how this film—which commemorates the anniversary of the terror attacks in Mumbai—is conceptually strong. Both of them agree that the problem of the film is a universal problem in Hindi films, i.e. they over-explain.

The discussion then moves towards a political documentary, Fahrenheit 11/9, directed by Michael Moore. Rajyasree says though the film is primarily about American president Donald Trump, it's also about the Flint water crisis, Michael Moore’s connection to Steve Bannon and Jared Kushner, the Parkland school shooting, Obama, Hillary Clinton and more. This overload of information is what is the problem with the film, according to her. “The film, which is about everything, becomes a film about nothing,” she points out.

The anchors conclude by talking about Priyanka Chopra’s wedding. Rajyasree says it's ironic that "three truckloads of firecrackers" had been burst at her wedding, even though Chopra endorses an ad that is about asthma. Talking further on Indian weddings, Abhinandan says, “Indian weddings have become an excuse for people who could never make it to showbiz. Aaj mauka mila hai, captive audience mili hai, aaj main nach kar dikhaunga, chahe nachna aata ho ya na aata ho.”

Tune in to find out more!
Reporters+Without+Orders+Ep+47%3A+Kisan+Mukti+March%2C+the+agrarian+crisis+%26+more
access_time2 months ago
This week's Reporters Without Orders features our host Cherry Agarwal along with in-house writer, Gaurav Sarkar. Today, we have three guests joining us on the panel: Mumbai-based Parth MN, Haryana-based Jyoti Yadav, and DNA’s Amrita Madhukalya.

This episode focuses primarily on the agrarian crisis—including the Kisan Mukti March which took place in Delhi on November 29 and 30.

The podcast kicks off with the panel sharing their experiences of interacting with farmers at the rally. Parth talks about how the presence of Opposition leaders in the rally was favourable for the farmer’s movement. “They (farmers) can use the platform to hold the establishment accountable. It is all about holding the establishment accountable. And if and when they come to power, as media we can hold them accountable for the speeches they have made at the rally,” he adds. Jyoti agrees and says that it is crucial to politicise the issue as it makes the issue mainstream.

The conversation then moves on to discuss how the media covered the Kisan Mukti March. Parth points out that though this particular rally was covered well by the media, the media has also been largely ignorant of the agrarian crisis that is at large and that has been affecting almost the entire rural economy. “(The) spurts in farmers’ suicide happened largely after a drought, hailstorm or a natural calamity,” he said. “This is usually last straw on a camel’s back. But why the farmer was sitting on the brink is something that we do not explore.”

Talking about how the rally was covered by the Hindi media, Jyoti says its time they stop romanticising the farm crisis and instead focus on talking about the actual issue as it is. She feels that the pieces being churned out by various publications should be written as reports and not as literary articles.

Gaurav draws a comparison between the first farmer’s march in Mumbai and the one that took place recently in Delhi. He points out that while political leaders were not allowed to make speeches at Mumbai’s Azad Maidan, in Delhi, they were not only encouraged, but also expected to do so.

The discussion then moves to how newsrooms were not very well prepared for the massive rally in Mumbai. Cherry points out that this shows the shortcoming of newsrooms. Amruta adds: “Newsrooms also need to invest in a sustained coverage of farmer crisis. Newsrooms need to take into account that this is going to be the biggest political conversation in the 2019 Elections.”

Summing up the discussion, Parth points out: “We need to ensure that the farming crisis becomes a part of our discourse and our daily conversations. Long story short—we should not be reminded of a farmer’s struggle only when they die.”

For all this and more, listen up!
Hafta+197%3A+Air+pollution%2C+Trump%E2%80%99s+press+conference%2C+the+killing+of+Avni%2C+and+more
access_time2 months ago
NL Hafta is back with a bang with our in-house panel comprising Abhinandan Sekhri, Manisha Pande, Anand Vardhan and Madhu Trehan. The panel discusses a variety of topics ranging from air pollution and firecrackers in Delhi to Sabarimala protests in Kerala, Trump’s press conference in the White House to Arnab Goswami being appointed a member of the Nehru Memorial Museum & Library in Lutyens’ Delhi.

The discussion starts off with Madhu weighing in on the Supreme Court verdict allowing entry to Sabarimala for women of all ages. She questions the ruling BJP for not supporting the verdict of the Supreme Court.

The Hafta gang then discusses the various angles of the firecracker ban in India in relation to the air pollution which has been hitting the saturation point, and how the people of Delhi flouted the Supreme Court order on the eve of Diwali, helping Delhi’s AQI levels go through the roof. The discussion then moves on to US President Donald Trump’s chaotic post-midterms press conference which took up plenty of space on social media, and how in India, Prime Minister Narendra Modi hasn’t done even a single press conference since he took office.

The conversation then proceeds to the installation of the Museum on Prime Ministers of India, and the gang discusses the validity of such an institution in India. They talk about the killing of Avni, the "man-eater" tigress from Yavatmal district in Maharashtra. The panel brings in contrasting views about the concept of "human versus animal" in connection with the issue. The discussion also steers its way to the recent developments in the Ram Temple issue in Ayodhya.

This and more in the latest episode of NL Hafta!
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access_time2 months ago
इस बार की चर्चा का केंद्र रहा दिल्ली के रामलीला मैदान में देश भर से इकट्ठा हुए किसान और उनका संसद मार्च. इसके अलावा अयोध्या और बनारस में राम मंदिर निर्माण पर दो अलग-अलग संतों के आयोजन हुए, साथ ही साथ राजस्थान चुनाव में कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री पर व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप का मुद्दा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भगवान हनुमान को दलित समुदाय का बताने से मचे विवाद आदि विषय इस बार की चर्चा के मुख्य बिंदु रहे.

इस बार की चर्चा में बतौर मेहमान शामिल हुए मीडिया विजिल वेबसाइट के संस्थापक सदस्य और पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री के असिस्टेंट एडिटर राहुल कोटियाल भी चर्चा में शामिल रहे. न्यूज़लॉन्ड्री के विशेष संवाददाता अमित भारद्वाज इस समय राजस्थान चुनाव की कवरेज कर रहे हैं. वो हमसे फोन पर जुड़े. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

चर्चा की शुरुआत अतुल चौरसिया ने न्यूज़लॉन्ड्री के विशेष संवादाता अमित भारद्वाज के सामने एक सवाल रखकर की, “अमित हम देखते आ रहे हैं कि गुजरात के बाद राजस्थान का एक हिस्सा पिछले 3-4 सालों में हिंदुत्व की प्रयोगशाला के तौर पर उभरा है. अलवर के इलाकों में समय-समय पर गौरक्षकों का आतंक दिखा. अलवर के इलाके में कई मॉब लिंचिंग की घटनाएं देखने को मिली. क्या इन घटनाओं का असर राजस्थान के चुनाव पर दिख रहा हैं?”

अमित ने कहा, “मैंने अपने कवरेज की शुरुआत राजस्थान के अलवर और भरतपुर इलाके से की थी. अलवर में विधानसभा की 11 सीटें है और भरतपुर में 7. अलवर इलाके में उग्र हिंदुत्व के कारण एक डिवाइड दिख रहा है. आप अगर मुस्लिम वोटर्स के पास जाएंगे तो उनकी एक अलग प्रतिक्रिया है और अगर आप हिन्दू वोटर के पास जाएंगे तो उनकी एक अलग प्रतिक्रिया है. यह कहीं ना नहीं पिछले कुछ सालों में हुई घटनाओं के कारण है. चाहे वो मॉब लिंचिंग हो या गौरक्षा हो. तमाम जो हिंदूवादी सांगठनों ने जो गतिविधियां की हैं, उनका असर इस चुनाव में साफ़-साफ़ दिख रहा है. इस इलाके में जब हमने कुछ लोगों से बात की तो पाया कि भाजपा को एक बढ़त है, हालांकि बहुतायत में युवा मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से खुश नहीं है. वहां युवा नारा लगा रहे थे- मोदी तुझसे बैर नहीं, वसुंधरा तेरी खैर नहीं.”

वो आगे कहते हैं, “एक चीज़ और है जो व्हाट्स ऐप के जरिएए फैलाया जा रहा है. एक सीट है रामगढ़, जहां पर रकबर खान की हत्या हुए थी. उस सीट पर कांग्रेस की प्रत्याशी है सफिया खान उनका एक वीडियो वायरल किया गया, जिसमें वो बयान दे रही हैं कि हर हालत में चुनाव जीतना है चाहें कुछ भी करना पड़े. उस वीडियो को हिंदूवादी संगठन के लोग खूब फैला रहे हैं. तो भाजपा की कोशिश डिवाइड के ऊपर चुनाव लड़ने की दिखती है.”

यहां पर अतुल ने बात आगे ले जाते हुए कहा, “अमित, मैं यह समझना चाह रहा था की क्या पूरे राज्य में किसी तरह की हवा किसी पार्टी के पक्ष में बह रही है? मसलन हमने देखा है कि 2014 के जो लोकसभा चुनाव या फिर बंगाल के विधानसभा चुनाव ऐसे थे जहां साफ तौर पर एक हवा दिख रही थी. भविष्यवाणी करना आसान था. क्या इस तरह की ऐसी कुछ एंटी इंकम्बेंसी वेव राजस्थान में महसूस हो रही है?”

इस पर अमित का जवाब आया, “राजस्थान में बड़ा इंट्रेस्टिंग ट्रेंड है. अगर आप राजस्थान का इतिहास देखे तो जो पार्टी प्रचंड बहुमत से सरकार बनाती है अगले चुनाव में बड़े ही शर्मनाक तरीके से हार जाती हैं. जैसे अशोक गेहलोत की सरकार जब हारी तो 25 सीटों पर सिमट के रह गई. उससे पहले भैरों सिंह शेखावत के साथ ऐसा हुआ हैं. इस बार लोग लगातार कह रहे हैं कि टक्कर कांटे की है.”

अमित ने बताया, “जब प्रधानमंत्री ने भरतपुर में सभा की तो वहां से कुछ लोग प्रधानमंत्री के भाषण के बीच से ही जाना शुरू हो गए. हालांकि यह संख्या कम थी. लोग खुल कर बोल रहे थे की प्रधानमंत्री हमारे मुद्दों पर बात ही नहीं कर रहे हैं, इसलिए हम जा रहे हैं. ऐसी स्थिति में आप कंफ्यूज हो जाते हैं की जनता असल में करने क्या वाली हैं.”

राजस्थान के चुनाव में तीसरे मोर्चे की भूमिका और कई अन्य दिलचस्प सवाल और निष्कर्ष के साथ अभिषेक श्रीवास्तव और राहुल कोटियाल ने इस चर्चा में हस्तक्षेप किया. अमित ने भी कुछ जरूरी, ज़मीनी जानकारियां राजस्थान से साझा की. उनका पूरा जवाब और अन्य विषयों पर पैनल की विस्तृत राय जानने के लिए पूरी चर्चा सुने .
Chhota+Hafta+%E2%80%94+Episode+200
access_time2 months ago
NL Hafta has gone behind the paywall, but since we love our listeners, here's a little sneak peek into the latest episode.

This week, we commemorated the 200th episode of Hafta, which we recorded live in the presence of our subscribers at Anti Social in Delhi's Hauz Khas. On this special occasion, the regular Hafta gang of Abhinandan Sekhri, Madhu Trehan, Manisha Pande and Anand Vardhan was joined by journalist and writer Manu Joseph.

Abhinandan kicked off the event by talking about the history of NL Hafta and how it has evolved over time. The panel then moves on to discuss all the things that made news this week, from the Kisan Rally in Delhi to the debate over Rahul Gandhi's gotra.

Listen to the full episode here: https://www.newslaundry.com/2018/12/01/nl-hafta-kisan-rally-gotra-politics-kartarpur-corridor
The+Awful+and+Awesome+Entertainment+Wrap+Ep+92%3A+the+Manyavar+ad%2C+Mirzapur+and+more
access_time2 months ago
After a hiatus of two weeks, hosts Rajyasree Sen and Abhinandan Sekri are back with an episode packed with opinions on several advertisements both from India and around the world, a web series and a film trailer.

The duo starts with a discussion on popular advertisements in the Indian media including the Manyavar advertisement, which has Virat Kohli and Anushka Sharma engaging in "playful banter". Rajyasree comments: “If you plan on having a romantic relationship with anyone or any sort of relationship built on some meeting of the minds: don’t talk like this to each other. It’s the end of that relationship, for sure!”

The discussion moves on to the new Swiggy ad which centres on our tendency to not address people in the service industry by their names. Talking about the conceptualisation and production quality of Indian advertisements, Abhinandan says, “I am amazed at the level of creativity of Indian advertisements. (I think) They are second only to the US or even at par with the US.” They also talk about Dolce & Gabbana’s ad which offended many people in China. Both Rajyasree and Abhinandan agree this advertisement can reduce Dolce & Gabbana's brand value.

Rajyasree then takes the discussion forward with Amazon Prime’s new show Mirzapur, which is produced by Farhan Akhtar and Ritesh Sidhwani and stars Pankaj Tripathi, Rasika Dugal, Kulbhushan Kharbanda, Vikrant Massey and more. She says it’s a well-made show with many characters and dynamics at play. But at the same time, she's disappointed with how the show ends. “I think they get dynamics of the way relationships play out, the different kinds of romantic relationships you can have, the way we hear about it a lot but hopefully we don’t experience it in our milieu. A father-in-law wanting to sleep with his daughter-in-law, the wife not getting sexually satisfied by her husband sleeps with the cook. So there are all sorts of things happening,” she adds.

Towards the end of podcast, they talk about the teaser of Disney’s upcoming film The Lion King and the trend of remaking films that is being followed both in India and abroad. They discuss how producers are willing to put money into stories and scripts that have worked in the past. Abhinandan says, “If you want to make a big film, you bet that money on a film that is remade, say a Jungle Book, a Sholay or a Don. This is why all superhero films are the biggest releases of the year. The characters have worked in the past and they will work in future. Nobody creates a new character!”

Tune in to listen to this and more!
NL+Reads%3A+Has+dynastic+politics+been+as+anti-democratic+as+Indian+political+dynasties%3F
access_time2 months ago
Narendra Modi has slammed the Congress for dynastic politics, but has it been that damaging for the country?

Read the full article here: https://www.newslaundry.com/2018/11/20/has-dynastic-politics-been-as-anti-democratic-as-indian-political-dynasties
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access_time2 months ago
इस बार की चर्चा विशेष रूप से ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी की भारत यात्रा के दौरान मचे घमासान को समर्पित रही. हालांकि वह अपने देश लौट चुके हैं. इसके अलावा भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने घोषणा की है कि स्वास्थ्य सही न होने के कारण वे 2019 का चुनाव नहीं लड़ेंगी, हालांकि उन्होंने राजनीति से सन्यास नहीं लिया है. पाकिस्तान के करीबी मित्र अमेरिका द्वारा 1.66 बिलियन डॉलर की सुरक्षा सहायता राशि रद्द करने का फैसला और भारत की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई की लगातार उलझती गुत्थी के इर्दगिर्द इस बार की चर्चा केंद्रित रही.

इस बार की चर्चा में स्वतंत्र पत्रकार स्वाति अर्जुन बतौर मेहमान शामिल हुई साथ ही राजनीतिक पत्रकार सैय्यद मोजिज़ इमाम भी पहली बार चर्चा का हिस्सा बने. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री के विशेष संवाददाता अमित भारद्वाज भी चर्चा का हिस्सा रहे. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

चर्चा की शुरुआत अतुल चौरसिया ने स्वाति अर्जुन के सामने एक सवाल रखकर की, “ट्विटर सीईओ जैक डोर्सी ने कुछ महिला पत्रकार और कुछ महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग की. उस मीटिंग में किसी ने उन्हें एक पोस्टर गिफ्ट किया, जिस पर लिखा था- स्मैश द ब्राह्मिनिकल पैट्रियार्की यानी ब्राह्मणवादी पितृसत्ता का नाश हो. इसे जाति विशेष से जोड़कर जिस तरह से दक्षिणपंथी समूहों ने हमला किया, उसे किस हद तक जायज या नाजायज कहा जा सकता है?"

स्वाति ने कहा, “यह जो मुद्दा उठा है मुझे लगता है यह ब्लेसिंग इन डिस्गाइज़ मोमेंट है. सोशल मीडिया के लिए ट्विटर, फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म के लिए. अगर हम भारत में देखे तो हाल के 2-4 सालों में सोशल मीडिया ट्रोलिंग, गाली-गलौज, लिंचिंग जैसी चीजें लगातार बढ़ती जा रही है. पता नहीं कितनी महिलाओं को सोशल मीडिया पर रेप करने की धमकी दी गई हैं. महिलाओं के ख़िलाफ़ भद्दी भाषा का भी इस्तेमाल किया जाता है. तो इसलिए मैं इसको ब्लेसिंग इन डिस्गाइज़ मोमेंट ही मानती हूं.”

वो आगे कहती हैं, “जहां तक सवाल है जाति का तो सोशल मीडिया में कहा जाता है कि पढ़ा-लिखा तबका है जो एक ख़ास तबके से ही आता है. वो ब्राह्मणवाद को ब्राह्मण कैसे समझ लेते हैं. जब आप ब्राह्मणवाद की बात कर रहे हैं तो आप ब्राह्मणवादी पितृसत्ता की बात कर रहे हैं. और जिस दलित महिला ने ये पोस्टर डोर्सी को  दिया उनका ये अभियान काफी सालों से चल रहा है जो की दलित महिलाओं का ग्रुप हैं.”

उन महिलाओं ने बस यही बताया की मैं एक पिछड़ी, निचली जाति से आती हूं तो जब भी मेरे ऊपर कोई हमला करता है तो उसमें जाति का एंगल जोड़ देता है.

यहां पर अतुल ने हस्तक्षेप किया, “मुझे लगता हैं जिस तरह से ब्राह्मणवादी पितृसत्ता को ब्राह्मण जाति से जोड़ा गया उसके दो पहलु हैं. पहला, जो प्रभावी संस्कृति है देश की उस पर सवर्ण जातियों का कब्जा है. जाहिर है ब्राह्मण उसमें शीर्ष पर है. अगर किसी तरह की अच्छाई या बुराई इसमें है तो प्रतीकात्मक रूप से ब्राह्मण को इस्तेमाल किया जाता है. क्योंकि यह ब्राह्मणों की हितैषी की संस्कृति है.”
Chhota+Hafta+%E2%80%94+Episode+199
access_time2 months ago
NL Hafta has gone behind the paywall, but we love our listeners. So here's a little sneak peek into the complete episode.

In this episode of Hafta, we have Shipra Garg, our subscriber from the United States, and Meghnad joining our in-house panel of Abhinandan Sekhri, Manisha Pande, and Raman Kirpal to discuss news that made headlines this week.

Abhinandan begins the podcast by discussing the recent CBI 'leak'. The panel discusses the role of media in covering a crisis that involves the country’s central investigation agency. They also touch upon CJI Ranjan Gogoi’s statement: “You don’t deserve a hearing.” The panel then talks about the outrage against Twitter CEO Jack Dorsey and the death of American citizen John Allen Chau.

Listen to the full episode here: https://www.newslaundry.com/2018/11/23/hafta-199-cbi-leak-smash-brahminical-patriarchy-john-allen-chau
Reporters+Without+Orders+Ep+46%3A+%23CBIvsCBI%2C+%23MadhyaPradeshElections+%26+more
access_time2 months ago
This week's Reporters Without Orders features our host Cherry Agarwal, Special Correspondents Amit Bhardwaj and Prateek Goyal, and Devesh K Pandey, Special Correspondent with The Hindu.

Prateek, who is covering the upcoming elections in Madhya Pradesh shares his insights on core election issues, state politics and the farmer-centric Bhavantar Bhugtan Yojana.

Devesh tells us about the ongoing controversy within the Central Bureau of Investigation. He speaks about the genesis of the fallout, the significance of MK Sinha's petition, CJI Ranjan Gogoi's reaction to The Wire's report during a hearing on DCBI Alok Verma's petition and more.

The podcast also discusses Manohar Lal Khattar’s statement on rape cases in Haryana and death of an RTI activist in Madhya Pradesh. For all this and more, listen up!
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access_time2 months ago
इस बार की चर्चा विशेष रूप से फ़ेक न्यूज़ को समर्पित रही. बीबीसी द्वारा फेक न्यूज़ के ऊपर किया गया एक रिसर्च इस हफ्ते बहस में रहा. इसके अलावा अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा सीएनएन के व्हाइट हाउस संवाददाता जिम एकोस्टा का पास निलंबित करना, बदले में सीएनएन द्वारा ट्रंप को अदालत में घसीटना और एएनआई समाचार एजेंसी की संपादक स्मिता प्रकाश द्वारा रफाल लड़ाकू जहाज बनाने वाली कंपनी दसों के सीईओ का साक्षात्कार इस हफ्ते की एनएल चर्चा के प्रमुख विषय रहे.

इस बार की चर्चा में बीबीसी डिजिटल हिंदी के संपादक राजेश प्रियदर्शी बतौर मेहमान शामिल हुए. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री के असिस्टेंट एडिटर राहुल कोटियाल, विशेष संवाददाता अमित भारद्वाज भी शामिल रहे. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

चर्चा की शुरुआत अतुल चौरसिया ने राजेश प्रियदर्शी के सामने एक सवाल के साथ की- “बीबीसी के रिसर्च की बड़ी चर्चा है. हम चाहेंगे कि आप संक्षेप में इसके मुख्य नतीजों और रिसर्च के तरीके के बारे में बताएं.”

राजेश प्रियदर्शी ने बताया, “फ़ेक न्यूज़ को लेकर हर तरफ से कहा जाता है कि दूसरा पक्ष फ़ेक न्यूज़ फैला रहा है. समस्या की जड़ वहां है जहां आम आदमी किसी न्यूज़ पर भरोसा करके उसे आगे बढ़ाता है. यह काम वो किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए करता है.”

वो आगे कहते हैं, “हमने इस रिसर्च के जरिए यह जानने की कोशिश की है कि फ़ेक न्यूज़ फैलाने वाले लोग कौन हैं. किन वजहों से वो ऐसा करते हैं. उनके दिमाग में क्या है. ऐसे लोगों का मोटीवेशन क्या है. इस पर बीबीसी ने एक क्वालिटेटिव रिसर्च की है, जिसमें चीजों को गहराई से समझने की कोशिश की गई है. हमने राष्ट्रीय स्तर पर कोई सर्वेक्षण नहीं किया है. अलग-अलग शहरों में अलग-अलग आयु, आय और जेंडर के 40 लोगों के सोशल मीडिया बिहेवियर को परखा गया है.”

यहां अतुल ने हस्तक्षेप किया, “आपने कई बातें बताई. रिसर्च से एक बात सामने निकल कर आई कि भारत में फ़ेक न्यूज़ के पीछे नेशनलिज्म बड़ा फैक्टर है जो लोगों को फ़ेक न्यूज़ की दिशा में प्रेरित कर रहा है. दुनिया भर में दक्षिणपंथी सोच का प्रभाव फ़ेक न्यूज़ के ऊपर ज्यादा है. इस समय ज्यादातर देशों में ऐसी ही सरकारें भी हैं. तो इसमें सरकारों की क्या भूमिका दिखती है.”

राजेश के मुताबिक इसमें चार चीजें मुख्य रूप से भर कर सामने आई. हिंदू सुपीरियॉरिटी, हिंदू धर्म का पुनरुत्थान, राष्ट्रीय अस्मिता और गर्व, एक नायक का व्यक्तित्व (इस मामले में मोदी). ये चारो चीजें आपस में गुंथी हुई हैं.

राहुल कोटियाल ने इसके एक दूसरे पहलु पर रोशनी डालते हुए कहा, “इस रिसर्च को किसी अकादमिक दस्तावेज में शामिल नहीं किया जाएगा. इसकी वजह शायद इसका छोटा सैंपल साइज़ है. यह विरोधियों को इस रिसर्च को खारिज करने का अवसर भी देता है. बीबीसी इस सवाल से कैसे निपटेगा?”

जवाब में राजेश कहते हैं, “मूल बात यह है कि बीबीसी कोई अकादमिक संस्था नहीं है. यह येल या हार्वर्ड नहीं है. हमारी चिंता मीडिया फ्रटर्निटी में मौजूद फ़ेक न्यूज़ की समस्या थी. यह रिसर्च कोई अंतिम सत्य नहीं है.”

अमित भारद्वाज का सवाल इस पूरी चर्चा को एक अलग धरातल पर ले जाता है. उन्होंने कहा, “इस रिसर्च से यह बात उभर कर सामने आई कि हिंदुत्व और नेशनलिज्म फ़ेक न्यूज़ के अहम फैक्टर हैं. रिपोर्ट पढ़कर हिंदुत्व का फैक्टर बड़ी प्रमुखता से सामने आता है. लेकिन रिपोर्ट में नेशनलिज्म शब्द चुना गया, हिंदुत्व नहीं. क्या यह सोच-विचार कर उठाया गया क़दम था?”

इस सवाल के साथ ही अतुल ने भी एक सवाल जोड़ा, “आपने बताया कि 40 लोगों से सहमति ली गई कि आप उनके सोशल मीडिया बिहेवियर का आकलन करना चाहते हैं. बहुत संभव है कि जिन लोगों पर आप रिसर्च कर रहे थे उनके दिमाग में कहीं न कहीं यह बात चल रही हो कि उनके ऊपर नज़र रखी जा रही है, ऐसे में उनका व्यवहार सामान्य न रहकर चैतन्य हो सकता है.”

इन सवालों के बेहद दिलचस्प जवाब राजेश प्रियदर्शी ने दिए. उनका पूरा जवाब और अन्य विषयों पर पैनल की विस्तृत राय जानने के लिए पूरी चर्चा सुने.
Chhota+Hafta+-+Episode+198
access_time2 months ago
NL Hafta has gone behind the paywall, but we love our listeners. So here's a little sneak peek into the complete episode.

In this week’s Hafta episode, Supreme Court lawyer Mihira Sood joins our in-house panel of Madhu Trehan, Raman Kirpal, and Manisha Pande.

The gang goes on to discuss topics like sexual harassment laws in India, cancellation of singer T.M. Krishna’s concert in Delhi, and the controversy unfolding in the United States wherein CNN filed a suit against the Trump administration when the organisation’s Journalist Jim Acosta was discredited from accessing The White House.

Listen to the full episode here:
Reporters+Without+Orders+Ep+45%3A+Chhattisgarh+elections%2C+%23Sabarimala%2C+Herald+House+%26+more
access_time2 months ago
This week's Reporters Without Orders features our host Cherry Agarwal, Special Correspondent Amit Bhardwaj, and Desk Writer, Gaurav Sarkar. The panel is joined by two guests over the phone: Chattisgarh-based Kamal Shukla, editor of Bhumkal Samachar and Kerala-based Vishnu Verma from Indian Express digital.

In the podcast, Amit talks about how sections of the media over-reported Tej Pratap Yadav's divorce. Yadav is the elder son of former Bihar chief ministers Lalu Prasad Yadav and Rabri Devi. Amit also weighs in on how stories of news value from Bihar such as the developments in the Muzaffarpur Shelter Home case have been eclipsed. Adding to the point, Cherry speaks about the repeated denial of bail to Delhi-based analyst and journalist Abhijit Iyer-Mitra.
Speaking about the ground reality of Chhattisgarh elections, senior journalist Kamal Shukla tells the panel why the narrative of a larger voter turnout smells fishy. Moving on, Gaurav talks about his report on National Herald and the controversy around Herald House. He also talks about IndiaSpend's report on the rising number of hate crimes in the country.
The panel is joined by Vishnu Verma over the phone. Talking about the Supreme Court's recent Sabarimala verdict, Verma speaks about how political parties like the BJP and the Congress are busy appeasing the voters. Then there is a discussion about
CNN's lawsuit against US President Donald Trump and more. Listen up!
NL+Reads%3A+Hindi+journalism+and+the+emergence+of+modern+Hindi%3A+Part+4
access_time2 months ago
From the growing influence of Sanskrit to the ‘Hinglish’ used today, Hindi is an evolving lifeform.

Read the article here: https://www.newslaundry.com/2018/11/03/hindi-journalism-and-the-emergence-of-modern-hindi-part-4
NL+Reads%3A+Hindi+Journalism+and+the+emergence+of+modern+Hindi%3A+Part+3
access_time2 months ago
The awareness of Hindi’s importance in the first half of the 20th century was imbued with its practical utility and inspired by inclusive nationalism.

Read the article here: https://www.newslaundry.com/2018/10/24/hindi-journalism-and-the-emergence-of-modern-hindi-part-3
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access_time2 months ago
भारतीय रिजर्व बैंक की स्वायत्तता पर सरकार का खतरा, डोनाल्ड ट्रम्प और मीडिया के बीच टकराव, इसकी भारतीय संदर्भ में विवेचना, कर्नाटक में लोकसभा की तीन और विधानसभा की दो सीटों पर हुआ उपचुनाव, इसमें जेडी(एस) और कांग्रेस गठबंधन की जीत, पं. नेहरू के आवास तीनमूर्ति भवन की नेहरू मेमोरियल म्यूज़ियम और लाइब्रेरी की गवर्निंग बॉडी में 4 नए सदस्यों की नियुक्ति आदि इस हफ्ते की चर्चा के मुख्य विषय रहे.

इस बार चर्चा में बतौर मेहमान शामिल हुए पत्रकार नीरज ठाकुर, जो मूलरूप से आर्थिक मामलों के पत्रकार हैं. इनके अलावा स्तम्भ लेखक आनंद वर्धन और न्यूज़लॉन्ड्री के विशेष संवाददाता अमित भारद्वाज भी चर्चा में शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल चौरसिया ने पूछा, “आरबीआई एक्ट का सेक्शन 7 यानी जिस रेयर लॉ की बात हो रही है, वह सरकार को किस तरह के अधिकार देता है?”

इसका जवाब देते हुए नीरज ठाकुर ने कहा, “सरकार के पास पैसे की कमी पड़ गयी है, और वह जल्द से जल्द कुछ कुछ निर्णय लेना चाह रही है. जिसे आरबीआई मना कर रहा है. आरबीआई हमेशा से अपनी स्वायत्तता को बचाए रखना चाहता है, जबकि सरकारें हमेशा से चाहती रही हैं कि वह उनके हिसाब चले. इसके अंदर सेक्शन 7 सरकार को किसी भी तरह का निर्देश जारी करने का अधिकार सरकार को देता है, जिसे आरबीआई को मानना ही पड़ेगा.”

नीरज ने इस संकट के उत्पन्न होने की वजहें और भारतीय अर्थव्यवस्था में पैदा हुए उटापटक के सूत्र नोटबंदी से जोड़े. जिसको लेकर सरकार ने समय-समय पर बड़े-बड़े दावे किए थे. लेकिन आज की तारीख में यह बात साबित हो गई कि नोटबंदी असफल रही.

अतुल ने नोटबंदी के सवाल को आगे बढ़ाते हुए आर्थिक विशेषज्ञ प्रियरंजन दास का हवाला दिया जिन्होंने कहा है कि सरकार का आकलन था कि नोटबंदी से अर्थव्यवस्था में करीब साढ़े तीन से चार लाख करोड़ रुपए का काला धन वापस नहीं लौटेगा. लिहाजा सरकार यह शेष रकम रिजर्व बैंक से लेगी. लेकिन नोटबंदी में सारा पैसा वापस आ गया. अब सरकार वही साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए रिजर्व बैंक से उसके रिजर्व से वसूलना चाहती है.

आनंद वर्धन ने इसका जवाब देते हुए कहा, “अब जबकि सत्ता का केन्द्रीकरण बहुत अधिक है, और इसमें संवादहीनता और पारदर्शिता की कमी है. नोटबंदी के उद्देश्य पहले भी बार-बार बदलते रहे हैं. इसमें सरकारी संवाद भी बहुत हद तक लचर रहा है. शायद सरकार की सोच चुनाव के पहले इस पैसे के जरिए कुछ लोकलुभावन योजनाओं को बड़े पैमाने पर शुरू करने की है.”

नीरज ने सरकार द्वारा रिज़र्व बैंक के ऊपर बनाए जा रहे दबाव को पूरी तरह से राजनीतिक निर्णय बताया.

अमित भारद्वाज के मुताबिक पंजाब नेशनल बैंक घोटाला सामने आने के बाद से चीजें बदली हैं. जैसे फरवरी सर्कुलर है जिसके जरिए 11 बैंकों को पीसीए के तहत लाया गया. विरल आचार्य ने जैसे कहा कि जो आरबीआई या केंद्रीय बैंक के स्वायत्तता के साथ जो खिलवाड़ करेगा, उसे मार्केट की नाराजगी झेलनी पड़ेगी. उस बयान के बाद अरुण जेटली का बयान आया कि आरबीआई को सरकार के मुताबिक ही काम करना चाहिए क्योंकि वह चुनी हुई संस्था है और लोगों के प्रति जवाबदेह है. इससे आरबीआई और सरकार के बीच का टकराव सतह पर आ गया.

आगे उन्होंने कहा कि रघुराम राजन की छवि सरकार विरोधी बना दी गई थी, लिहाजा राजन की इच्छा के बाद भी उन्हें दूसरा कार्यकाल न देते हुए उर्जित पटेल को नया गवर्नर सरकार ने नियुक्त किया. उनके बारे में यह धारणा बनाई गई कि वे गुजरात से आते हैं और मोदी के करीबी हैं. अब इस संकट के बाद अगर उर्जित पटेल इस्तीफा देकर दे जाते हैं तो दुनिया के बाजार में सरकार की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को बड़ा धक्का लगेगा.

पैनल की विस्तृत राय जानने और अन्य मुद्दों के लिए सुनें पूरी चर्चा.
Chhota+Hafta+-+Episode+197
access_time2 months ago
NL Hafta has gone behind the paywall, but we love our listeners. So, here's a little sneak peek into the complete episode.

This week features our in-house panel comprising Abhinandan Sekhri, Manisha Pande, Anand Vardhan and Madhu Trehan. A lot happened in the past week: from air pollution and firecrackers in Delhi to Sabarimala protests in Kerala, Trump’s press conference in the White House to Arnab Goswami being appointed a member of the Nehru Memorial Museum in Lutyens’ Delhi. The panel also discusses the killing of Avni the tigress (which has left her two cubs orphaned), the Ram Mandir issue and a lot more.

Listen to the full episode here:
The+Awful+and+Awesome+Entertainment+Wrap+Ep+91%3A+a+%27%23MeToo+bag%27%2C+BlackkKlansman+and+more
access_time3 months ago
In this episode of The Awful & Awesome Entertainment Wrap, Abhinandan Sekhri and Rajyasree Sen talk about the “viral videos” made around the Diwali season and some movies.

Rajyasree starts off the discussion by talking about the "#MeToo bag" which has been designed by Priyanka Vachchani and which is claimed can also be used for self-defence. She explains how the #MeToo movement has been used in the fashion business and how the ad that was put out was cringe-worthy. The discussion moves on to HP’s recent Diwali ad titled "#GoLocal" which Abhinandan and Rajyasree think is overly emotionalised.

The hosts then talk about the Hollywood movie BlacKkKlansman, directed by Spike Lee and released earlier this year. The movie is a true story about the first Black-American cop who infiltrated the Ku Klux Klan. The consensus is that our subscribers should watch this fun-packed and well-shot movie, which Abhinandan says is a political statement by the director against Trump. Abhinandan also briefly talks about a 1993 western action thriller called Tombstone.

Abhinandan then moves on to romantic comedy-drama Crazy Rich Asians directed by Jon M Chu which released earlier this year. He says it's a classic love story but also reinforces some stereotypes. Rajyasree talks about a commercial by Ghadi Detergent, which steers the discussion into the stereotypes and set standards of gender and class in the Indian community. They discuss a special Karwa Chauth commercial by Nykaa titled "Qaid", featuring India’s first transsexual model Nikkey Chawla. Abhinandan and Rajyasree ask the same question: “Why has Karwa Chauth been unnecessarily brought in to convey such an emotion?” They agree it's a good commercial, but Rajyasree says it's still a marketing gimmick.

This and more, so listen up!
Reporters+Without+Orders+Ep+44%3A+%23RBIvsGovt%2C+%23AyodhyaRamMandir%2C+Bihar+lynching+%26+more
access_time3 months ago
What is #RBIvsGovt all about? This episode of Reporters Without Orders with Business Standard's assistant editor Arup Roychoudhury, Newslaundry's Amit Bhardwaj, Gaurav Sarkar and Cherry Agarwal has the details. The panel is joined by Prem Shankar Mishra, senior correspondent with Navbharat Times Lucknow, to discuss discrepancies in teacher recruitment in Uttar Pradesh and the impact of his story.

The discussion starts with Arup talking about the rift between the Reserve Bank of India and the government. Speaking about RBI's independence, Arup explains that RBI's autonomy is without any legal backing. Weighing in on media's coverage of economic policy, he adds, “The general channels don’t have the bandwidth or intelligence to cover this."

Prem joins the panel to speak about developments in the teacher recruitment scam following his story. As matters stand, the High Court has taken cognisance of the issue.

Speaking about an issue that got more attention than it deserved, Amit says that the Ayodhya dispute was over-reported in the media. He adds that sections of the media also misreported the issue, which was hyped without much context.

Gaurav talks about a recent incident in Bihar, where an 80-year-old Muslim man was lynched and burned by a mob. This found little coverage in mainstream media, Gaurav tells the panel. Meanwhile, he says, the Statue of Unity got more coverage than it deserved.

Cherry talks about how the New York Times' Pakistan edition skipped publishing a critical op-ed piece by Mohammed Hanif. The article was about Asia Bibi's acquittal. She also talks about Arnab Goswami’s appointment to the Nehru Memorial Museum & Library and killing of five Bengali-speaking men in Assam's Tinsukia.

For this and more, listen up!
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access_time3 months ago
दंतेवाड़ा में हुआ नक्सली हमला, पाकिस्तान में आसिया बीबी के ईशनिंदा मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला और पाकिस्तानी अवाम का विरोध, राम मंदिर की सुनवाई की तारीख बढ़ने और हाशिमपुरा नरसंहार पर आया दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला आदि इस बार की एनएल चर्चा का विषय रहे.

इस बार की चर्चा में दो खास मेहमानों ने टेलीफोन के जरिए हिस्सा लिया. इनमें हैदराबाद से पत्रकार मालिनी सुब्रमण्यम, जिन्होंने नक्सली इलाकों में काफी पत्रकारिता की है और साथ ही पाकिस्तान से बीबीसी के पूर्व पत्रकार हफीज चाचड़ शामिल हुए. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री के असिस्टेंट एडिटर राहुल कोटियाल, विशष संवाददाता अमित भारद्वाज भी शामिल रहे. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल चौरसिया ने दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले और दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे किसी भी हिंसाग्रस्त इलाके में काम करने वाले पत्रकारों की क्या चुनौतियां हैं, जो पत्रकार वहां जा रहे है उनको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? यह बड़ा प्रश्न है. इसके जवाब में मालिनी सुब्रमण्यम ने कहा, “यह बहुत ही बड़ा घटना है. और इस बात पर दोनों पक्षों को, सरकार और माओवादी, सफाई देने की जरूरत है. हालांकि माओवादियों ने एक पर्चा जारी कर कहा है कि- “पत्रकारों पर हमला करने का उनका कोई उद्देश्य नहीं था. उन्होंने पुलिस के ऊपर हमला किया था. जैसे ही उन्होंने पुलिस को देखा तो हमला कर दिया. इस हमले को लेकर प्रपोगेंडा चलाया जा रहा है कि माओवादियों ने पत्रकारों को निशाना बनाया. उन्हें बिलकुल भी पत्रकारों के बारे में नहीं था पता था.”

अतुल ने पुलिस और पत्रकारों के साथ होने की ओर ध्यान खींचते हुए सवाल किया कि क्या पत्रकारों को ऐसे युद्धरत इलाकों में किसी भी एक पार्टी (सुरक्षा बल या माओवादी) के साथ रिपोर्टिंग के लिए जाना चाहिए? क्योंकि वहां किसी एक पार्टी के साथ होने की सूरत में रिपोर्टर खुद ब खुद दूसरी पार्टी के निशाने पर आ जाते हैं. मालिनी ने डीडी के पत्रकारों द्वारा की गई एक चूक बताया. उनके मुताबिक पत्रकार को स्वतंत्र रूप से ऐऐसे इलाकों में जाना चाहिए. पुलिस चाहे कितनी भी संख्या में हो, पत्रकार के साथ होना खतरे का सबब है.

इसी चर्चा को आगे बढ़ते हुए राहुल कोटियाल का एक सवाल आया कि यह जो घटना घटी है, क्या इसको एक छोटी-मोटी घटना मान लिया जाये या फिर इसमें कोई बड़ा संदेश छिपा है? मालिनी ने जवाब में कहा, “इसमें से एक संदेश पत्रकारों को लिए है. एंबुश आए दिन होते रहते हैं. तो ऐसे इलाकों में पत्रकारों की अपनी पहचान के साथ जाना होगा. जैसा कि माओवादियों ने भी कहा है कि कोई पत्रकार चुनाव कवर करने आ रहा है, वह स्वतंत्र होकर आए. किसी भी तरह की सुरक्षा न ले.”

न्यूज़लांड्री के रिपोर्टर अमित भारद्वाज ने एक नए पहलू की पर रोशनी डालते हुए सवाल किया कि दरगा कमेटी द्वारा जारी चिट्ठी, जिसमें माओवादियों ने पत्रकारों और चुनाव कर्मियों से कहा कि वो आयें चुनाव कवर करें, चुनाव प्रक्रिया में शामिल हों लेकिन बिना सुरक्षाबलों के। हम उन्हें क्षति नहीं पहुंचाएंगे, लेकिन वहीं दूसरी तरफ अटैक करते हैं। तो क्या इसमें विरोधाभाष नजर नहीं आता? जिसके जवाब में मालिनी ने कहा कि हर पक्ष स्वयम को बचाने की कोशिश कर रहा है।

इस विषय के आखिर में अतुल ने कहा कि डीडी न्यूज़ के पत्रकारों की तरफ से यह बड़ी चूक हुई है. दुनिया भर के संघर्षरत इलाकों में, युद्धग्रस्त इलाकों में रिपोर्टिंग के लिए जाने वाले पत्रकारों को एक स्पष्ट गाइडलाइंस फॉलो करने की जरूरत है. उन्हें क्या करना है, क्या नहीं करना है, इसकी स्पष्ट समझ होनी चाहिए. यह ज़िम्मेदारी पत्रकारिता संस्थानों की भी है कि वे ऐसे पत्रकारों को व्यापक प्रशिक्षण देकर ही युद्धरत इलाकों में रिपोर्टिंग के लिए भेजें.

पैनल की विस्तृत राय जानने और अन्य मुद्दों के लिए सुनें पूरी चर्चा.
Hafta+196%3A+Dantewada+attack%2C+air+pollution%2C+the+Statue+of+Unity+and+more
access_time3 months ago
In this week's NL Hafta, we're joined by former NDTV editor Hridayesh Joshi along with the regular Hafta gang of Abhinandan Sekhri, Manisha Pande, Anand Vardhan and Madhu Trehan. This week we discuss air pollution, the death of Doordarshan News cameraperson Achyuta Nanda Sahu who was killed in a Naxal attack, the new Sardar Vallabhbhai Patel statue, and a little more on publishing houses.

An expert on subjects like climate change, Naxalism and politics, Hridayesh Joshi gives us interesting insight in this episode. Starting with air pollution, Joshi talks about various development schemes of the government like the Char Dham Yatra project, which led to the indiscriminate cutting of trees in Uttarakhand. Various nuances of climate change are touched upon. Joshi also tells us how the death of the Doordarshan News journalist was avoidable and how reporting from a Naxal zone has to be done while following certain cardinal rules.

Hear Madhu Trehan speak on a not very decent tweet by Divya Spandana. She also tells us why "Sharam sabki utari hui hai' when it comes to politics and politicians. The panel also talks about Twitter obsessions and its hazardous effects. Will the coming elections be the dirtiest and the cheapest one we've seen yet? Have we normalised Gaali-Galoch in politics?

This and more in the latest episode of NL Hafta!
NL+READS%3A+%23MeToo+in+newsrooms%3A+battling+sexism+since+the+1960s
access_time3 months ago
Each generation forged ahead in fighting misogynist forces.

Read the article here: https://www.newslaundry.com/2018/10/29/metoo-in-newsrooms-battling-sexism-since-the-1960s
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